रहुआक प्रसिद्ध पारसमणिनाथ मंदिर प्रांगण मे होयत अखंड नवाह कीर्तन

रहुआ-संग्राम पारसमणि नाथ मंदिर प्रांगन मे 23 मार्च से शुरु होगा अखंड नवाह संकीर्तन, 22 मार्च को होगा कलश शोभा यात्रा

डॉ. रामसेवक झा द्वारा रिपोर्टिंग (मार्च २०, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद).

मिथिला धार्मिक और तीर्थ स्थल को लेकर प्रारंभ से हीं प्रसिद्ध है । महादेव मंदिर, देवी मंदिर और ऐतिहासिक महत्व के दृष्टि से मिथिला पूर्व से हीं धनी है । मधुबनी जिले के रहुआ – संग्राम ग्राम में अवस्थित पारसमणि नाथ मंदिर का प्रांगन एक तीर्थ स्थल का स्वरूप लिए भक्ति का केन्द्र बन गया है । इस प्रांगन में बाबा पारसमणि नाथ मंदिर के अलावे भव्य पार्वती मंदिर, नागेश्वर नाथ मंदिर, हनुमान जी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर और माँ तारा स्थली विद्यमान है । मंदिर प्रांगन के बाहर विशाल शिव की प्रतिमा भी स्थापित किया गया है, जो आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है । भक्त यहाँ प्रतिदिन हजारों की संख्या में पूजा – अर्चना कर अपनी आस्था निवेदित करते हैं ।

मंदिर के सेवा में तल्लीन पंडा परिवार ने बताया कि पूर्व में स्थापित अंकुरित शिवलिंग था, जिसे वर्षो से भक्त गण पूजा अर्चना करते आ रहे थे । पुरानी शिव मंदिर जिसे राजा के द्वारा लगभग 1000 – 1200 वर्ष पूर्व में बनाया गया था । जो पुरानी शिव मंदिर 1988 ई० के भयाबह भूकम्प में टूट गया । वर्तमान शिव मंदिर जिसे ग्रामीणो ने मिलकर आपसी सहयोग से भव्य मंदिर बनाकर दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित कर दिये, जो आज भी अद्भत छटा बिखेर रही हैं ।

2006 ई० में शिव लिंग चोरी होने के बाद ग्रामीणों ने 2007 ई० नया शिव लिंग उसी आकार प्रकार के स्थापित किये । किंवदिन्ति है कि एकबार लगभग 35 वर्ष पूर्व इसी शिव मंदिर में नाग आ गये थे । भक्त लोगकर पूजा करते रहे, कुछ लोग डर भी रहे थे । लेकिन वह नाग न ही भाग रहे थे, न हीं डर रहे थे । जब काफी लोगों ने नागराज का दर्शन कर लिये, उसके बाद अचानक नागराज अदृश्य हो गए । इस तरह की घटनाएं शिव के प्रति आस्था को और गहरा बनाती है ।

बाबा पारसमणि नाथ की महिमा अचंभित करने वाली है इसलिए कि यह स्थल सिद्धपुरूष लक्ष्मीनाथ गोसाई की सिद्धस्थली भी रही है । साधना करने के लिए गुफा गये जहाँ बड़े प्रतापी संतों ध्यान में मग्न रहते थे । वहाँ उन्होंने बहुत दिनों तक साधना किये । फिर गुरू हीं आदेश दीये कि तुम रहुआ – संग्राम में अवस्थित पारसमणि नाथ के पास जाओ, जहाँ तुम्हें सिद्धि मिलेगी और तुम योग – साधना का प्रचार – प्रसार कर लोगों का भलाई करना । अन्य स्थानों से वापस आने के बाद परमहंस लक्ष्मीनाथ गोसाई यहीँ बाबा पारसमणि नाथ के स्थल पर हीं सिद्ध हुए । जगह – जगह साधना स्थली बनाये । जो बबाजी कुटी के नाम से प्रख्यात हुआ । उस साधना स्थली में परशर्मा, बनगाँव, लखनौर, फैटकी, दुहबी, महिनाथपुर, सिंगिया, मौकी, तारागाँव, नाम का प्रमाण अभी भी उपलब्ध है । रहुआ अवस्थित साधना स्थली में प्रमाण अभी भी उपलब्ध हैं कि जिस पीपल के पेड़ के नीचे गोसाईं साधना करते थे, उस पुरानी जगह पर नई पीपल के पेड़ उगे हुए हैं, साथ हीं साधना स्थली में अभी भी साधक गण साधना करते हैं ।

ग्रामीणों द्वारा 23/03/2017 से अखंड नवाह संकीर्तन का आयोजन किया गया है । नवाह संकीर्तन के भक्तिमय माहौल से मन्दिर व आसपास के माहौल को गुञ्जायमान कर लोगों को धर्म की ओर जीवन को समर्पित करने के लिये प्रेरित कर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह किया जाएगा । नवाह संकीर्तन के लिए 22 मार्च को कलश शोभा यात्रा निकाली जाएगी । आयोजक परिवार द्वारा कीर्तन मंडली को नवाह संकीर्तन में सम्मलित होकर स्वर दान कर धर्म के भागीदार होने का आह्वान किया । कहा भी गया है “कलयुग केवल नाम आधारा” – कलियुग में केवल भगवान् का नाम का ही मुख्य आधार है मनुष्य के पास।

कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु कमला कांत झा, सच्चिदानंद झा, दुखमोचन झा, हरिश्चन्द्र झा, गंगा प्रसाद सिंह, गोविंद नारायण झा, राजकांत झा, विजयभानु सिंह, गणेश प्रसाद सिंह, शिलाकांत झा, सोहन मिश्र, दिवाकर झा, सुमनजी, बोलबम झा, नारायण झा, रतन कुमार झा, रमाकान्त झा, डॉ.रामसेवक झा, नुनु झा सहित सम्पूर्ण ग्रामीण पूरे मनोयोग से लगे हुए हैं ।

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