मिथिला मे महापुरुषक अवतार होएत रहल अछिः कारू खिरहरिक विशिष्ट परिचय

मिथिलाक ऐतिहासिक पुरुषः कारू खिरहरि

मूल लेखः डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव
अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी
सत्रहम् शताब्दीक महान् शिवभक्त कारू खिरहरि केर जन्म सहरसा जिलाक ‘मैना-महिपूरा’ गाम (महिषी प्रखंड) मे भेल छलन्हि। अरियार खिरहरिक पुत्र नन्द खिरहरि आर तिनकर चारि पुत्र महिनाथ, कारू, सहदेव और लच्छन मध्य ओ मैझला बेटा छलाह। महिनाथ अपन पाण्डित्य पर गर्वित छलाह तथा ग्रामवासी केँ नित्य धर्म एवम् कथा सुनाकय अपन अलगे धाक जमौने छलाह। कारूक शिवभक्तिपर महिनाथ व्यंग्य करैत रहैत छलाह। एहि सँ दुःखी भऽ कय कारू ‘गोरहोघाट’ पर ‘नचुकेश्वर महादेव’ केर मन्दिर मे शिव-दर्शन लेल संकल्पित भऽ उग्र तपस्या करय लगलाह। अपन सेवक केर मान रखबाक वास्ते महादेव प्रकट भेलाह आर कारू केँ दर्शन दैत कृतकृत्य कयलाह – ई किंवदन्ति काफी प्रचलित अछि। तदोपरान्त हुनक पैघ भाइ महिनाथ केँ कारूक भक्तिक उपहास करबापर बहुत बेसी पछतावा भेलन्हि ईहो मान्यता प्रसिद्ध अछि।
 
कारू केर विषय मे कतेको रास दिव्य-अद्भुत कथा सब जनश्रुति मे प्रचलित अछि। जहिना दन्तकथा सब लोक आदिकाल सँ कहैत-सुनैत आबि रहल अछि, कारू खिरहरिक विभिन्न कथा सेहो तहिना लोकमानस मे कहल-सुनल जेबाक परंपरा आइयो विद्यमान भेटत। हिनकर बारे मे एकटा ईहो कथा अत्यन्त प्रचलित अछि जे एक बेर कारू खिरहरि कुशेश्वरस्थान (दरभंगा) स्थित महादेवक अत्यन्त प्रसिद्ध मन्दिर मे बाबाक दर्शन लेल पहुँचलाह त मन्दिरक केबाड़ स्वस्फूर्त खुजि गेल छल। एहि प्रकरणक बाद सँ हुनक सिद्धिक गाथा आरो बेसी लोकमानस मे प्रवेश कय गेल। चारूकात कारू खिरहरिक शिवभक्तिक चर्चा आर कुशेश्वरस्थानक उपरोक्त प्रकरण सँ हुनक सिद्धिक गाथा व लोकमान्यता बहुते बढि गेल। ओतय सँ कारू ‘पलवा बथान’ चलि गेलाह। हुनकर पित्ती दीना खिरहरि ओतहि रौताडीहक नजदीक झाझाघाटपर गाय पालन-पोषण करैत छलाह। कारूक चमत्कार एहेन छल जे कोनो माल-जाल-मवेशी केँ कनेकबो अस्वस्थता होएते कारू द्वारा उपचारक रूप मे एकटा फूल दऽ देला सँ ओ स्वस्थ भऽ जाएत छलय। एतबा नहि, कतहु केकरो कोनो तरहक घर-गृहस्थी मे समस्या होएक त लोक कारू सँ विशेष कृपा करैत निवृत्ति ओ निदानक बाट पाबि जाएत रहय। एहि तरहें कारू समान शिवभक्त लोकमानस मे प्रसिद्धि पाबि गेल छल।
 

कारु खिरहर लोकदेव केर भव्य मन्दिर – फोटो साभारः पवन चौधरी महिषीधाम

एक बेर कारूकेँ प्रत्यक्ष दर्शन दय केँ भगवान् शिव कहलनि जे तोहर मृत्यु आइ सँ सातम दिनक बाद बाघिन द्वारा तोरा ऊपर हमला सँ हेतौक। तखन ७ दिनक अबधि मे ओ स्वजन-परिजन सँ भेंटघाँट करैत अपन नानीगाम ‘डूमरी’ पहुँचि गेलाह आर ओतय अपन नाना-नानी सँ भेंट केलाक बाद सातम दिन ‘अधरीचर बथान’ मे एकटा बाघिन केर आक्रमण सँ हुनक मृत्यु भऽ गेल। कारूक पार्थिव शरीर त नहि रहल मुदा हुनक सूक्ष्म शरीर सँ लोकमंगल बादहु मे होएत रहल, होएत आबि रहल अछि। मुख्य रूप सँ हुनक पूजा ‘लहठा बथान’ मे कएल जाएत अछि। हुनक दिव्य-अद्भुत रूप केर एक घटना ‘किसनी यादव’ केर संग घटल। ओ कारूक गीत गबैत खेत मे हर जोएत रहल छलाह। एकाएक कियो ब्राह्मण हुनका सोझाँ आबिकय कारूक सम्पूर्ण कथा सुनेबाक इच्छा रखलाह। किसनी भाव-विभोर भऽ कय हुनका गीत गाबि-गाबि कारू खिरहरिक प्रसिद्धि आ योगदान सब सुनबय लगलाह। ओहि ठाम बहुते रास लोक सब जमा भऽ गेल। ओम्हर बिना हरवाहे केर हर अपने-आप जोता रहल छल। एहि घटना सँ लोक सबकेँ काफी आश्चर्य-विस्मय-विमुग्ध कय देलक आर तहिये सँ किसनी यादव कारूक सिद्ध भगता बनि गेलाह।

 
महपुरा गाम मे कारूक प्रसिद्ध मन्दिर अछि जतय नित्य हुनकर पूजा कएल जाएछ। रुग्ण पशुक रोग-निवारण मे लहठा बथानक बिभूतक चमत्कार आइयो देखल जाएछ। नवहट्टाक देवन गाम मे सेहो कारू केर मन्दिर बनाओल गेल अछि। एहि तरहें कारू एकटा लोकदेव केर रूप मे पूजित भऽ कय मिथिलाक गौरव सिद्ध-पुरुष भेलाह। ओ अपन महत्व केर आस्तिकता सँ लोक-वन्दित छथि।
 

हरिः हरः!!

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