योगिक आगमण पर स्वार्थि मिथिला

योगिक आगमण पर स्वार्थि मिथिला

भारत विगत मे इंडिया बेसि लागै छल। मुदा भाजपा के उदय धर्मक निक-बेजाह पक्ष के हथियार बनाक भारत के मुनि भरत के नाम पर राखल गेल देश भारत बनाबऽ मे लागल बुझाइत अछि। उत्तर प्रदेशक ज्ञात इतिहास लगभग ४००० बरख पुरान अछि, जत आर्यसभ अपन पहिलुक वस्ती बैसेलक। वैदिक सभ्यताके समय। आर्यसभक स्थल सिन्धु नदि आ सतलुज के मैदानी भाग सऽ यमुना आ गंगा के मैदानी क्षेत्र छल । आर्यसभ दोब (दो-आब, यमुना आ गंगा के मैदानी भाग) आ घाघरा नदि क्षेत्र कऽ अपन घर बनेलक । कहल जाएत अछि,याह आर्य सभक नाम पर भारत देशक नाम आर्यावर्त आ भारतबर्ष (भारत आर्यक एकटा प्रमुख राजा छल) राखल गेल। सनातन सभ्यता के पन्ना पल्टेला पर राज्य विस्तार,सत्ता,शाशन आ दिशानिर्देश मे योगीसभक अहम भूमिका देखल ज्या सकैयऽ, जे भारतीय उपमहाद्वीप के भारतीयकरण करऽ मे अपन पराति गाबएमे लागल छल। मुदा विश्व मे कनि नुकाछुपी खेल कऽ आ किछ सभके देखाइये कs विश्व एखन सभ्यता के द्वन्द मे परल देखाएत अछि। चाहे इंगलैंड के रानि द्वारा पथप्रदर्शित सभ्यता होइ, मुसलमान कौम के सभ्यता होइ वा मैट मे मिटाएल एसिया के पुरान सभ्यता मिथिला सभ्यता होए। कियो जियाब,कियो पसारऽ आ कियो जबर्दस्ती लाधऽ मे लागल अछि।
सभ्यता जे विश्वमे पहिल संविधान के विचारधारा देने अछि। नि मुनि द्वारा याज्ञवल्क्यक आश्रम मे लिखल गेल संविधान इसापूर्व ८म शाताब्दी । सभ्यता जे विश्वक पहिल महिला दार्शनिक के सृंगारने होए। विदुषी गार्गी। स्वतन्त्र सभ्यता जाहि मे स्त्रीके सास्त्रार्थ आ बिद्या आर्जनक परिपोषण भेल होए। काम शास्त्र पर भारति आ आदि शंकराचार्य के सास्त्रार्थ । सभ्यता जतऽ पहिल बेर संघियता आएल होए। दुराचारि राजा कराल के अन्तक बाद आएल संघियता। ओ मिथिला सभ्यता के धरातल के परिपोषण मे बिगत कतेकौ शताब्दी मौन रहल अछि। मिथिला सभ्यता विगत मे विश्व के आलोकित करऽ के क्षमता देखेने अछि मुदा जोरदार ढंगक पश्चिमी सभ्यता के आक्रमण एकरा छियाछिद्र कऽ विश्वमे अपन साम्राज्यवाद लाधऽ के कसरत मे अछि। मिथिला सभ्यता मलिन भेलहे के चलते एखन विश्वक राजनिति मे पछुवाएल अछि। “जे जिबऽ स्याह खेले फौग” सनक जिवित सभ्यतासभ फौग खेलाइमे लागल अछि।
विगतमे ओना कतबो माँगसभ उठल होइ मुदा एखन के अवस्था मे मिथिला नाम पर ठोर अल्गेनाइ न्यून भऽ गेल अछि। मिथिलांचल क्षेत्र सs भारतिय नेतासभ हुकुमदेव,कीर्ति,नितीश मिश्र, अब्दुल बारी सिद्दकी,शकील अहमद सभ मिथिलांचलक् विषय नहियो उठेलापर योगी आदित्यनाथक विकसित करऽ के बात फेर सऽ मिथिला कऽ बोल भरोस देने अछि । एकबगल १८% मुस्लिम के हर्कम्पित कऽ ठारहभेल योगी हिन्दुत्वपर केन्द्रित राजनिती केन्हार सभक लेल दोसरदिस फोहोरा बनल अछि। मुदा हिन्दु मुसलमान संतुल भेल मिथिला संस्कृति मे मुसलमान के नकाइर कोना विकास करत संयासी से एकटा समय देखाएत।
मिथिला विश्वक योगीसभक सास्त्रार्थक केन्द्र रहल अछि। चाहे योगि सुकदेव जनक लग विद्या लेल आएल सन्दर्भ होइ वा आदि शंकराचार्य मान्डण लग आएल सन्दर्भ होइ,मिथिला ज्ञानक पियर छाप काएम केने अछि। मुदा एखन विलुप्त आ असंरक्षित मिथिला सभ्यता योगिक आगमण पर स्वार्थि बनल अछि। दु देश मे बटाएल मिथिला अपन राज्यक लेल करिब ७०० बरख सऽ दुनुकात आन्दोलित अछि मुदा सांस्कृतिक आ भाषिक विषय पर केन्द्रित भऽ। सामाजिक आ राजनितिक कोण सऽ दुनु बगल मिथिला लेल एखनधरि ससक्त आन्दोलन आङुर पर गइन सकैत छि। ओना किछ धार्मिक उर्जा एखन मिथिला पेने अछि एकर साकारात्मकता तानि मिथिला कऽ सिचाई भऽ सकैत अछि।

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One Response to योगिक आगमण पर स्वार्थि मिथिला

  1. Dr Akhilesh Kha

    नीक आलेख । मिथिला जे कहियो स्वतंत्र राज्य रहय । राजनीतिक तथा भौगोलिक अतिक्रमणपर
    मिथिला कहियो विश्वास नहि केलक अपन शांतिप्रियताक कारणे अपन अधिकारो गमोलक । जे मैथिल प्रजातंत्रक जनमदाता, ज्ञान प्राप्त करबाक भूमि एवं सद्भावनालेल प्रसिद्घ रहय से आइ कुहैर रहल अछि । विगत 800 वर्षसँ नेतृत्वकर्ता मतभेद आ हीन भावना मिथिलामे उतपन्न करौलक । आवश्यता अछि मिथिलामे कर्मयोगीकेँ जे नेतृत्व करथि आ अपन क्षेत्र/भाषा आदि के पुनः मान दियाबथि ।

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