मिथिलाक ऐतिहासिक विभूतिः धोबी जातिक लोकदेवता ‘गरीबनबाबा’

गरीबनबाबा – मिथिलावासी धोबी जातिक लोकदेवता

– डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)

उधराग्राम (कमलातट) निवासी गरीबनबाबा धोबी जातिक लोकदेवता भेलाह। हिनक दुइ गोट प्रसिद्ध मित्र छलखिन – घासी गुआर आर बरहम ठाकुर (ब्राह्मण)। तिनू कुश्ती खेलाय लेल उधरागाँव सँ पच्छिम अखाड़ापर जाय्ल करैथ। एक राति कुश्तीक तलठोकी मे कमला मैयाक आसन डोलि गेल। गरीबन केँ मरबाबय लेल कमला मैया अपन भाइ कोइला संगे इन्द्र-दरबार पहुँचि अरदास (विनती) करय लगली। अन्त मे गरीबन केँ मारि देबाक आशीर्वाद लय केँ ओ मर्त्तभुवन घूरि एली। माया निर्मित एक बाघ-बाघिन सँ युद्ध करैत गरीबन मारल गेलाह। हुनकर लहास केँ कमला नदी मे बहा देल गेलनि। एहि बातक खबैर गरीबन केर धर्मपत्नी केँ भेटलनि। अपन सत्त सँ ओ पतिक संस्कार कराबय लेल भगवान् सँ विनती करय लगलीह।

गरीबन केर बहैत लहास नारायणपुर – दोहरा गामक सोझाँ नदी मे कपड़ा धोएत एक धोबीक पैर मे ठेक गेल। मुदा ओ धोबी हुनकर लहास केँ बेर-बेर लात सँ ठेलकय नदी मे बहा देलक। किछु दूर गेलाक बाद एकटा दोसर धोबी द्वारा ओहि लहास केँ देख लेलाक बाद बाहर निकालल गेल। ताबत धरि गरीबनक ‘भाह’ (आत्मा सवारी) ओतय ठाढ एक आदमी पर आबि गेल। भगता संगे खेलाएत गरीबन बजलाह जे एकटा धोबी हमर संस्कार नहि कय हमर अपमान केलक अछि। एकर दुष्परिणाम सब केँ भोगय पड़त। ओतुका धोबी सभक भट्ठी मे कपड़ा जैर जायत। ई सुनलाक बाद सब धोबी मिलिकय गरीबन केर लहासक विधिवत् संस्कार कएलक आर फेर गरीबन ई वचन देलाह जे धोबी द्वारा भट्ठी मे देल गेल कपड़ाक रक्षा दैविक शक्ति द्वारा होयत। तहिये सँ गरीबनबाबा धोबी जातिक लोकदेवता बनिकय पूज्य छथि।

उधरागाँव मे धोबी समुदाय आइयो बास नहि लैत अछि। ओहिठाम गरीबनबाबाक लहास केँ अग्नि-संस्कार नहि भऽ पेबाक कारणे धोबी सब केँ गरीबनबाबाक श्राप लगबाक भय बनल रहैत अछि। कारण गरीबनबाबाक कथनानुसार ओतय ई दुर्घटना घटि गेल छल।

किछु विशेष बातः

विदिते अछि जे मिथिलाक जनसमुदाय मे अपन-अपन श्रम-आधारित जीविकाक पहिल आधार सबकेँ अति प्रिय होएत अछि। एहि ठामक सब वासिन्दा लेल जानकीजी मर्यादा पुरुषोत्तम राम सँ विशेष आशीर्वाद दियौने छथि – एतय जन्म होयबाक अर्थ मोक्ष प्राप्ति सुनिश्चितता मानल जाएछ। ताहि कारण हरेक जन-गण-मन मे स्वाभिमानक रक्षा सर्वोपरि धर्म मानल जाएछ। राजा जनक स्वयं विदेह कहेला। राजा रहितो ओ कहियो राज्य विस्तार वा अन्य राज पर आक्रमण वा हिंसा आदिक मनोभाव सँ कहियो ग्रसित नहि भेलाह। गीता मे भगवान् कृष्ण कहने छथि जे जीबिते मोक्ष प्राप्ति एहि पृथ्वी जनकादि राजा सब केँ भेटलनि। अतः धोबी जाति सेहो अपन श्रम सँ जीवनयापनक सिद्धान्तपर चलैत अछि।

धोबी जाति-समुदाय केँ सेहो मिथिला मे जैजमनका बाँटल रहैत छैक। जाहि गाम मे जतेक धोबी परिवार रहैत अछि, ओहि मुताबिक रोजी दाता परिवार ओकर भाग मे पड़ैत छैक। विभिन्न धार्मिक विध-व्यवहार मे सेहो धोबी जातिक भूमिका अनिवार्य छैक। एतुका अर्थ व्यवस्थाक विलक्षणता कहू जे श्रम-आधारित जनसमुदाय केँ रोजी कमाय लेल काज नहि भेटैत अछि त सक्षम-समृद्ध समाज द्वारा ‘साली’ (साल मे बान्हल आमद, बोइन, आदि) देल जाएत छैक। विडंबना जे आजुक राजनीति मे राजनेता एहि तरहक आपसी सौहार्द्र केँ बढेबाक स्थानपर केवल जातिक नाम पर समाज केँ तोड़िकय वोट टा लैत अछि, आर फेर अपन स्वार्थ मे डूबल रहैत अछि। नहि जानि एहि कठोर सच्चाई सँ स्वयं जनमानस कहिया सजग होयत!

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