जंगलराजः कथा या यथार्थ

पौकेट के लोक

– प्रवीण नारायण चौधरी, कथाकार 

kidnapping image of biharभोरे-भोर राजाधानीक साफ-सुथरा आ हरा-भरा सड़कपर विधायक श्रीनारायण मंडल मार्निंग-वाकिंग मे अपन आदतिक मुताबिक दौड़ लगेलाक बाद थकावट केँ दूर करबाक लेल आब धीरे-धीरे चलैत वापसी अपन कोठी (घर)क दिशा मे आबि रहल छलाह। अचानक दु गोट नकाबधारी व्यक्ति ‘हय रुक! रुकि जो नहि तऽ गोली मारि देबौक’ कहैत हुनका आगू पाछू दुनू दिशा सँ घेरय लागल। श्रीनारायण मंडल जाबत-जाबत सम्हैरतैथ हुनका ओ दुनू लोक गछारैत-पछारैत कनपट्टी मे पेस्तौल सटाकय मुंह सँ आवाज नहि निकालबाक लेल धमकाबैत ओतय सँ कनिकबा दूर कात मे ठाढ एकटा नीला रंगक मारुती भैन दिस लऽ जाय लागल। श्रीनारायण बाबु चकुआइत एम्हर-ओम्हर तकैत छथि, लोक सबकेँ हल्ला करी कि नहि करी सोचैत छथि मुदा गोली सँ मारि देत ताहि डर सँ ओ किछु नहि बाजि ओहि आक्रमणकारी सबहक संग सहजता सँ जाय लगैत छथि, घिघियैत एतबे पूछैत छथिन, “के थिकहुँ बाबु अपने लोकनि आ एना हमरा पर आक्रमण…” – हुनका बिच्चहि मे टोकैत ओ आक्रमणकारी सब ठूनका मारैत कहैत छन्हि, “चुप! चुप रहे! ऊपर जेबाक छौक कि? सबटा पता चलि जेतौक, बस चुपचाप चले।”

मारुति वैन मे पहिने सँ मौजूद नकाबधारी ड्राइवर पछिला गेट खोलि ओकरा सबकेँ अन्दर बैसबैत गाड़ी स्टार्टकय भगाबय लागल। एम्हर अपन अपहरण होएत अपना केँ फँसल बुझि मंडलजी केँ बुझय मे आबि गेलनि जे हो न हो ई अपन कोनो शत्रुपक्षक बिछायल जाल छी, जान बचत तऽ लाख उपाय…. हुनका जेना-जेना कहि रहल छल ओ अपहरणकारी तहिना-तहिना कय रहल छलाह। गाड़ी सरसराएत भागल जा रहल छल, दुनू अपहरणकारी कनपट्टी पर पेस्तौल सटेने छन्हि आ मूरी से गोरिकय रस्ता तक नहि देखय दय रहल छन्हि। मुदा मंडलजी सेहो खूब अखियाएसकय रस्ता आ स्थानक संज्ञान गाड़ीक गति आ दायाँ-बायाँ घूमबाक हिसाबे नपैत जा रहल छथि। कनीकालक बाद ओ गाड़ी रुकि गेल। ताबत हुनकर आँखि पर सेहो पट्टी बान्हि देल गेल छलन्हि। आब हुनका ओ अपहरणकारी सब घूरकी मारैत उतारय लागल। मंडलजी अपन देह चेरा कय लेलनि, मानू जेना ओ बेहोश भऽ गेल होएथ। मुदा अपहरणकारी सब हुनका केहुनिये-केहुनिये कुहियाबैत चलाबय के प्रयास करय लागल, तैयो ओ अन्ठेने रहलाह… अन्त मे हुनका ड्राइवर सहित तिनू गोटा उठा-पुठा कतहु लय केँ विदाह भेल। कनीकाल मे हुनका एकटा खाटपर पारिकय देह-हाथ बान्हि देलक। आर एकटा अपहरणकारी फोन लगबैत बाजय लागल, “सर! काम हो गया है। मंडलबा को हम लोग उठा लाये हैं। आगे क्या करें?” ओम्हर सऽ फोन पर ओकरा जे किछु संदेश भेटलैक, ओ “ओके सर! ओके सर!” कहैत फोन राखि देलक।

मंडलजी केँ साँस लेबा मे सेहो कठिनाई भऽ रहल छलन्हि ओ कछमछाय लगलाह, मुदा बान्हल देह कतेक कछमछायत, ओ घिघियाय लगलाह, “हौ के थिकह तों सब! एना हमरा पर कियैक अत्याचार कय रहल छह?” ताहि पर एक बूट मारैत एक गोट अपहरणकारी बाजल…. “आर चुनाव लड़ह आ हमरा सबहक जीतल सीट पर अपन कब्जा करह…. एखन कि अत्याचार भेलह हँ…. आबऽ न दहक ओकरा आ तखन देखिहह जे कि हाल होएत छह।” बात केँ भँपैत मंडलजी बाजलाह, “ए! कोन नेताक हक छीन लेलियह हम? हम तऽ दिल्ली मे कतेक नीक पैसा कमाएत रही। एक बेर मन भेल तऽ चुनाव लड़लहुँ आ जीत गेलहुँ। एहि मे हमर कोन दोख हौ भाइ?” “आब सबटा दोखे-दोख छह तोहर। जेकरा पौकेट मे एतेक बड़का-बड़का ठीकेदार सँ लैत गामक मैनजन-मुखिया आ सरदार सब छल तेकरा सबकेँ पछाड़िकय तूँ जीत हासिल केलह, जानक डर नहि भेलह?” – जबाब देलकैक ओ अपहरणकारी।

बात बुझय मे आबि गेलनि मंडलजी विधायक महोदय केँ…. ई जरुर चुनाव मे भेटल जीत केर कियो बदला लय रहल अछि। दिल्ली मे रहैत आबि रहल मंडलजी केँ ई चुनावी राजनीति सँ कोनो मतलब नहि छलन्हि। मुदा चान्स मे डान्स करबाक लेल ओहो नोमिनेशन फाएल कय देने छलाह आ अपन बौद्धिक प्रखरताक कारण जनता मे हुनका वोट देबाक लेल एकटा लहर सनक चलल आ सेहो तरे-तरे एकटा धार हुनकर पक्ष मे गेल। मंडलजी पेशा सँ एकटा इन्जिनियर आ खूब तेज-तर्रार लोक छलाह। अपन जीवनक ४ दसक ओ बाहरे रहल छलाह। खूब पाइ-कौड़ी सेहो कमेलनि आ आब गाम-घर केर सेवा करबाक लेल गामहि मे रहब शुरु कएने छलाह। धिया-पुता सब दिल्लीक घर पर रहैत छलन्हि, मुदा अपने सपत्नी गाम आबि गेल छलाह। बीच-बीच मे दिल्ली सेहो जाएथ आ फेर पटनाक सुख सेहो भाग्य मे लिखल छलन्हि से बिन विचारेक विचार मे लोक सबहक अनुरोध पर चुनाव लड़लनि आ जीत हासिल कएलनि। लोक सब ई उम्मीद सँ रहल जे एहि क्षेत्रक लेल मंडलजी सनक सुखी-संपन्न लोक निःस्वार्थ भाव सँ काज करता आ तैं ओहि इलाकाक कायापलट भऽ जायत। लेकिन कार्यक्षेत्र मे इन्जिनियर मंडलजी राजनीति मे नव छलाह आ ई सोचनहियो नहि रहैथ जे अपन स्वदेशक सेवा मे एहि तरहक जीतक बाद एहनो कियो दुश्मन बनि जायत जे एना अपहरण कय लेत।

दोसर दिस जे नेतागिरी लाइन मे अपन भाग्यक आजमाइश करैत अछि ओकरा गतगर पूँजी लगाकय लोक सब केँ पौकेट मे राखय पडैत छैक। नित्य चौक-चौराहा आ सेहो क्षेत्रक सब गामक चौक-चौराहा पर घूमनाय, ओहि गामक १० गो लफुआ केँ चमचा-बेलचा बनाकय दारू आ थिएटर आदिक मजा लेनाय, ठेका-पट्टाक पूरा हिसाब केनाय, क्षेत्रक आर्थिक-व्यवसायिक गतिविधि सँ हफ्ता असूलनाय, नीक-नीक लोक सबकेँ हरकेनाय आ ओकरा सब सँ अपन स्वार्थपूर्ति लेल धन उगाही केनाय… एहि सब लेल हथियार, पैसा, दारू, आदिक भरपूर प्रयोग करैत दादागिरी जमेनाय – एक सँ बढिकय एक गिरोह बनेनाय, थाना केँ मुट्ठी मे रखनाय, मुखिया-मैनजन आ सब जातिक लोक केँ विभिन्न प्रलोभन दैत ऐगला ५ वर्ष वास्ते अपन सब योजना पहिने कहि देनाय जे हम जीतब तऽ तोरा सब केँ कि देबौक, आदि। यैह मोट मे वर्तमान नेता लोकनिक कार्यनीति होएत अछि। अवस्था यैह बनि गेल अछि जे केकर पौकेट मे कतेक माल, कतेक लोक, कतेक आवारागर्दी-गुन्डागर्दीक पावर, थाना-प्रशासन, पत्रकार, मुखिया-मैनजन आदि अछि। जेकरा पास जतेक बेसी तेकर जीत ततबे सुनिश्चित रहैत अछि।

आम जनता सब बात बुझितो एतेक हिम्मत नहि कय पबैत अछि जे ओहि नेताजी लोकनिक विरुद्ध कियो आवाज उठायत। हँ, यदि जिला मे आ कि थाना मे आ कि राज्य स्तर पर कोनो ईमानदार आ कड़ा हाकिम आबि गेल तऽ कनी दिन लेल लोक केँ सुख भेटैत छैक। मुदा नेताजी सबहक आँखिक कीड़ा ओ ईमानदार आ कड़ा हाकिम बेसी दिन धरि अपन व्यवस्था कतहु नहि चला सकैत अछि। सैकड़ा मे गोटेक हाकिम मे ई क्वालिटी होएत छैक, १०-२० बरख पर कोनो क्षेत्र केँ एहेन अधिकारी नसीब होएत छैक। ताहु मे जँ बेसी समय लेल ओकरा ओहि पद पर राखल जेतैक तऽ फेर सबटा सिस्टम सँ जंग-सफाई हेबाक अवसर बनि सकैत अछि, ताहि कारण ओकरा ओतबे दिन धरि राखल जाय जाहि सँ क्षेत्रक जनता केँ ललिपोप चूसबाक आनन्द भेटि जाउ। जनताक भावना मे मिश्रित प्रतिक्रिया होयब, फील गूड फैक्टर, सत्य-ईमानक नुनगर-मिठगर स्वाद कोनो-कोनो भोजन मे लगायब जरुरी बुझिकय एहेन ईमानदार आ कड़ा हाकिम सबहक पदस्थापना सामान्यतया वर्तमान सरकारक नीति मे होएत छैक। एम्हर मिडिया केँ सेहो खूब पम्पिंग कैल जाएत छैक जे ओहि हाकिम केर इर्द-गिर्द ततेक कैमरा लगा दहीन जे ओ कन्हा कुकूर माँरहि तिरपित, ओतबे मे फूचफूचायल रहय। पत्रकार सब केँ सेहो चान्दिये-चान्दी रहैत छैक। जे जतेक भ्रष्ट ओकर ओतबे बेसी पूछ। मंत्रीजी धरि हिस्सा पहुँचेबाक कला मे माहिर होयब वर्तमान अधिकारी – ब्युरोक्रेट्स केर क्षमताक परिचायक होएछ। आम जनता बिल्कुल निरीह आ महिखा मे कोंचल छागरक मूरी समान, कखनहु कसैया हाथक तरुआरि सँ जब्बह भऽ सकैत छैक।

मंडलजी बेचारा फँसि गेलाह। अपहरण केर समाचार सेट मिडिया द्वारा गन-गन-गन-गन करय लागल। आइजी-डीआइजी पूलिस प्रशासन चारूकात हुंइ-हुंइ-हुंइ हौरन बजबैत पगली सायरनवला गाड़ी सँ राजधानीक शहर मे हरकम्प मचाबय लागल। एतय छापा, ओतय छापा, मुदा जतय मंडलजी राखल गेला अछि ताहिठाम कोनो छापा नहि, ओ सब सँ बेसी सुरक्षित स्थान छैक। एम्हर दुपहरिया मे भोजनक समय पर आरो दु टा नकाबधारी अबैत अछि खानाक किछु पैकेट लय केँ…. मंडलजी केँ हाथ-पैर खोलि देल जाएत अछि। एखन धरि ओहो एकोमोडेट होएत ओहि अपहरणकारी सब केँ एना कष्ट मे नहि रखबाक लेल ईन्जिनियरिंग बुद्धि सँ रिझा चुकल छथि। आँखि सँ पट्टी सेहो हँटा देल गेल अछि। रूम कोनो गैरेजक तहखाना बुझा रहल छलन्हि। मोबाइल ओतय काज नहि करय ठीक सँ… लैन्डलाइन फोन केर टंच व्यवस्था रहैक। टेलिविजन सेहो लागल रहैक। मंडलजी केँ हुनकर अपहरण हेबाक समाचार आ शंका आदिक विवरण टेलिविजन पर देखाय दय रहल छन्हि। दिल्ली मे एतेक वर्षक नौकरी मे एतेक रास तकनीकी बात शायदे कहियो बुझि सकलाह, मुदा आइ अपने तेहेन फँसान मे फँसल छथि जे सब विधायकी घुसैर रहल छन्हि। मुख्यमंत्री पर्यन्त चिन्ता आ दुःख व्यक्त कय चुकला अछि। बेटा-पुतोहु सब दिल्ली एयरपोर्ट सँ पटना लेल विदाह भेल सेहो लाइव प्रसारण देखाय दय रहल छन्हि। मिडिया लेल दोसर कोनो बाते नहि छैक आइ समाचार मे…. अपराधी सबहक नामक सूची मे ओ नहि जे असली मे हुनका अपहरणकारी सब इशारा-इशारा मे कहलकैन अछि। ई सबटा पटकथा एकटा गंभीर साजिश समान हुनका बुझा रहलनि अछि।

टेलिविजन पर मस्त भऽ कय मंडलजी आ ओ सब नकाबधारी अपहरणकारी सब ओहि तहखाना मे सब समाचार देखि रहल अछि। ओहि मे कहल जा रहल अछि जे मंडलजीक नौकरी पेशाक समय किनको संग दुश्मनी भेल छल जे आइ हिनका अपहरण कय बेटा सब सँ फिरौतीक रकम सेहो मांग केलक अछि। एम्हर मुख्यमंत्री इमरजेन्सी कैबिनेट मिटींग आ पूलिस प्रशासनक उच्चस्तरीय अधिकारी सब सँ मिटींग बजौलनि अछि। मंडलजीक पूरा जीवन-कथा सब देखायल जा रहल अछि। किछु समाचार चैनेल तऽ बैकग्राउन्ड साउन्ड मे मातमी धून सेहो बजाबय लागल अछि। ई सुनि मंडलजी काफी घबरायल छथि। ताबत हुनका लंग फोन अबैत अछि, एकटा अपहरणकारी हुनका फोन दैत हाथ मे कहैत छन्हि जे अहीं सँ बात करता, बात करूः ओम्हर सँ घबरायल स्वर मे पापा-पापा करैत हुनकर बेटाक आवाज – एम्हर सँ पिता कि बाजैथ, बस भरभरायल स्वर मे कहैत छथि जे सब ठीक भऽ जेतैक, तों चिन्ता नहि करे। फेर अपहरणकारीक फोन मंडलजी लंग अबैत अछि। हुनका कहल जाएत छन्हि जे बेटा सँ समय पर फिरौतीक टाका पहुँचेबाक लेल जोर दियौक… कुल १०० करोड़ केर मांग कैल जाएछ। मंडलजी केँ होश उड़ि जाएत छन्हि। ओ घिघियाएत कहैत छथिन जे एतेक पाय तऽ हमर सबटा शेर-सम्पतियो बेचला सँ नहि जमा होयत, एना अत्याचार नहि करू। बरु हम रिजाइन दऽ देब, हमरा नहि चाही विधायकी। नहि बनब हम क्षेत्रक नेता। हम फेर दिल्लिये घूरि जायब। मुदा सोझाँ सँ निर्दयी हँसी हँसैत हुनका कहल जाएत छन्हि जे ई सब आब नहि होयत। पाय देबय पड़त नहि तऽ ऊपर जाय पड़त। मंडलजी बहुत विनती करैत छथि… मुदा ओम्हर सऽ कोनो असैर नहि होएत अछि।

आब लगभग ७ दिन बितय लेल जा रहल अछि। बाहर मीडिया मे नौटंकी चरम पर अछि। मुख्यमंत्री आ विपक्ष सब कियो मंडलजी विधायक लेल खूब चिन्ता व्यक्त कय रहला अछि। अधिकारीवर्ग सब छापामारी आ शंकाक आधार पर किछु अपराधीक नाम, सीसीटीवी कैमरा फूटेज केर आधारपर नकाबधारी अपहरण कएनिहारक फोटो स्केच आदि सब सेहो जारी करबाक काज कैल गेल सेहो कहि रहला अछि। फिरौतीक रकम पर चुप्पी अछि, आकलन-व्यकलन अन्दाजक भर पर चलि रहल अछि। परिवारक लोक डर सँ सब बात बाजि नहि रहल अछि। अन्त मे मंडलजी हारिकय अपहरण कएनिहार केँ ऊपरे पहुँचेबाक लेल आग्रह करैत छथि। ई नौटंकी खत्म करबाक लेल आब दोसर कोनो उपाय नहि। अपन बेटा सँ कानि-कानिकय ओ अपन इच्छा जाहिर करैत छथि। आ कि अचानक हुनका एकटा अपहरणकर्ता बुद्धि दैत छन्हि, कान मे फुसफुसाकय किछु कहैत छन्हि…. बेचारे पियर पड़ि गेल चेहरा पर अचानक नव जीवन केर आशा सँ एकटा खुशी आबि जाएत अछि। ओ एकदम मुस्कुराइत ‘हाँ, हाँ, किऐक नहि। हम तैयार छी।” कहिकय ओकर राखल प्रस्ताव केँ गछि लैत छथि। पाँचे मिनट मे टेलिविजन पर समाचार आबय लगैत छैक जे प्रशासन ने पायी सफलता, मंडलजी का पता चल गया है, अपहरणकर्ता मंडलजी को रिहा किया… फिरौती का रकम दिये वगैर जांबाज पूलिस अधिकारियों ने मंडलजी को मुक्त कराया अपराधियों-अपहरणकारियों के चंगूल से….. मंडलजीक आँखि सँ धाराप्रवाह अश्रुपात होमय लगैत छन्हि…. ओ अपन सत्य आ ईमान केँ सौदा कएलाक बाद कोन तरहें मुक्त नहियो भेलापर एना समाचार प्रसारित होएत देखि मोने-मोन छुब्ध छथि। मुदा कनीकाल मे हुनका फेर सँ पट्टी बान्हिकय बाहर लऽ जाएत एकटा वैन मे बैसाकय लऽ जाएत छन्हि आ एहि बेर ओ मारुति वैन मे नहि, बल्कि चमचमाएत विदेशी कार मे दुइ गोट बड़का पूलिस अधिकारीक संग पैछला सीट पर बैसल छथि ई बात पट्टी खोलिते स्पष्ट होएत छन्हि आ सीधे विधानसभा भवनक बाहर प्रेस कान्फ्रेन्स अछि जतय हुनका सत्ताधारी दलक खूब प्रशंसा करबाक छन्हि आ पूलिस अधिकारी सबहक खूब धन्यवाद करबाक छन्हि ई कहैत सब कियो हाहा-ठीठी करैत ओतय पहुँचैत छथि। मंडलजी विधायक सेहो आब सत्ताधारी दलक नेताक पौकेट केर लोक बनिकय अपन कार्यकाल बितेबाक लेल मौन सौदामे अपना केँ लिप्त पबैत छथि। जान बचय तऽ लाख उपाय, मानवता यैह थीक, युग एहने अछि। एहेन-एहेन कतेक रास बात हुनकर मन मे दौड़ि रहलैन अछि, मुदा बाहर ओ ओतबे बजता जतेक हुनका कहल गेल छन्हि।

हरिः हरः!!

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