शिक्षाक माध्यम आ ओकर प्रभाव

विश्व भरि मे प्रसिद्ध छैक जे कोनो भाषाक कथनीकेँ अपना मातृभाषामे अनुवाद करू आ सबसँ नीक जेकाँ ओहि कथनक सारकेँ बुझू। प्राचिन समयसँ लैत वर्तमान आधुनिक शिक्षा प्रणालीमे लोकभाषाक महत्त्व सर्वोपरि छैक। शिक्षककेँ प्रशिक्षणकालसँ लैत निर्देश-पत्रिका मार्फत सेहो यैह सिखायल जाइत छैक जे गूढ सँ गूढ ज्ञानकेँ छात्रक मातृभाषा (स्थानीय भाषा) मे सिखाउ, ताहिसँ समझ-शक्ति व्यापक बनत। शिक्षाक आवश्यकता बाल्यकालसँ जीवनक अन्तिम समय तक होइत छैक। भाषाक ज्ञान बढैत उम्र संग अभ्यास केलासँ होइत रहैत छैक। लेकिन मातृभाषा स्वत: प्रवेश करऽवाला भाषा होइत छैक जे मायकेर कोरामे पोसाइत अबोध बच्चाक उम्रमे मानव-मस्तिष्ककेँ प्रेरित करैत छैक। यैह कारण छैक जे आधार भाषा सदिखन लोकक मातृभाषा मात्र होइत छैक। संभव छैक जे कोनो निश्चित मातृभाषी माता-पिता अपन बच्चाकेँ शुरुए सँ एक नव भाषामे वार्तालाप करैक आ एहि तरहें ओहि बच्चाक मातृभाषामे परिवर्तन आनैक। लेकिन सत्य यैह छैक जे माता ओ पिताक मातृभाषा अनुरूप व्यवहार प्राकृतिक रूपमे न्यायसंगत आ ग्रहण योग्य समुचित हेतैक, तदापि नव भाषामे बच्चाकेँ अभ्यस्त बनेनाय सेहो प्रभावकारी होइत छैक। बच्चाक भविष्य ओहि नव-भाषाक आधार पर आगू बढबाक संभावना जरुर बनि जाइत छैक।

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