सागर झा विदुषकः एकांकी नाटक (सन्दर्भः मिथिला आन्दोलन)

रोचक वार्ताः मिथिलाक सरोकार

(साभारः फेसबुक पर चर्चा मुताबिक ई यथार्थ वार्ता)

sagar jha vidhushakमैथिली एवं हिन्दी फिल्म केर संग-संग रंगकर्म एवं लेखन मे सेहो माहिर सागर झा – फूलपरास (मधुबनी) केर मूल निवासी आ दिल्ली मे कार्यरत बेसीकाल ‘मैथिली-मिथिला’ आन्दोलन पर सवाल ठाढ करैत रहैत छथि। हुनकर भावना मे यथार्थ सेवा करब बेसी नीक होएत छैक, मात्र मैथिली-मिथिलाक नाम पर हंगामा ठाढ कय निजी स्वार्थ पूरा करब यानि नेता बनबाक कार्य करब बेसी होएत छैक जेकर ओ प्रखर आलोचक छथि। भेटल परिचिति मुताबिक आइ कतेको वर्ष सँ ओ निरंतर किछु न किछु अभियान चलबैत छथि। दिल्लीक जंतर-मंतर पर कैल जायवला मिथिला राज्यक मांग हेतु धरना मे सेहो यदा-कदा सहभागी बनैत छथि। आब समर्थन मे वा ओतय नेता सबहक मुंह-कान आ बोल-वचन देखबा-सुनबा लेल से हुनक आत्मा टा जनैत छन्हि। लेकिन हुनका द्वारा चलायल जा रहल अभियान सबहक नाक-नक्स देखि ई सुनिश्चित अछि जे ओ मिथिला आन्दोलनक एकटा ख्याति-प्राप्त विदुषक छथि। एकटा सफल रंगकर्मी अभिनेता सेहो रहल सागर झा केँ रंगमंच पर सेहो अधिकांशतः विदुषक केर भूमिका भेटैत छन्हि आर ओ मिथिला आन्दोलनक एकटा प्रख्यात विदुषक केर भूमिका सेहो बहुत मार्मिक आ सारगर्वित रूप मे निर्वाह कय रहला अछि। आउ, हुनकहि एकटा नव विदुषक-प्रकरण केँ एतय वार्ता रूप मे जहिनाक तहिना रखैत छीः

फेसबुक केर ‘हम सब मैथिल छी’ ग्रुप पर, लगभग ५० हजार दर्शक, जाहि मे करीब २००० सदैव जागल आ नाटक देखि रहल छथि, बाकी ४८ हजार सूतल रहैत छथि, बेरा-बेरी सुतबाक-उठबाक काज चलैत रहैत छैक आ एकटा बाबन बीघाक मैदान मे सैकड़ों मंच पर अलग-अलग मिथिला आन्दोलनक अभिनेता-विदुषक सब संग कतेको रास जोकर सब सेहो अपन अलग-अलग रूप देखबैत रहैत छथि। ताहि बीच एकटा मंच पर सागर झा भूमिका अदा करबाक लेल प्रस्तुत छथिः

सागर झाः किछ दिन से खली मिथिला आ मैथिली के नाम पर खाली आंदोलने भय रहल छै ! सुनबाक में आयल जे किछ आर आंदोलन भय रहल ऐछ किछ आर बचेबाक लेल ! सोचलौं जे हमहुँ किछ बचेबाक लेल आंदोलन शुरू करी ! मुद्दे नै भेट रहल ये जे कथी बचाबि मिथिला के ? हमरा नेता बनबाक प्रबल इक्षा जागृत भय गेल ऐछ ! आहाँ सब अप्पन राय दिए जे हम कोन चीज़ के लेल आंदोलन करी ! एक मित्र कहलाह जे “मैथिल बचाओ आंदोलन” करी हम ! की विचार ?

सागर झा केर एहि प्रस्ताव पड़िते सैकड़ों आदमी थोपड़ी बजबैत हुनकर अदाकारी व्यंग्य पर ठठाकय हँसय लगैत अछि। तखनहि एहि बाबन-बीघा मैदानक एक मंच केर अभिनेता जे सदैव मिथिलाक दृश्यक वर्णन आर अपन सूझ-बूझ भरल आचार-विचार सँ लोक केँ अपन मूल संस्कृति सँ जुड़ल रहबाक – अपन मातृभाषा सँ स्नेह रखबाक प्रेरणा दैत रहैत छथि, ओ बाजि उठैत छथिः

ब्रजेश झाः जे काम करैत छी, से मोन सँ करैत रहू…. ओहि में अहूँ बचब आ मिथिला सेहो….। ढेर आंदोलन सँ आंदोलनक प्रासंगिकता आ महत्व समाप्त भs जायतैछ। ओहिना मिथिला क्रांतिकारी नेता (?) आ आंदोलनकारी सँ भरल-पूरल अछि। ताहि लेल हुनका सभक रोजी-रोजगार पर लात जुनि मारु। अपन कर्तव्य आ रोजगार में लागल रहू। हाँ, जँ बैसारी में खुराफात सूझि रहल अछि तँ जे मोन…. से करु! कियो रोकनिहार नै…? एहि लेल सर्वे करयबाक कोनो परिहार्यता नै….!

(ब्रजेश झा केर एहि सुन्दर सूझ-बूझ भरल अभिव्यक्ति सँ उत्साहित विदुषक हुनका विहुँसैत जयकारा लगाकय स्वागत करैत छथि।)

मनीष झाः किछु त करैए परत भैया !
 
मैथिल मंचः “पाग बचाऊ आंदोलन” भ गेल
“जनेऊ बचाओ आंदोलन” सेहो भेल
“मुरेट्ठा बचाओ” सेहो भेल…
चीनी बचाओ आंदोलन” भ रहल यै
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सागर भाई आब आहां “बिष्ठी बचाओ आंदोलन” प्रारंभ करू आ हम “बिष्ठा बचाओ आंदोलन”
 
मनीष झाः आ ” कुचिष्टा बचाऊ ” सेहो होमक चाही कि ने । कियाक त’ मैथिलक जन्मसिद्ध अधिकार थिकै ई ।
 
सागर झाः (अपन बातक समर्थन मे सहयोगी अभिनेता लोकनिक बात सुनि आरो मखरैत) मुख्यमंत्री बैन जेबै ने हम ?
 
(साईंचरण फिल्म्स केर मालिक आ हाफ-मर्डर फिल्म केर निर्देशक जे सागर झा केँ कतेको फिल्म मे साइन करैत काजो देने छथि, आर सूपर – ६, बेरोजगारी मुक्त मिथिला एवं भिन्न-भिन्न अभियान मे सदैव सहयोगीक भूमिका निर्वाह करैत आबि रहला अछि… हुनक प्रवेश)
 
रमानाथ झाः जय हो सागर अहाँ तऽ गप्प पर चढ़ि कऽ दोईम देलिए। ऐना काज नै चलत नै तऽ हम “आन्दोलन बचाओ” के आंदोलन करब।
 
मनीष झाः (खुलिकय ठहाका लगबैत….) हाहाहा। भैया आहाँ रोईम दियौ ।
 
मंच पर सब कियो हहा-हहाकय हँसि रहल अछि, हाथ आ गला मिला-मिलाकय बूट्टी-बूट्टी चमका रहल अछि, आनन्द-आनन्द भेल छैक, राइत सेहो चढल जा रहल छैक आ रंग सेहो ओही रफ्तार मे चढल जा रहल छैक…. हालहि विदेशीक माथ पर पाग लगाकय फोटो खींचा फेसबुक पर लाइक्स-कमेन्टक होड़ सेहो विदुषक सागर झा अपन एक अभिनेता मित्रक कएने छलाह…. बेरहि पर मंचपर हुनक प्रवेश आ डायलागः
 
कार्तिकेय मैथिलः “मनुख बनू” आंदोलन करू भाई..एकर सख़्त ज़रूरत आइन परल आइ काइल..।
 
सागर झाः (बेर-बेर अपन कौलर केँ चमकाबैत-फरकाबैत, आँखि-भौं तनकाबैत…) मुख्यमंत्री बनबाक सम्भावना बुझा रहल ये ने हमरा में आहाँ सबके ?
 
मनीष झाः (एकदम सटले विदुषक केर पीठपर हाथक थाप दैत…) एहु मे पुछै बला बात छै भैया ?
 
कार्तिकेय मैथिलः (सागर झा केर प्रश्न पर विहुँसिकय पंडित जगन्नाथ जेकाँ चुपे-चुप बजयवला मैथिल केर आदति सँ इतर बाजियेकय कहैत छथि) अहाँ डाइरेक्टे प्रधानमंत्री बनब भाई.. मुख्यमंत्री की चीज़!
 
रमानाथ झाः (कार्तिकेय जी संग सहमति मे माथ डोलबैत) बिल्कुल संभावना अछि।
 
आनन्द झाः (सागर झा संग पूर्वहि मे गारा-गारी आ मारा-मारी अभियानक अभिनेता-निर्देशक आ फूसियाहा उपनाम सँ प्रसिद्ध प्रवेश करिते शरीर नचबैत, हाथ फरकबैत कहि उठैत छथि) – बड भेल आब जे, जे बचबै क लेल आन्दोलन करब हम तकरे बचायब। जय जय मिथिला।
 
(सब सँ बड़का हिरो तऽ हमहीं छी…. तेहेन भाव सँ भरल मुदा आइ धरि एकटा खड्हो घुसकायल पार नहि लागल… तेहने शिखंडी अभिनेता अपन खास अन्दाज मे बाजि उठला, सब सँ बड़का वीर हमहीं! ततबा मे अभिनेत्री केर प्रवेश होएत अछि)
 
सपना झाः मानव धर्म एवं मानव भाव बचाऊ। (ओ एतेक कहैत जाबत ई विदुषक लोकनि केर झपट्टाक शिकार होएतथि, तुरन्त परी समान उडैत निकैल गेली, एम्हर मंच तबाह अछि… सब कियो हाथ-पैर-मुंह चमका-चमकाकय मैथिली-मिथिलाक धज्जी उड़ौने छथि… हाहाहीही भऽ रहल अछि… ई ताण्डव देखि लेखक केँ वर्दाश्त सँ बेसी होएत अछि…. आखिर एतेक रास आन्दोलनक जैड मे मेहनति लागल अछि आर एना आन्दोलनक धज्जी उड़ैत देखि प्रवीण नारायण चौधरी केँ दुःख, विस्मय आ हास्य केर मिश्रण चपेट मे लैत अछि….)
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (सागर सँ कड़ा रूप मे प्रस्तुत होएत) सागर झा! ओना तऽ अहाँ एक कलाकार छी, मुदा जाहि तरहें मैथिली-मिथिला केर नाम केँ मजाक केर पर्याय मे प्रयोग कय रहल छी ताहि लेल अपना आपा केँ बचाउ, वैह अहाँ लेल शुभ होयत। एक हितैषीक रूप मे हमर सल्लाह केँ लेब।
 
(एना अपन विदुषक हिरो केँ लताड़ पड़ैत देखि साइड हिरो मनीष झा बचाव मे आगू अबैत छथि…)
 
मनीष झाः कने आर प्रकाश दियौ भैया ठीक सँ नहि बूझि सकलऊँ । सविनय निवेदन!
 
प्रवीण नारायण चौधरीः बेसी प्रकाश केर आवश्यकता अन्हरिया केँ होएत छैक, एतय तऽ सूरज केर प्रकाश छैक मनीष!
 
मनीष झाः अवश्य छैक भैया मुदा “मज़ाक” शब्द किछु तेहने सन् लागल । हमहूँ सब माए मिथिले के संतान छि आ माएक आ माएक भाषा केर मज़ाक एतए नै अपितु किछु एहेन आंदोलनकारी व्यक्ति वा संस्था पर सीधा निशाना छैक जे अपन पेटक जोगाड़ में मिथिला बेचि रहल छथि । जरूरी नहि छैक कि सब तेहने होए मुदा किछु महानुभाव अवश्य छथि । आ ई टीका हुनके लेल बुझना गेल । कियो नाम लेल त कियो नाम संगे अर्थ लेल । अन्यथा नहि लेब । चुप नहि रहि सकलऊँ कियाक त’ प्रत्यक्षदर्शी छि हम एहेन तरहक काज करए बला सभक ।
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (मनीष झा केँ एना किछु सही, किछु गलत केर द्वंद्व सँ बाहर अयबाक सहज उपाय कर्म सिद्धान्त केर उपदेश दैत) किछु कहियो सार्थक काजो करू, फेर परिदृश्य मे परिवर्तन भेटत। के कि केलक ताहि सँ ऊपर जे हम कि केलउँ। आ हम अन्यथा कियैक लेब? हमर यैह काज बाँचि गेल अछि कि? हम तऽ जेकरा अपन बुझैत छी ओकरा सचेत करैत छी जे ‘मैथिली’ आ ‘मिथिला’ केर नाम पर बेकार आ ब्यर्थ बात करय सँ सदैव बचू!
 
सागर झाः प्रवीण भाई जी प्रणाम ! आहाँ में एकटा ख़राब आ एकटा नीक गप ऐछ ! नीक गप ई ऐछ जे आहाँ मिथिला मैथिलि के बहुत नीक हितैषी छी आ सदैब समर्पित रहैत छी आ ख़राब गप ई जे बुइझतो जे फलां बाबू ऐहि आंदोलन के नाम पर अपन नेतागीरी चमका रहल ऐछ , ओकरा समर्थन में कूइद जायत छी ! हमर पोस्ट में कोण ख़राब गप लिखल ऐछ भाई जी ? मिथिला के धरोहर के बचा के कोण फायदा जखन “मैथिल जने” नै बचताह ? पाहिले मैथिल के बचाऊ ने , बाद में पाग आ जनेऊ बचायब ! की गलत ऐछ से कहु ?
 
प्रवीण नारायण चौधरीः सागर जी, ओहि व्यक्ति केर व्यक्तिगत आलोचना करू। जातिबोधक आ समुदायबोधक संज्ञा जेना सब बात मे मैथिली आ मिथिला केँ जोड़िकय हल्लूक बात करब से अहाँ केँ सूट नहि करैत अछि। अहाँ एक कलाकार वर्गक संघर्षशील लोक रहितो कोनो आन्दोलन केर कुचिष्टा करी ई कतहु स दोसर के नहि अहीं केँ कमजोर आ संक्रमित करैत अछि। पाग बचत, धरोहर बचत आ मैथिली सेहो बचत। अगबे दोसर मे दोष निकालनिहार लेकिन स्टैन्डलेस आ चेन्ज करिते रहि जाएछ। जेना कि भेल अहाँक स्वयं संचालित बेरोजगारी मुक्त मिथिला केर हाल?
 
सागर झाः (बात केँ गंभीरता सँ लैत) – 312 टा घर में चूल्हा जैल रहल ऐछ भाई जी ! दोसर गप जे ओ कोनो संस्था के अधीन नै छल आ किनको नेता नै बनबाक छल ! एखनो चैल रहल ऐछ ! हाँ किछ व्यस्तता के कारण गती किछ कम अवश्य भेल भाई जी मुदा रुकल नै ऐछ ! हम ओहि मैथिल के समर्थक छी जे “चिराग” के कैंसर सनक बीमारी में लड़ाई लड़ै में हुनक पिता जी के संग एलाह या अशिक्षा मुक्त मिथिला मुहीम में राकेश GS गुरु जी के संग ! ओ सब कियो भावना वश ऑयल छलाह , अप्पन नेतागीरी चमकाबै लेल नै ! पाहिले मैथिल के बचाऊ भाई जी , नै ते पाग आ जनेऊ पहिरै वाला कियो नै बचताह । अहाँके कहला से मात्र हम ओ कानपुर वाला मथिली महोत्सव के बुराई केनाय बंद नै करब, जेतै मिथिला के मंच पर आज़म ख़ान जी के चमचागिरी में मुशायरा कायल गेल ! हमर मिथिला के कवी आ गायक सब नीचाँ में टुकटुक तकैत रैह गेलाह आ 80% कार्यक्रम में सब कियो आज़म ख़ान के गुणगान में समय बर्बाद कय देलाह ! एहन एहन नेता रूपी मिथिला के आन्दोलनी के सार्वजनिक मंच से तिराष्कार हेबाक चाही मुदा ओ अपनेक मित्र छैथ आ आहाँ हुनका सबके विरोध में किछ नै बाजब ! ई उचित बुझा रहल ये आहाँ के भाई जी ?
 
प्रवीण नारायण चौधरीः ओहि ३१२ केँ ३ करोड़ बनाउ। सिलसिला चलय दियौक। किछु तथ्यांक जारी करू। आरो लोक लाभ प्राप्त करबाक लेल आगाँ आबैथ से सब प्रचार करू। – यथार्थतः अहाँ व अहाँक समूह या तऽ किछु कइये नहि सकल ताहि हेतु ओहि सरोकारक विन्दु पर चुप छी ई स्पष्ट अछि। आ यैह कारण छैक जे खाली दिमाग शैतान का…. दोसराक काजक समीक्षा बिना कोनो योगदान देने करब शुरु केने छी पब्लिक प्लेटफार्म पर आ ताहि मे दुरुपयोग कय रहल छी ‘सामान्य समूहबोधक शब्द मैथिली-मिथिला’ केर….! ई अक्षम्य अपराधक वर्ग मे पड़ैत अछि। अहाँ जँ मैथिली आ मिथिलाक यथार्थ शब्दार्थ सँ अपरिचित छी तखन मूर्खता करैत रहू! कानपुर या कोलकाता या कोनो एक निश्चित संस्थाक काज जाहि मे अहाँ सेहो पार्टी (सम्बन्धित पक्ष – सरोकारवाला) रहल होए तऽ जरुर खिद्दांश कय सकैत छी। ओना अहाँ कतय सँ बुझय गेलहुँ जे आजम खान केँ मंच देबाक मानसिकता मे मैथिल समाजक केहेन कल्याणक भावना छुपल रहैक! एखन अहाँ केँ आरो घूमय-फिरय पड़त आ समाज सँ बुझय पड़त। हमरा बुझने अहाँ केवल विदुषक मैथिल केर भूमिका टा निर्वाह कय सकैत छी जे बिन बात बुझने-सुझने दोसर केँ नेता बनैत देखि डाह टा कय सकैत छी। (मजाकक अन्दाज मे) हमर बात कनेक सहजता सँ झेलब! तेसर, पाग, जनेऊ, गमछा, जंघिया, पैताबा, धोती – ई सब अपन-अपन विचार छैक। जेकरा जे हेतैक ओ सब बचाओत। मिथिला-मैथिलीक चमकैत ब्रान्डक असर थिकैक ई सब आन्दोलन। एहि सँ अहाँ जरू, किंवा मरू…. मुदा ई आन्दोलन सब अहिना बढैत रहत। एकर पाछाँ एहेन सूत्र केर प्रयोग छैक जे आब ई सब रुकत नहि। अहाँ सँ निवेदन जे बेरोजगार मुक्त मिथिला – अशिक्षा मुक्त मिथिला आर जय्ह नीक बुझाइ तही मे नीक योगदान आ सार्थक कार्य करैत रहू। दोसराक कूचर्चा सँ मैथिली-मिथिला केर बदनामी देब बन्द करू! हरिः हरः!! (भगवानक नाम लैत बात केँ समेटबाक मूड मे)
 
(एम्हर बात सिरियस होएत देखि पुनः विदुषक केर मुंहदुसाइक ओकालति कएनिहार साइड हिरो सबहक प्रवेश निरंतरता मे, राति बेसी भेल, तैयो विदुषक केर भूमिका सँ मजा लेनिहारक कमी नहि…)
 
प्रह्लाद राजः आहा में पीएम बनबाक संभावना दिख रहल अछी। लागल रहु भगवती रक्षा करैथ।
 
अखिलेश कुमार झाः बुझाइयऽ सागर जी व्यंग्य करैक आदी छथि…. (सागर झा सँ एक अपरिचित दर्शक अपन मनोभाव एना राखि रहला अछि…) हमरा विचार सऽ छोट प्रयास जे कियो महानुभाव मिथिलाक उन्नति लेल कय रहल छथि ओकर संगठित रूप सँ प्रशंसा होयबाक चाही।
 
मैथिल मंचः (मंच आ दर्शक बीच उलझन देखैत बात केँ फरिछेबाक लेल फाँर्ह बान्हिकय पुनः मंच सँ चिकरैत छथि) – कनिक विस्तार मे कहय छी सागर जी के मोनक मर्म…..आई ई मोन लगभग हर मैथिल के अछि….
 
1. पाग बचाओ आंदोलन :- ई पागक नाम, शुद्धता आ संरचना के साथे मजाक कय क पागक नाम पर टोपी बेचय आ अपन Business चमकाबय के Publicity Stunt मात्र अछि…ई हमर निजी नहि अपितु समाज के बुजुर्ग वर्ग के कथन छनि।
 
2. “जनेऊ बचाओ आंदोलन” :- किछु लोक मजाक मे एकरा प्रारंभ कयलनि।
 
3. मुरेट्ठा बचाओ आंदोलन:- ई पाग के समानान्तर विचारधारा पर बनल अछि आ बाकी सब आंदोलन सँ शुद्ध आ प्रशंशनीय ।
 
4. चीनी बचाओ आंदोलन :- एहि आंदोलन आ आंदोलनकर्ता सबके बारे में त एहिठाम हमरा सँ बेसी आहां सब जानय छी।
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तैं मिथिला आ मैथिलीक नाम पर झोलाछाप आ टोपी पहिराबयवला सबके समर्थन कय समाज के एकटा आर चन्दाचोर हमसब नहि बनाबय चाहय छी तैं अपन विचार अपन तरीका सँ राखि रहल छी।
 
कार्तिकेय मैथिलः (हालहि विदेशक भ्रमण पर अंग्रेजी प्रयोग करबाक आदति सँ…. मैथिल मंच केर चिकरबाक जोरदार समर्थन एना करैत छथि) – More than perfect statement..I liked this!
 
(मंचपर पुनः नव विदुषक अभिनेताक प्रवेश)
 
आशुतोष सागरः जय हो!
 
सागर झाः (पुनः मंच अपन पक्ष मे देखि बरबराइत पूर्वहि मे देल डायलाग रिपीट करैत प्रवीण नारायण चौधरी केँ फेर पोक करैत छथि….) प्रवीण भाई जी प्रणाम ! आहाँ में एकटा ख़राब आ एकटा नीक गप ऐछ ! नीक गप ई ऐछ जे आहाँ मिथिला मैथिलि के बहुत नीक हितैषी छी आ सदैब समर्पित रहैत छी आ ख़राब गप ई जे बुइझतो जे फलां बाबू ऐहि आंदोलन के नाम पर अपन नेतागीरी चमका रहल ऐछ , ओकरा समर्थन में कूइद जायत छी ! हमर पोस्ट में कोण ख़राब गप लिखल ऐछ भाई जी ? मिथिला के धरोहर के बचा के कोण फायदा जखन “मैथिल जने” नै बचताह ? पाहिले मैथिल के बचाऊ ने , बाद में पाग आ जनेऊ बचायब ! की गलत ऐछ से कहु ?
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (स्थिति केँ भाँपैत आ हास्य-प्रहसनक मूड देखि…) – मिथिला लेल कम सँ १ लाख नेता चाही। जँ संभव हो तऽ अहाँ मात्र १०० केर सूची बनाकय देल जाउ।
 
कार्तिकेय मैथिलः (प्रवीण नारायण चौधरीक ओहि गीत ‘रहय छय रहय छय कि हिन्दी बजय छय, पी जँ लय छय तऽ ईंग्लिश बजय छय’ केर तर्ज पर पुनः अपन डायलाग बाजि विदुषक केर हौसला बढेबाक लेल तत्पर भूमिका कय रहल छथि) – रोज़-रोज़ गिर कर भी….. मुकम्मल खड़ा हूँ…..! ऐ मुश्किलों देखो….. मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ….!!
 
सागर झाः (पुनः झूंझलाहट सँ भरैत… मुदा अपन पक्ष केँ एकटा ठोस स्वरूप देबाक नीक चेष्टा करैत) नै प्रवीण भाई जी ! मिथिला के लेल मात्र एक टा नेता चाही ! जाकरा पाछु पूरा मिथिला ठाढ़ रहय ! एतय ते कार्यकर्त्ता से बेसी नेता सब छैथ ! अपना मिथिला में एकटा कहाबत छै जे “ज्यादा मुसहर में मुस भाइग जायत छै “
 
प्रवीण नारायण चौधरीः नहि भाइजी, हँ भाइजी…. ई नहि आ हँ सऽ कि भेटल आ कि भेटत? एखनहि अहाँ एतेक रास नेता देखि रहल छलहुँ? हमरा १० टा के नाम बताउ। जे माय केर लाल मे तागत हो आ कानपुर जेकाँ दमखम हो! विदुषक केर कार्य सँ ऊपर उठू! हम भैर साल अभियान चलेने रही आ गछने रही जे २०१३ मे एक हजार नेता बनायब। मुदा अन्तो-अन्त धरि बामोस्किल २५ टा बनल। (कनेक मजाकहि केर दृष्टि सँ) २०१४ मे फेर लगातार काज भेल, तऽ आरो १४ गो बनल। २०१५ मे फेर २९ टा बनल। आब २०१६ मे देखी जे कतेक पहुँचैत अछि। कुल १ लाख नेता चाही जे पामर वला बेटा बनय, नेता बनय, मैथिली-मिथिला लेल काज करय!!
 
সুদর্শন কুমার – कईल पता चलल हन जे 1500 के आसपास संस्था य। जे मिथिला अ मैथिलि के नाम पर रजिस्टर्ड य।
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (साइड हिरो केँ लपेटबाक जरुरत बुझि) आ से पता चलिते अहाँक प्रतिक्रिया मे डाह उत्पन्न भेल, विस्मय भेल, आ कि गर्व भेल? कि भेल?
 
সুদর্শন কুমার – और ओइ नाम पर पेट पोसैऐ य
 
प्रवीण नारायण चौधरीः पेटक धारिता कतेक टा के? धोधिवला आ कि पेट-सुटका? (मजाक हँसी हँसैत….)
 
সুদর্শন কুমার – दुनु
 
प्रवीण नारायण चौधरीः पेटपोसा केर खिड़की सँ झाँकल अपने आ कि केबाड़ सँ? (मजाकक निरंतरता मे…)
 
সুদর্শন কুমার – हर जगह स
 
कार्तिकेय मैथिलः (प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा विदुषक केर मुंहदुसाई कार्य मे दखलंदाजी सँ खौंझाएत…. मुदा गंभीरता सँ हृदयक बात बजैत) – प्रणाम प्रवीण सर जी, हम अपने बारे मे बेसी तऽ नहि जानइ छी पर अपनेक कमेन्ट कुछ पोस्ट्स सब पर देखैत रहय छी… (हालहि मनोज पांडे प्रकरण मे सेहो विदुषक झिल्होरि खेलेबा मे कार्तिकेय मैथिल केँ देखला सँ प्रवीण नारायण हिनका पर सेहो प्रहार कएने छलाह… ताहि सँ आहत कार्तिकेय अपन मनक कसैक एतय राखि रहला अछि…) अहाँ नीक मैथिली लिखय छी मुदा अपनेक शब्दक भाव बहुत निगेटिव रूप सँ सामने अबैत अछि। दोसर अपन बात राखय के अधिकार लोकतंत्र मे सब केँ छैक पर केना राखि से कला केर सेहो आवश्यकता अहि…. अपनेक लेखनी एहि पर शब्दक उपयोग मे जरुरत अननाय जरुरी…. नीक लेखनी सँ सबहक मित्र बनि सब दोस्त केर दिल मे प्रवेश करू…. प्यार बाँटू आर प्यार पाउ…. जय मिथिला!!
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (पूर्व साइड हिरोक रजिस्टर्ड संस्था पर क्लास लगबैत…) अच्छा – आर बात छोड़ू! अहाँ १५०० मे सँ मात्र १५ गो के नाम लिखकय देल जाउ। ओकर सम्पर्क नंबर बताउ। पेट पोसैत अछि आ कि नहि से कनी हमहुँ वेरिफाइ करी!! आर, अहाँक अपन पता बताउ। कोना भेंट देब से कहू!
 

সুদর্শন কুমার – हम जयपुर में रहे छी। 8 के दिल्ली आयब। ओकर बाद आहाँ के सब नाम और जते के मोबाइल नंबर हमरा लंग य ओकर नंबर हम आहाँ के स्पीड पोस्ट क देब।

प्रवीण नारायण चौधरीः स्पीड पोस्ट मे कथी लेल खर्चा करब – चौपट बुद्धि सँ मिथिला लेल काज करब हमर सोझाँ? बस एतहि लिखू! आ नहि भेटय १५ गो तऽ १५ बेर कान पकैड़कय उठि-बैस लेब! (चौल करैत…) जयपुर मे सेहो छैक मैथिली-मिथिला! पता अछि? जयपुर केर योगदान मैथिली पत्रकारिताक इतिहास मे सेहो दर्ज छैक। ओतय पाण्डित्य प्रसार मिथिलाक योगदान सँ सेहो भेल छैक। आमेर केर किला पर जखन चढय जाएब तऽ बीच मे ओ परिवारक विशाल मकान छैक। दर्शन कय लेब। आ भेंट कय सकब तऽ कनेक समय देबैक। बुझबैक! मजदूरी टा करयवला दिमाग सँ ऊपर उठबैक तखन मिथिलाक यथार्थ दर्शन करबाक क्षमता भेटत। चोन्हरी छूटत!!
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (कार्तिकेय सँ) – हमरा मित्र नहि बनबाक अछि कार्तिकेय जी! आर, अपन मिथिला लेल केना लिखबाक अछि, बस ओतबे सँ सरोकार। चोपहा आ विदुषक सब केँ गाँड़ि मे बाँस कय सकैत अछि हमर लेखनी!! (चौलपूर्ण अन्दाज मे)
 
कार्तिकेय मैथिलः अपनेक स्वतंत्र छी…. जेना मर्जी लिखू आ जेना मर्जी रहू…..
 
प्रवीण नारायण चौधरीः (कार्तिकेय सँ) – प्यार बाँटू, प्यार पाओ – अहू चरण सँ आब प्रवीणमा ऊपर गेल!! आब अछि जे कोढिया सब केँ ह-ह कय केँ खेहारू! व्यक्तिगत विकास मे संलिप्त लोक, हाथ मे मोबाइल आ नेट फेसिलिटी राखि ‘मिथिला-मैथिली’ सरोकार पर बाजत…. बिना योगदान देनहिये? सागर झा – २०१२ सँ लगातार सम्पर्क मे छी हम सब। बहुत बेर जन्तर-मन्तर केर धरना पर सेहो भेंट अछि। नाटक मंडलीक निर्माण आ दिल्ली – गाम सब तैर लोक केँ जगेबाक किछेक अभियान….. फेर आपसी गारा-गारी आ मारा-मारीक शिकार… फेर बेरोजगार मुक्त मिथिला…. फेर सूपर – ६ आ फेर सनिमा आ फेर कि – फेर कि…. सब किछु मे ‘मैथिली-मिथिला’ जुटल अछि। समस्या होएत छैक। परञ्च डेग बढैत रहैत छैक। कम सँ कम सोच मे तऽ छैक। आब हम हिनकर एहि छीटपंथ केर दोख ‘मैथिली-मिथिला’ केँ देमय लागी – ई बेकार आ ब्यर्थ बात! सावधान! अपन कर्म करू! बस!
 
सागर झाः (पुनः होश मे अबैत… बरबराइत….) प्रवीण भाई जी तखन आहाँ मिथिला के लेल अपराधी भेलौं जे 68 टा नेता के ठाढ़ केलौं झूट फुइस के आंदोलन के लेल ! मिथिला के विकास तय नै भेल मुदा हुनका सबके किछ विकाश अवश्य भेल ! अहूँ के कोनो फायदा नै भेल होयत से पूर्ण विश्वाश ऐछ ! हाँ किछ गैर अवश्य सुनने होयब हुनका सबके मुंह से ! आहाँ जिनका नीक बुझैत छी , ई आवश्यक नै जे हम ओकरा नीक बुझी ! ओ सब छोड़ू आ ई कहु जे ” हमरा में मिथिला के पहिल मुख्यमंत्री बनबाक के संभावना नै बुझा रहल ये आहाँ के ?” ।
 
प्रवीण नारायण चौधरीः हम अपराधिये सही, मुदा १ लाख नेता चाही! अहाँ मुख्यमंत्री तऽ छीहे! तखन न हम सब अहाँक नेतृत्व मे ई ब्यर्थ चर्चा कय रहल छी। (सागर केर होश केँ बरकरार रखबाक आवश्यकता बूझि चौलक संग सत्य कहैत….) हरिः हरः!!
 
सागर झाः (जेना प्यासा केँ पानि भेट गेल हो…) जय हो जय हो !
 
मैथिल मंचः प्रवीण जी, 1 लाख नेता नहि अपितु 1 लाख कार्यकर्ता चाही । ओहि में स एकटा नेता अपनेआप चुना जेता । आँहां सबके नेता बनाओल आ सब के मुंह सँ आहांके लेल गलत सुनि हमरासब सन अनजान लोक सेहो आहांक बारे में गलत विचार भेल । बहुत उंच नीच आ विवाद सेहो…. एहि सबके कारण यैह जे सब आहां स पैघ नेता बनय लेल आहां के खुला मंच सँ बदनाम करय लगला……. मुदा एक टा बात देखने होयब आहां जे कार्यकर्ता कियो नहि विरोध कयने होयत आहांक….ओहि कार्यकर्ता सबमें किछु आहांक बारे में सत्य बता हमरासबके आहांक विचार आ काज सँ अवगत करेलनि आ आई हम आहां के नहियो जनैत आहांक नेतृत्व के सबल मानय छी। तैं हमसब पहिले सब मैथिल के एकठाम आनि त कतेको नेता अपने बनि जेता…. बाकी अनुभव में त आहां के हम कोनो बात कही ई हमर गलती होयत। हमरा सब सँ बेसी अनुभवी आ दूरदर्शी छी आहां
 
प्रवीण नारायण चौधरीः अहाँक सोच सही अछि, मुदा मिथिला लेल चाही कि आ केना कैल जाय ताहि लेल एकटा रणनीति छैक। ओहि रणनीति मे सफलता वास्ते अहाँ अपन जिम्मेवारी वहन करू आ आरो ३-४ वर्ष मे देखू जे ऊंट कोन करोट फेरैत छैक। हरिः हरः!!(पुनः मैथिल मंच सँ) – असम्भव बात हमरा करहे नहि अबैत अछि। मिथिला मे कार्यकर्ता खाली भोजकाल मे भेटैत छैक। बाकी समय सब नेता। सब अपन पेट अपने बलबुता सँ चलबैत अछि। कियो केकरो पेट नहि चलबैत छैक। ताहि हेतु सब अपना-आप मे नेता समान तागत रखैत अछि। मुदा चोपाहपंथ ओकरा मे ततेक तर धैर समायल रहैत छैक जे डर सँ सोझाँ नहि अबैत अछि। साइडे-साइडे छिटकीबाजी करैत अछि। तही लेल हमर अभियान अछि जे ओकरा ततेक बोल-भरोस दियैक जे ओ अपन हनुमानी तागत केँ बुझय आ नेता बनबाक वचन संग आगू आबय। एना सागर विदुषक जेकाँ खाली मुख्यमंत्री बनबाक फूइस भाव प्रकट नहि करय। सचमुच ओ मुख्यमंत्री बनि सकैत अछि से तागत सहित आगू आबय। लाउ, आइ वान्ट सच पिपल इन फ्रन्ट। कार्यकर्ता हम सब छी। हम सब हुनकर समर्थन मे समर्पित रहब। वादा अछि!! हरिः हरः!!
 
(ई प्रहसन जारी अछि…. जरुरत पड़ला पर एकरा आगुओ निरंतरता देल जाएत!)
अस्तु! हरिः हरः!!
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