नेपाल मे नवका राजनीतिक वेरिएन्ट

विचार

– प्रवीण नारायण चौधरी

कोरोनाक नवका वेरिएन्ट संग नेपाल मे राजनीति केर नवका वेरिएन्ट के प्रकोप

कोरोना के दोसर वेभ संगे नेपाल मे राजनीतिक परिवर्तनक दोसर (नवका) वेरिएन्ट आयल देखि रहल छी। किछु मास पूर्वहि वर्तमान सत्ताधारी दल के भीतर दुइ गूट भेलाक कारण एक गूट द्वारा संसद विघटन केर डेग उठायल गेल छलैक जेकर चौतर्फा आलोचना आ विरोध कयल गेलैक। नेपाली राजनीति केँ अत्यल्प बुझनिहार सेहो चौंकि गेल जे एना संविधान द्वारा स्पष्ट मना कयल गेल डेग केपी शर्मा ओलीजी समान परिपक्व राजनीतिक व्यक्तित्व द्वारा आखिर कोना उठायल जा सकैत अछि…., संगहि हमरा शुरए मे लागि गेल छल जे संघीय व्यवस्था लागू भेल राष्ट्र नेपाल मे संविधानक रक्षा लेल न्यायपालिका निश्चित एहि निर्णय केँ पलैट देत…. बाद मे स्वयं ओलीजी व हुनकर शागिर्द नेतृत्वकर्ता लोकनि मे बहुतो रास विज्ञजन सभ द्वारा सभा आयोजन कय-कय केँ देशक जनताक सोझाँ अपन निर्णय (संसद खारिज करबाक) विषयक औचित्य बखानैत देखि त आर विश्वस्त भऽ गेल रही जे ई एक कमजोर निर्णय थिक आ एकरा न्यायपालिका निश्चिते पलैट देत। हालांकि नेपालक सम्बन्ध मे एकटा अतिप्रचलित सत्य “नेपालमा मुखे कानून छ” – ईहो छल मोन मे जे एतय कोनो बातक सटीक अन्दाज लगेनाय सम्भव नहि, लेकिन दिन-दहाड़े डकैती केँ जायज कोना मानत सर्वोच्च न्यायालय आ तेकरो संवैधानिक इजलास… से पूरे विश्वास छल जे संसद विघटनक निर्णय केँ अदालत द्वारा पलैट देल जायत। वैह भेलैक। सुनबाई मे कनेक समय लगलैक, मुदा निर्णय केँ पलैट देल गेलैक।
निर्णय पलटलाक बाद घोर आश्चर्य लागल जखन देखलियैक जे नेपालक प्रधानमंत्री एवं सत्ताधारी दलक मुखिया अपन पद सँ राजीनामा (इस्तीफा) नहि देलनि। लोकतंत्र मे जखनहि कोनो नेतृत्वक निर्णय संवैधानिक स्वायत्त निकाय द्वारा खारिज कय देल जाय त नैतिकताक आधार पर इस्तीफा त बनैत छलैक। फेर इस्तीफा नहि देनाय हमरा मात्र नहि बड़का-बड़का राजनीतिक विश्लेषक आ गणितज्ञ केँ दाँत तर मे आंगूर दबेबाक लेल बाध्य कय देलक। तेकर बाद एकटा एहेन अदालती निर्णय आयल जे एहि आश्चर्य आ विस्मय केँ आरो ४४० वोल्ट के करंट लगाकय एकदम विचित्र रूपे तरंगित कय देलक। सत्ताधारी दल नेकपा नाम पर कयल गेल दावी ऊपर सर्वोच्च न्यायालय अपन फैसला दैत एकटा अजीब निर्णयक घोषणा कय देलक – ओ छलैक जे नेकपा नाम त दावेदार द्वारा चुनाव आयोग मे पहिने सँ दर्ता हेबाक कारण सत्ताधारी दलक नाम नेकपा नहि रहि सकैत अछि, लेकिन एकरा संग-संग सर्वोच्च अदालत एकटा आरो निर्णय कि कय देलकैक जे नेपाल कम्युनिष्ट पार्टीक एकता अवैधानिक अछि, दुइ दल एमाले आ माओवादी केन्द्र अपन-अपन पूर्व स्थिति मे अवस्थित हुए।
न्यायालयक ई भूमिका एकटा सुपर सरप्राइज के रूप मे आयल। लेकिन विश्लेषक आ राजनीतिक दल सब केँ ई बुझय मे आबि गेलैक जे नेपाल मे राजनीतिक परिवर्तनक पाछाँ कोनो अदृश्य शक्ति द्वारा पूर्व-निर्धारित कोर्स (डिजाइन) मे सारा काज कयल जा रहल अछि। सत्तापक्षक दुइ गूट मे सत्तासीन गूटक खिलाफत कय रहल दोसर गूट लेल ई अप्रत्याशित आ करारा तमाचा जे कहैत छैक हिन्दी मे, से छलैक। आब दोसर गूट लेल ओलीजी प्रति विषवमन आ घेराव अचानक दोसरे मोड़ लय लेलक। खेल-वेल चलैत रहल। एमाले आ माओवादी केन्द्र दुइ अलग दल बनि गेलाक बादहु एमाले केर असन्तुष्ट पक्ष माधव नेपाल व झलनाथ खनाल केर गूट सत्तासीन ओली गूट सँ वार्ता करितो ओली गूट द्वारा कोनो भाव-बट्टा नहि भेटैत देखि अपन-अपन चाइल चलैत रहल। होइत-होइत ओली सरकार केँ सत्ता सँ बाहर के रास्ता देखेबाक लेल गणित होइत रहल, नेपाली कांग्रेस (प्रमुख विपक्षी) केर कन्हा पर बन्दूक राखिकय प्रचंड आ नेपाल-खनाल समूह सत्ता-परिवर्तनक कतेको तरहक चालि चलैत रहल।
लेकिन गणितक सबटा हिसाब आबिकय फँसि गेल एकटा चारिम राजनीतिक शक्ति ‘जनता समाजवादी पार्टी’ पर। अजीबोगरीब स्थिति बनि गेलैक। कोरोना के नवका वेरिएन्टो सँ बेसी खतरनाक राजनितिक स्थिति – नेपालक राजनीतिक शक्ति केर आन्तरिक गूटबाजी सँ उत्पन्न सत्ता निर्धारणक गणित मे सत्तापक्ष केर एमाले के १२१ मे नेपाल-खनाल पक्षक असन्तुष्टि लेकिन दलीय मर्यादा मे बान्हल रहबाक यथास्थिति, मुख्य प्रतिपक्षीदल नेपाली कांग्रेस केर ६१ सदस्य, माओवादी केन्द्र केर ४९ सदस्य सँ कुल ११० सदस्यक बीच गठजोड़ भेलाक बाद बाकी २६ सदस्य प्राप्ति आ बहुमत पहुँचेबाक कसरत शुरू भेल। एहि लेल जनता समाजवादी पार्टी केँ सेहो ओली विरूद्ध के गठबन्धन मे शामिल करबाक लेल वार्ता आरम्भ भेल, परञ्च जसपा केर अध्यक्ष महन्थ ठाकुर द्वारा दुनू सत्तापक्ष व विपक्ष संग असंलग्न आ उत्तर-दक्षिण (चीन-भारत) सँ समदूरस्थ परराष्ट्रनीति केर सूत्र पर समान महत्व दैत मधेश आन्दोलनक विभिन्न मांग पर अड़ान लैत दुनू मे सँ केकरो भाव नहि देबाक नीति अख्तियार कयल गेल। यैह नीति एखन नेपालक राजनीति मे सर्वाधिक रोचकताक स्थिति उत्पन्न कय देने अछि। आखिरकार सभक गणित फेल भेलाक बाद आ ओलीपक्ष द्वारा नवका-नवका गोटीक चाइल दैत हाल दू टा गठबन्धन बनल देखि रहल छी –
१. ओली पक्ष एमाले (संस्थापन पक्ष) आ जसपा केर कुल २० सांसद सहितक गूट द्वारा तत्परताक संग सत्तापक्ष केँ संग दयवला एक पक्ष
२. नेपाली कांग्रेसक ६१ सांसद सहित शेर बहादुर देउवा केँ नेतृत्वक भार दैत प्रधानमंत्री बनेबाक आ सत्ता हथियेबाक लेल माओवादी केन्द्रक ४९, एमाले असन्तुष्ट पक्षक कुल २३ गोट सांसद तथा जसपा के उपेन्द्र यादव-बाबूराम भट्टराई पक्षक कुल १२ सांसद सहित स्पष्ट बहुमतक १४६ सांसद जे सर्वोच्च अदालत मे वर्तमान सत्तापक्ष आ राष्ट्रपतिक निर्णय – दोबारा संसद भंग आ नवनिर्वाचनक घोषणा विरूद्ध न्याय मांगि रहल अछि से पक्ष
राजनीतिक गेम एखनहुँ बड़ा रोचक स्थिति मे फँसल छैक। ओलीपक्षक दावी मे तार्किकता छैक जे दलीय व्यवस्थाक राजनीति मे दलीय मर्यादाक विरूद्ध नेपाल-खनाल सहितक २३ सांसद जाइत अछि त ओकर संसद पद सँ ओकरा पार्टी द्वारा हंटायल जायत आर तहिना जसपा के संस्थापन पक्ष द्वारा से एहि तरहक कार्रबाई करबाक काज सम्भावित अछि। माने जे पेंच फँसल रहि जायत। १२१ घटाव २३ बराबर ९८ आ ३२ घटाव १२ बराबर २० केर जोड़ ११८ होइत अछि। दोसर दिश ६१ आ ४९ के जोड़ ११० होइत अछि। माने घुमा-फिराकय सत्ता ओली जीक हाथहि मे रहैत अछि। न्यायालयक निर्णय ओली विरूद्ध अबैत अछि तैयो खेल रोचक बनल रहत। एम्हर कोरोना सँ नेपालक हाल बेहाल अछिये। आब ई देखय लेल शेष अछि जे आगाँ कि होयत!
एहि मे कतहु दुइ मत नहि जे नव निर्वाचन आब एहि देश लेल परम जरूरी भऽ गेल अछि जाहि दिशा मे अन्तरिम चुनावी ओली सरकार जा रहल अछि। हँ, संकेत ईहो अछि जे आगामी दिन मे नया गठबन्धन राजनीति देखय मे आओत। एहि नव राजनीतिक गठबन्धन केर पाछाँ भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जेहेन संस्थानक अहम् भूमिका केँ नहि काटल जा सकैत अछि।

हरिः हरः!!

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