“कोरोना संकट”

आभा ।                                 

#2k21कोरोनाकाल और अहि सं
सामान्य जनजीवन पर प्रभाव #

“पहिल सुख निरोगी काया “इ कथन हमरा सब के कहै अछि कि स्वस्थ शरीर मनुष्य के सब सं महत्वपूर्ण पूंजी अछि।
पहिने हम अपन व्यक्तिगत अनुभव साझा कर चाहैत छी। कोरोना हमर पतिदेव,बेटी आर हमरा तीनू गोटे के भेल रहै। खाली हमर बेटा अहि सं बचल छल। घर में खाना पर आफत छल। बेटा के बचा क रखनाइ सेहो एकटा चुनौती छल। मुदा हमर सबहक मनोबल मजबूत छल। हमसब घबरेलौं नहिं। एकर जे नियम छैक पालन करैत रहलौं। हमर सोसाइटी के महिला सब बहुत मदद केलनि। कियो हमरा सबके नास्ता,कियो खाना आर बहुत तरहक जरूरत के सामान आनै मे मदद केलनि। आब हमसब अहां सबहक आशीर्वाद आर भगवान कृपा सं पूरा स्वस्थ छी।
मानसिक प्रभाव– अहि बीमारी के असर शरीर,दिमाग,भावना आर व्यवहार पर पड़ैत अछि।” लोक के परेशान करै के तीन कारण अछि– एक त कोरोना वायरस सं संक्रमित होइ के डर,दोसर नौकरी आर कारोबार के अनिश्चितता आर तेसर लाॅकडाउन के कारण आयल अकेलापन। “अपना आपके मानसिक रूप सं मजबूत केनाइ जरूरी अछि। धैर्य के संग संग इंतजार करू। अपन रिश्ता के मजबूत करू,घर सं नहिं निकलु,बालकनी या घर के बगीचा में ठाढ़ भ क सूर्य के रौशनी में नीक महसूस करब। अपन दिनचर्या में खाना-पीना आर व्यायाम के शामिल करू। समय के उपयोग अपन रूचि पूरा करै में करू अहां के मनपसंद काज जे अछि जाहि सं अहां के खुशी भेटैत अछि ओ करू। बेसी कोरोना के खबर टेलीविजन आर सोशल मीडिया पर नहिं देखु।
आर्थिक प्रभाव– कोरोना वायरस के कारण लाॅकडाउन रहला सं व्यवसाय आर उद्योग प्रभावित भेल अछि। घरेलु आपूर्ति आर मांग प्रभावित भेला सं आर्थिक वृध्दि दर प्रभावित भेल अछि। बेरोजगारी में तेजी सं बढ़त भेल अछि। सरकारी आय में कमी,पर्यटन उद्योग के पतन,आतिथ्य उद्योग के पतन ई सब आर्थिक प्रभाव महामारी में देखै लेल भेट रहल अछि। चुनौती सं निपटै लेल जल्द सं जल्द प्रभावी कदम उठबै के जरूरत छैक।
सामाजिक प्रभाव– अहि बीमारी के पहिल आर सब सं गंभीर प्रभाव ओइ परिवार पर पड़ल जिनकर सदस्य अहि बीमारी के चलते अहि दुनियां में नहिं छेथिन। दोसर सब सं गंभीर प्रभाव ओ समुदाय अछि जे आर्थिक तौर पर पिछड़ल छैक। जेना दिहाड़ी मजदूर,असंगठित क्षेत्र में काज करै वाला कामगार सब। तेसर सब सं गंभीर प्रभाव स्कूल-कॉलेज के छात्र सब पर पड़ल अछि। स्कूल-कॉलेज बंद भेला सं बच्चा सबहक मानसिक विकास रूकि गेल छैक।
धार्मिक प्रभाव– कोरोना वायरस के कारण मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारा आर चर्च सब बंद भ गेल छैक। लोक सब एखनो विवाह,मुंडन,उपनयन संस्कार आर मृत्यु भोज लेल शहर सं गाम जा रहल अछि। एकटा कहावत अछि–“जान अछि त जहान अछि “।सामाजिक समारोह में गेनाइ कोनो जरूरी नहिं छैक। लोक के बुझ पड़त कि विवाह,मुंडन,कुम्भ,चुनाव,रैली बादो में भ सकैत छैक पहिने समाज के अहि घातक बीमारी सं बचेबाक अछि। गाम घर में ई बीमारी फैल जायत त बहुत पैघ अनर्थ भ जायत। बहुत धार्मिक स्थल पर कोरोना मरीज लेल उचित व्यवस्था उपलब्ध भ रहल छैक। बहुत जगह (N G O)संस्था सब सेहो मदद क रहल अछि। खाना लेल सेहो लंगर लगा क लोक के खाना देल जा रहल छैक।
समाधान– अहि बीमारी के जे नियम छै ओकर पालन करू,घर सं बाहर कम सं कम निकलु,मास्क आर सोशल डिस्टेंसिंग राखु,अपन घर के बुज़ुर्ग के बेसी ध्यान राखु,सबहक मदद के भावना राखु। जिनका सं जे मदद भ सकै जरूर करू,वैक्सीन सबगोटे लगवा लिय,आक्सीजन के कमी अछि तैं बेसी सं बेसी गाछ लगेबाक चाही। प्रकृति सं खिलवाड़ नहिं करू। एकरा हराबै के बस एक ही मंत्र अछि किछ दिन अहां आर सं और अप्पन सं दूर रहु।

आभा झा
गाजियाबाद

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