“अपन पुरखाक खुनैल पोखरि”

सुधा देवी।                                     

*हम्मर पोखैर ❤️
पोखैर पर लिखबाक अवसर भेटल तँ आई हम अप्पन पोखैर पर लिखब पोखैर तँ दादा परदादा कँ धरोहर हमरा सबकेंँ वरदान म भेटल ऐछ आर ओही धरोहर कँ देखी अपन कुल खनदान अपन पुरखाह पर गर्व होईत ऐछ जेंँ हम ओही कुल खनदान कँ छी जे जन कल्याण हेतु एकटा के कहैयँ सात सात टा पोखैर खुनेने छला हमरा सबकेंँ बाबा कँ बाबा आब तँ 6,पोखैर सरकार अपन कब्जा मेंँ ललेक लेकिन अखनो एकटा पोखैर बचल ऐछ हमरा सबके जाही में सिजन पर माछ आर मखान उपजैत ऐछ हमर भैया सब मलहबा कँ ददैत छथिन जे माछ मखान उपजौ तँ भैया सबके साल क 90000 हजार रुपया साथ में दस किलो मखान जखन मर्जी माछ ल आऊ अपन पोखैर कोनो रोक टोक नैय बाबा सबके मुँह सँ सुनने छी जे पहीले जमाना मेंँ हमर बाबा कँ जेंँ बाबा तिनकर बाबा सब जे रहथिन सें जन कल्याण मानवजाति पशु पंक्षी सबकेंँ कल्याण हेतु गाँव गाँव मेंँ जाके जतँ पोखैर नैय छै ओतह पोखैर खुनबथिन जे सब जाती कँ सुख सुबिधा भेटैन संग मेंँ पोखैर केंँ महार पर एकट मन्दिर सेहो बनबथिन जेंँ स्नान कय सब व्यक्ति पुजा करथी जेंँ सबहक कल्याण संग अपनो पुन्य कें लेल सोचथिन मिथिला मेंँ हर गाँव मेंँ चाईर पाँचटा पोखैर जरूर भेटत आर हर पोखैर कँ किछ न किछ बिशेषता भेटबे हमसब जखन बच्चा रही तँ पोखैर मेंँ नहाई तखन कँ जे पोखैर कँ जरूरत देखीयै जेना.बुझाईत छल जे पोखैर बिना किनको नैय बनतैन कारण स्त्री पुरूष बारहो वर्ण बाल बच्चा सब पोखैरे मेंँ नहाथिन आर सबहक संग एकटा अलगे आनंद होईन सबके एक दोसर संगे गप सप जतेक काज होईन सबके कपड़ा धोनाई.सँ लके माल जाल पैन पियैनाई.होईन या महीस कँ नहेनाई सब काज पोखैरे सँ होई आब तँ गाँव.घर कँ वातवरण संग हर ओ प्रकृति कँ चिज विलुप्त भगेल आब नैय ओ नगरी ना ओ नोयठा आब जहीना परदेश तहीना गाँव बुझाईत ऐछ हम सब बच्चा में ग्रुप बनाके सब सखी सब नहाय लेल जैतौ आर घंटा घंटा भरी पोखैर कंँ हरियाली देखैत गप सरंका करैत कपड़ा धोइत नहाकेंँ अंगना अबितौ लगैत छल जेंँ पोखैर केंँ ठंडक सँ मन तृप्त लगैत छल बहुत आनंद पल छल ओ सब वातावरण गाँव कँ जेंँ भेटनाई आब असंभव अईछ कतेक लिखु अपन मिथलाक पोखैर कँ वर्णन जतेक लिखब कम हैत जय मिथिला जय मैथिली जय जय सब मिथलानी 🙏🙏🙏❤️💕💓

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बादक लेख

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