“लिखल मेटल नहिं जाई”

वंदना चौधरी।                             

लिखल मेटल नहि जाय :
ठाकुर सेहब के एकेटा बेटा रहथिन और ओहो गन्धर्व सनक सुंदर और ताहू में खूब पढ़ल लिखल ,संजोग स नोकरी सेहो सरकारी भ गेलैन।
आब त ठाकुर सेहब खूब मोंछ पिजेने रहैथ जे बेटा के विवाह ओकरे सनक सुंदर लड़की स करब।दूर दूर स खूब नीक नीक लड़की के कथा आबय लगलैंन।एक स एक सुंदरी सबके फोटो देखैथ और छंटी देथिन।ओहि सब में जे सबस सुंदर लड़की छल ओकरे स विवाह करबाक नियार भेल।मुदा ओई स पहिने लड़का लड़की दुनु के देखबा के बात उठल।किये त जतबे लड़का पढ़ल लिखल ,ओतबे लड़की।दुनु के रजामंदी जरूरी छल।
एकटा तारीख निश्चित कक देखा सुनि के दिन तय भेल।दुनु पक्ष मंदिर में भेंट घांट करबाक लेल उपस्थित भेलैथ।सब बात तय भेला क बाद लड़की अपन माय के कान में कहलखिन जे हमरा लड़का स किछ बात करबाक अछि एकांत में।लड़की के माय ई प्रस्ताव रखलखिन त सब कियो सहमति देखबैत कहलखिन ठीक छै,आबक जुग में ई कोनो पैघ बात नै,जाउ बात क लीय। लड़की यानी कि रूपा जे नामे अनुरूप सुंदर छेलीह ,लड़का महेंद्र के कहलखिन्ह जे देखु हम अहाँ स किछ कहै चाहै छि ,पहिने अहाँ ई सुनि लीय तकर बाद विवाह के लेल निर्णय लेब।लड़का यानी महेंद्र कहलखिन्ह जे कहु की बात।साहस कक रूपा कहलखिन्ह जे देखु हमरा जांघ पर चरक के दाग अछि और ई बात हम अहाँ स नुका सकैत रही ,मुदा हम विवाह एहेन पवित्र सम्बन्ध के बुनियाद झूठ स नै राखय चाहै छि।
ई सुनिते महेंद्र सन्न रही गेलैथ और बहुत छोट मोन स वापस ओई स्थान पर एलैथ जतय सब बैसल रहथिन।घर आबिक सब बात अपन पिता के सुना देलखिन्ह।ठाकुर सेहब सीधे मना क देलखिन्ह अहि विवाह स।
अगिले दिन एकटा ओहु स सुंदर लड़की पूनम के प्रस्ताव एल और बिना कोनो देरी केने लड़का लड़की के देखा सुनि भ गेल और विवाहक दिन सेहो ओतहि तय भ गेल।ठाकुर सेहब और पूनम के पिता दुनु खूब धूमधाम स विवाहक तैयारी में लागि गेलैथ।
विवाह खूब नीक स सम्पन्न भेल,एकेटा पुतहु रहथिन ते दुरागमन सेहो चतुर्थी के पराते करवा लेलखिन।नव कनिया के आय बासन छूबाक बिध करबै के दिन रहैन।
सासु ननदि सब कियो मदद लेल कहलखिन्ह मुदा पूनम नै मानलैथ और असगरे सब चीज बनबै लेल भन्सा घर प्रवेश केलैथ।सब खूब हँसी ठिठोली नव कनिया संग बाहर बैसल करैत रहैथ और आय की बनेति कनिया तेकर प्रतीक्षा में रहैथ।
कनिये काल में हँसी के माहौल सन्नाटा में बदलि गेल,सब कियो एतबे सोचैत रहैथ जे ई कि भ गेलै ,कोना भ गेलै।पूनम के आधा स बेसी चेहरा झडैक गेल रहैन ,देखबा योग्य सेहो नै रहैन।
महेंद्र माथ पर हाथ लैत बजलैथ ,जे लिखल मेटल नहीं जाय यौ बाबूजी।
✍️ ✍️ वंदना चौधरी

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