परदेश नहि जेता त ब्याहो पर आफद – सन्दर्भ मिथिला सँ पलायन पर युवा विचार

युवा विचार

– सागर झा

(दहेज मुक्त मिथिला पर लेखनीक प्रवाह अन्तर्गत लिखल गेल लेख जाहि मे एक युवा अपन विचार रखलनि अछि, पठनीय आ मननीय लेख)

मिथिलांचलक लोक कs लगातार अपन छेत्र सs पलायन के मुख्य कारण हमरा अनुसारे एक्के टा अछि औऱ ओ कारण अछि आर्थिक रूप सs कमज़ोर होइ के, एकरा बेरोजगारी सेहो कहि सकै छी।
हमर पिता जी पूर्ण रुप सs खेती पर निर्भर छलथि, लेकिन आब पहिले के अपेक्षा ओत्तेक उपजा बारी नइ होइ छै, तेँ आब पूर्णरूपे खेती पर निर्भर नहि कहल जा सकैत अछि। संगहि आब ओ पंचायत चुनाव, पंचायत के राजनीति में सेहो रुचि रखैत छथि। जखन कि हमर चच्चा जी सब पढ़िलिखि कs भारत सरकार के कर्मचारी भेलाह औऱ एखनहुँ एकटा चच्चा जी Currency Note Press (मुद्रनालय भारत सरकार में सेवार्थ) छथि। औरो चच्चा सब मिलिट्री सब में कार्यरत रहथि जे रिटायर्मेंट के बाद गुजरि गेला।
हम ओहन परिवार सs छी जे जाहि में पहिने बहुत कम्मे लोक उच्च शिक्षा प्राप्त कयलनि। हमरा गामहु मे पहिने पांच या दस क्लास धरि मात्र बेसी लोक पढथि। मुदा पहिल व्यक्ति एहन छलाह हमर परिवार में जे ओई समय में इंग्लैंड जा कs पढ़ाई लिखाई उच्च शिक्षा प्राप्त कयलथि, जाहि समय में गाम घरक लोक पूर्ण रुप सs खेती पर निर्भर करय। स्वर्गीय इंजीनियर साहेब उमेश झा जी नाम छलन्हि। हुनकर चर्चा दस गाम में चलैत रहैत छलैक – जे पहिल व्यक्ति एहेन छथि दस गाम में जे इंग्लैंड में पढ़ाई करैत छथि। एखन हुनकर लड़का एम.बी.बी.एस. डॉक्टर छथिन, राजेश झा जी, हैदराबाद में। खैर हम बात करैत छी निरंतर मिथलाक लोक कs अपन छेत्र सs पलायन करै के कारण पर।
बचपने सs समाज में अक्सर लोक के देखैत रहियैन जे पढ़िलिखि लेथि और नौकरी के लेल परदेश पकड़ि लैत छलथि। बेसी पढ़ला लिखला के बाद अक्सर लोक खेती केनाई नहि ठीक बुझै छथिन शायद, तेँ पढ़िलिखि कs नौकरी के तलाश में, रोजगारक तलाश में, अक्सर लोक शहर के तरफ़ रुख़ करैत छथि। चूँकि आर्थिक रुप सs सबल मजबूत बनै के लेल, जीवनयापन के लेल, पारिवारिक आर्थिक जिम्मेदारी के निभाबइ के लेल, परदेश निकलहे पड़ैत छलैन औऱ एखनो अक्सर लोक केँ निकलहे पड़ैत छन्हि। आब प्रश्न ई उठैत अछि जे परदेशे किये पकड़य पड़ैत छन्हि? अपन लोक, गाम समाज, परिवार, पैतृक स्थान, मातृभाषा, जन्म स्थान, आदि केँ छोड़ि कs परदेश ही किये पकड़य पड़ैत छन्हि? ओ गाम समाज़ अपन छेत्र में भी रहि कs कुनु रोज़गार, कुनु व्यवसाय कs सकैत छथि, बिलकुल कs सकैत छथि, मुदा सब कियो नहि कs सकैत छथि। जहिया सs बिहार में जूट मिल, राईस मिल, सूत मिल, चीनी मिल, पेपर मिल स्थायी रुप सs बंद भेल तहिया सs लगभग निरंतर पलायन जारी अछि। मिथिला मिथिलांचल वासी लोक कs अपन छेत्र में रहि कs व्यवसाय-व्यापार वैह लोक सब कs सकैत छथि जे आर्थिक रुप सs सबल छथि, मजबूत छथि। बहुत लोक आर्थिक रुप सs मजबूत होइतो व्यापार व्यवसाय में लाखों फँसा कs रिश्क नहि लेबs चाहैत छथि। हमरा अनुसारे इहो एकटा कारण बनैत अछि निरंतर मिथिलावासीक पलायन करै के। खैर, किछु लोक केँ पढ़ाई लिखाई करिते अपने छेत्र, अपने राज्य मे कतहु सरकारी नौकरी भs जाइत छन्हि, मुदा सबके नहि, बहुत कम लोक एहेन छथि जिनका अपन छेत्र – अपन राज्य में सरकारी नौकरी लाग़ि जाइत छन्हि। और केँ तs शहर के तरफ़ रुख़ केनाइ मज़बूरी भs जाइत छन्हि, जs रुख़ नहि करता तs पारिवारिक हालात एकदम डमाडोल भs जेतैन, तेँ मजबूरन शहर के तरफ़ पलायन करहे पड़ैत छन्हि। ओना जs बिहार में कल कारखाना, कंपनी, फैक्ट्री रहितैक तs बहुत हद तक़ लोक अपन छेत्र, अपन समाज़, अपन परिवार, अपन राज्य नहि छोड़ितथि। जs अपने छेत्र में रोजगार भs जेतनि तs शहर रोज़गार के लेल पलायन करबाक कुनु कारणे नहि हमरा अनुसारे। औऱ समाज़ में अक्सर देखौंस सेहो होइत छैक। घरक लोक कहता फल्लाँ के धियापुता के देख़ही – तोरा सs कम्मे पढ़ल लिख़ल छैक, बाहर कमाइ छै, हर महीना मनिआर्डर आबै छै, तूँ गामे में बैसल रहबे, हम कत्तेक दिन तोरा खुएबौ,😊 बाहर जो कमो-खटो, अपन पैर पर ठाढ़ हो, ईहो एकटा कारण अछि पलायन करय के – अपन छेत्र, अपन परिवार, अपन समाज़, अपन जिला, अपन राज्य सँ ।😊 आ सब सँ बड़का बात एखुनका समय में, ख़ास कs मैथिल ब्राह्मण परिवारकs बच्चा के लेल शहर में नौकरी नहि करत तs विवाहो भेनाय आब मुश्किले बुझु। 😊.. एक समय छल जे घर, आंगन, ज़मीनजथा पर विवाह भs जाइत छलैक, चाहे लड़का गाम में रहे या शहर में रहे, विवाह भs जाइत छलैक। मुदा आब नहि। आब हर लड़कीवला के कमासुत लड़का चाही, भले कम्मे कमाइत होइ, मुदा परिवार पर आश्रित नहि होइ। हमरा अनुसारे ईहो एकटा कारण अछि मिथिलांचलक युवा पीढ़ी केर पलायन करय के। 😄… वगैरह वगैरह कारण अनेके अछि। ओत्ते लिख़ब तs पुन्नह परात भs जायत। तेँ आब नहि लिख़ब। 😃 औऱ हाँ, सबके अपन अपन रुचियो होइत छैक। कियो गामे में रहऽ चाहैत छथि, कियो शहर में। जिनका जतय नीक लागैत छन्हि ओ ओतय रहनायत पसंद करैत छथि, कियो शहर में रहितो गाम बराबर जाय-आबय छथि, कियो दू वर्ष ‍- चारि वर्ष पर गाम जाइत छथि, जिनका जे नीक बुझाइत छन्हि से करैत छथि।
आगु अपने सब ज्ञानी लोक छी, हमरा लिख़ल में जs कतहु त्रुटि होइ ताहि लेल क्षमाप्रार्थी छी हम। बस मिथिलांचल सs होइत लगातार पालयन पर किछु विचार रखलौ हन, किनको भावना के ठेस पहुंचाबै के हमर उद्देश्य नहि अछि, अपन देखल, अपन बीतल, किछु अनुभव, किछ सुनल तर्क अहां सबहक समक्ष रखलौ हन #पलायन पर। जय माँ जानकी, जय मिथला, जय मैथिली। 🙏
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