नारी

नारी सक्ती के प्रणाम नारी गृह लक्ष्मी होई छै। नारी के बिना घर सुना लागत अछी। नारी बहुत श्रम करे छेत्। हुनका भले माथ दुखाई लेकिन वो परिवार लेल खाना बना बई छै।अपन परवाह नई क उ परिवार के चिन्ता करें छैय। काम करे बला त सन्डे के लेट उठे या। मुदा नारी के सन्डे के प्रातः जल्दी उठ के रहे छै। नारी सक्ती के बिना परिवार और समाज के कोनो अस्तित्व नई छै ।नारी बहुत सहनशील होई छै।ते हुनकर सम्मान करी । इज्जत करी।नई की घर के नौकरानी समझी।नारी शब्द के उल्टा रानी होई छै। त नारी रानी होई छै नौकरानी नई। सब किओ स निवेदन करब की समाज में और घर में स्त्री जाती के सम्मान करिऊ। बेटा बंस छै त बेटी अंश छै। नारी दुई कुल के मर्यादा के रक्छा करें छै। बेटा बुढ़ बाप के पास नई रख चाहे छे।लेकिन बेटी भेले उ दूर रहे मगर माई बाप के तकलीफ में हमेशा साथ रहे छै। बेटी लक्ष्मी के अवतार छै। बेटी लक्ष्मी बनी सम्पत्ति दाई छे ।काली बैन दुष्ट के संहार करे छै। जननी बैन क पालन करे छै।सक्ती बैन क जग के रकछा करें छै।ते नारी के सम्मान करू। जायदा शब्द नई लिखी छी किया कि प्रतिबंध छै। सीधी बात ई अछी की नारी बिना परिवार या संसार के कल्पना नई कायल का सके छे ।नमस्कार सब गोटे के

श्रवण शाह

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