कियैक नहि भ रहल अछि मैथिल ब्राह्मण समुदाय केर लड़काक विवाह

मैथिल ब्राह्मण समुदाय आ कुमार लड़काक बढैत संख्या

हम मैथिल ब्राह्मण समुदाय सँ छी। ओना त मिथिला सँ सब जाति सिर्फ आ सिर्फ मैथिल कहाइत छी, कारण हमरा सभक राजा मैथिल कहाइत छलाह – हुनकहि पालित राज्य मिथिला आ प्रजा सेहो राजा समानहि मैथिल कहाइत छी – मुदा आइ एहि लेख मार्फत हम अपन जातीय सीमा मे रहैत जे समस्या देखि रहल छी ताहि पर स्वजातीय पाठकक ध्यानाकर्षण संग हुनकर विचार सेहो चाहि रहल छी।

आजुक विषय अछि ‘मैथिल ब्राह्मण समुदाय मे कुमार लड़काक बढैत संख्या’ –

कुमार माने अविवाहित। विवाहक उमेर पुरि गेल मुदा घटक नहि आबि रहल अछि – ई समस्या आब सामान्य बनि गेल देखाइत अछि। घटक नहि एबाक कय गोट कारण अछि, मुदा मूल कारण यैह जे ‘रोजी-रोटी लेल हम सब अपन मूल गाम-ठाम छोड़ि भारत-नेपाल व अन्य देश सभक विभिन्न स्थान पर प्रवासी जीवन बिताबय लागल छी। कतेको परिवार त डबल रेजिडेन्स (द्विआवास) पद्धति केँ सेहो अपना चुकल छी, गामक घर आ प्रवासक नगर/शहर/स्थानक घर। चूँकि हम मैथिल ब्राह्मण समुदाय शिक्षा-दीक्षा, संस्कार संग अनुशासित जीवनशैली आ भविष्यक सुरक्षा प्रति अत्यधिक जागरुक आ चिन्तनशील प्राणी थिकहुँ, स्वाभाविक तौर पर अपन स्वाभिमानक रक्षार्थ बिना कोनो बेसी राजनीतिक भाव-बट्टा आ मुंहतक्की कएने सीधा अपन सौरव आ सौष्ठव सँ कतहु स्वाबलम्बनक जीवन जिबय लेल प्रसिद्ध छी…. भले मेहनत-मजदूरी कय लेब, तरकारी बेचि लेब, ईंटा भट्ठा मे काज कय लेब, सुलव शौचालयक व्यवस्थापनक नौकरी कय लेब…. माने कि निकृष्ट सँ निकृष्टतम् काज करितो अपन आ अपन घर-परिवार, बाल-बच्चा, माता-पिता, विध-व्यवहार, समाज आदि विभिन्न दायित्व केर निर्वहन लेल मात्र आ मात्र स्वयं केँ सबल बनेबाक विलक्षण कला अछि हमरा सभ मे। एहि तरहक उच्च परिष्कृत संस्कार सँ सम्पन्न हम मैथिल ब्राह्मण आइ प्रवासक जीवन जियय लेल बाध्य भऽ गेल छी आ प्रवासक कारण कतेको रास भटकाव, मौलिकता सँ विलगाव, कूरीति, दोषपूर्ण व्यवहार, संयुक्त परिवार सँ एकल परिवार मे परिणति, वृद्ध माता-पिता व आन सर-कुटुम्ब (सम्बन्धी) आदि सँ दुरी – आदि अनेकों कमजोरी सेहो आबि गेल अछि। आर, एहि कारणें आइ सब सँ बेसी प्रभावित भऽ रहल अछि जीवनक एकटा सर्वाधिक महत्वपूर्ण लौकिकता यानी विवाह सम्बन्ध। घटकैती प्रथाक पुरान सब रूप आइ कालग्रस्त (Outdated) भऽ गेल अछि। नहिये सौराठ-ससौला सहित कुल ४२ गोट वैवाहिक सह विद्वत् विमर्श सभाक कतहु अस्तित्व जीबित अछि, नहिये घरदेखी (घरकुटमैती), नहिये गताते कुटमैतिये आब १००% जीबित अछि। तखन विवाह योग्य कुमार लड़का आ कुमारि लड़की दुनू हमरा समुदाय मे समस्या भोगि रहल अवस्था अछि।

लड़की कुमारि छथि आ हुनकर विवाह नहि भऽ रहलनि अछि – ई समस्या अत्यल्प (Rare) देखाइत अछि…. विरले कोनो गार्जियन (परिवार) समय सँ लड़कीक विवाह नहि कयलनि किंवा लड़की स्वयं हायर एजुकेशन के चक्कर मे समय पर ध्यान नहि देलीह… होइत-होइत उम्र सीमा नांघि गेलनि आ आब (मोस्टली ३० वर्ष नांघलाक बाद) हुनकर विवाह मे कोनो नीक कथा (प्रस्ताव) सोझाँ कय गोट कारण सँ नहि आबि रहलनि अछि… एहेन संख्या बहुत कम अछि लेकिन अछि। एतय हम सब गार्जियन केँ आ खुद विवाह योग्य लड़की सब केँ नीक सँ ध्यानाकर्षण करय चाहब जे लड़का कुमार नीक मुदा लड़की कुमारिये रहि गेनाय बड़ा खराब परिस्थिति निर्माण करैछ। जाहि कोनो परिवार मे एको टा घटना एहि तरहक घटि गेल जे लड़की कुमारिये रहि गेल हो… ओहि परिवारक समस्त अस्तित्व सवालक घेरा मे चलि जाइत अछि। एकटा के कारण सभक जीबिते बलिदान भऽ जाइत अछि, कय टा भाइ सेहो कुमारे रहि जाइत अछि, कय टा आनो बहिन सब कुमारिये रहि जाइत अछि… अतः विवाहक मामिला मे बेसी जिद्द आ अन्ठेबाक प्रवृत्ति सँ सब केँ बचनाय बहुत जरूरी अछि।

लड़का कुमार आइ गाम-गाम मे पड़ल देखाइत अछि। घटकैतीक परम्परा बदलबाक उपरोक्त चर्चित विन्दु त एकटा कहल, दोसर कय गोट कारण सभ सेहो लड़का सब केँ कुमार रहय लेल बाध्य कएने अछि, कएने जा रहल अछि। जेना, माता-पिताक सख-मनोरथ जे जा धरि कियो मोटगर मालवला नहि अओता ता धरि कतहु बेटाक विवाह कोना कय लेब…, अपन घर-मड़ौसी बेचिकय बेटाक विवाह थोड़े न करब…., यानी दहेजक लोभ मे कतेको गोटे मारल जा रहल अछि। पुनः कतेको लड़का बेरोजगारीक कारण नीक लड़की या परिवार द्वारा चयन प्रक्रिया मे छँटा जाइत अछि। आइ-काल्हि लड़कीक संख्या जन्म अनुपातक हिसाबे लड़काक तुलना मे ओहिना बहुत कम छैक आर ई रेशियो हमरा हिसाब लड़का-लड़कीक हमर समुदाय मे १०००ः७०० छैक, माने सैकड़ा मे ३० गो लेल लड़की छहिये नहि… कारण कन्या भ्रूण हत्या, मूल कारण एतहु दहेज छैक। तेसर, लड़कीक औसत उमेर २५ सँ ३० हेबाक कारण लड़काक उमेर स्वतः ३० सँ ३५ भऽ गेल छैक आर एहि उमेर सीमाक बढोत्तरी मे लड़की-लड़का दुनू प्रभावित होइत अछि, बेसी लड़का सब केँ जोखिम झेलय पड़ैत छैक। यदि बढियां नौकरी आ आर्थिक सबलता नहि रहैत छैक त ओ आजीवन कुमार रहय लेल छँटा जाइत अछि। एहि विसंगति (anomaly) केर चलते आइ हमरा सभक ब्राह्मण समुदाय काफी पैघ समस्या सँ जुझि रहल कहि सकैत छी। एकर दुष्प्रभाव सँ समाज लहुलुहान भऽ गेल अछि, कतेको रास अन्तर्जातीय व आन-आन राज्य (संस्कृति) मे भागिकय वा बाध्य भयकय विवाह करैत अछि।

एकटा पैघ समस्या ईहो अछि जे हमर समुदायक लड़कीक मानसिकता मे शहरक जीवन नहि जानि कियैक एतेक बेसी पसन्द (preference) कयल जा रहल अछि…. एहि के चलते गाम मे रहि रहल कतेको सक्षम आ समझदार, काबिल, रोजगारी युवा सब सेहो कुमार रहय लेल बाध्य अछि। एहि नासमझी केँ कोना दूर कयल जाय ताहि लेल हम छगुनता मे छी। स्पष्ट करी जे गामहि केर जीवन मे वास्तविक सुख अछि। गामक तुलना शहर किन्नहु नहि कय सकैत अछि। कतेको लोक केँ होइत छन्हि जे शहर मे शिक्षा-दीक्षा गामक अपेक्षा बेसी नीक अछि, हम स्पष्ट कहय चाहब जे शहरक शिक्षा-दीक्षा विकासी मुर्गी फारम जेकाँ अंडा आ मुर्गा-मुर्गीक जन्म दय रहल अछि। ई विकासी मुर्गा-मुर्गी क्वालिटी सँ केकरो कोनो खास मदति नहि भेटि रहल अछि। हँ, शहर मे यदि टौप क्वालिटी एजुकेशनल इंस्टीच्युट्स मे अहाँ अपन बच्चा केँ पढा रहल छी त निश्चित एकटा ब्रान्ड वैल्यू भेटि रहल अछि, जे रोजगार प्राप्ति मे आ आनो-आनो सेक्टर मे हेल्प करत। लेकिन ओहो इन्स्टीच्युट्स मे अधिकांश बच्चा ग्रामीण परिवेश सँ आयल रहैछ वैह टौपर होइत अछि। तेँ, गामक जीवन सँ प्रेम करू आ गाम मे गृहस्थी केँ सम्हारनाय एकरा बेसी महान बुझू।

अतः एहि समस्याक समाधान लेल ‘दहेज मुक्त मिथिला’ समान कतेको रास छोट-छोट प्रयास करब आ समय पर तकध्यान लगाकय विवाह करब – एहि लेल समाज केँ जागरूक रहब जरूरी अछि। बेसी सँ बेसी बायोडाटा शेयर करू, आपस मे परिचय बढाउ, समस्या आबय सँ पहिने समाधान निकालि लेल जाउ। अंग्रेजी मे एकटा कहावत छैक न जे never let the birds of problem fly over your head, if you can’t stop it from flying over your head then try not to let it make the nest on your head. माने जे समस्यारूपी चिड़ियां केँ अपन माथ पर उड़य सँ रोकू… यदि उड़य सँ नहि रोकि सकैत होइ त कृपया ओकरा अपन माथ मे खोता बनबय सँ त जरूरे रोकू। आशा करैत छी जे एहि चिन्तन सँ अहाँ सब केँ सेहो समुचित प्रकाश मस्तिष्क मे जरूरे भेटत आ जीवनक एक बहुत पैघ आ जरूरी काज यानि विवाह समय पर करय जायब जाहि सँ ऐगला पीढी (सन्तान) समय सँ आओत आ ओकरा सही तरह सँ पालन-पोषण आ शिक्षा-दीक्षा भेटतैक। समाज प्रदूषण सँ बचत। याद रहय, ब्राह्मण केँ जहिना समाजक अगुआ मानल गेल छैक से अगुआ मे समस्या आओत त आन केर हालत सेहो नीक नहि होयत। तेँ चौकन्ना रहब बेसी जरूरी अछि। ॐ तत्सत्!! हरिर्हरिः!!

हरिः हरः!!

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