“अनमोल मिथिला”

सुधा देवी।                                     

मिथिला में अतिथि सत्कार
अतिथि देवो भवः मतलब अतिथि भगवान कें रूप होइ छैथ हुनकर स्वागत प्रेम भाव श्रद्भा और निहस्वार्थ भाव सें कैलजायत अइछ हम तँ बचचे स देखैत ऐलौ जें हमरा घर में कोनो पाहन अबैत छला तँ सब गोटे हुनकर स्वागत। मे जुटी जायत। छल घर में हलचल जका मैच जायत छल पाहुन कें आहो भगत में पहीने पाहुन कें बैसय दियौन फेर हुनका सरबत चाय सें स्वागत करिययौन तहन भोजन कें बिशेष बेबस्था हेतैन कमम सें कम गयारह टा तरकारी तरूवा भेनाईये अइछ पापड़ तिलकोर कें तररूवा फेमस ऐछ अपन मिथिला मे संग दही चीनी बैगर भोजन अधुरा मानल गेल अइछ पाहुन कें हमहु सब ओहीक पालन करैत छी और हमरो लेल अतिथि भगवान तुल्य छैथ हमरो अतिथि कें सत्कार करैमें बड मोन लगैत अइछ और सेवा भाव सें हम पाहुन या और कियो अतिथी अबैत छथि तँ अपन हाथ सें भोजन बनाकें बहुत प्रेम सें भोजन करबैत। छीयनी जय मिथिला जय मैथिली ❤️

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