“अतिथि सत्कार”

रेखा झा।                             

#मिथिलामें
अतिथीसत्कार🌺
अतिथी त ओ भेलथि जिनकर अयबाक सूचना नहि होय ,मतलब कखनो कोनो समय में ओ आबि सकय छथि ,आ अहि मे निपुणता अछि जे ओहि समयके ध्यान राखैथ कोना सत्काक करी,
मिथिला त सत्कार लेल सदैव आगॉ रहल अहि में😇
पहिने जखन पाहुन सब अबैत छलाह त फोन आ सवारी के एहन सुविधा नहि रहै,आ गैस बिजली के सेहो अभाव मुदा ओ सत्कार तक्खन के समय जे होईत छल से आब कम भ रहल अछि,
पाहुन के आगमन के साथ घर में हुलिमालि के माहौल बनि जाईत छल ,तकर कारण ई जे कोनो त्रुटि नहि रहि जाईन
पाहुन के बाल्टी स पैर धोयलाक बाद चौकी पर बिछावनक व्यवस्था ,संग मे टॉर्च लालटेन तक राखल रहैत छल ,लोटा मे शीतल जल गीलासक साथ शोभैत छल सिरहाना तर,

आॉगन में भोजनक हेतु पहिने ठॉव पिढी कयल जाईत अछि फेर मिथीलाक पाककला के सुंदर प्रस्तुति दर्शन अबैत अछि
ओ सॉठल भात ,राहरिक दालि,सजमनि के भूजिया,भॉटा अदौड्क तीमन ,परोड,भिंडी भूजल,आलुकोबी दम ,कटहरके बड ,तिलकोर के तरूआ आमक चटनी ,अलग बाटी मे करकरायल घी,नैवेद्द देबय हेतु पात
तकर बाद दूध दही त निशचित आ जं बुझल रहत जे पाहुन ऐता त एतबा खानपान में मॉछ आ मधुर सेहो जुटैत अछि
कहबाक तातपर्य ई जे मिथिला मे अतिथी के भोग लगायल जाई छैन्हि कियाक त सब देवरूप मे हुनका मान करै छथि,
आब त समय बदलि गेल सूचना रहैत अछि सबके आगमन के आ साधन सेहो उपलब्ध मुदा मोन स लोक सब घटि गेल छथि जे कि उचित नहि संस्कार के निर्माण में
पहिने राति बिराति जे अतिथी पधारि जाथिन्ह त दादी सब के जं जारनि नहि चीरल रहैन त टाट में स बत्ती तक नोचि क आगि सुनगा लेथि आ सबतरहक व्यंजन समय के अनुसार बना लैथि मुदा कनिको खीझ आ तामस नहि होईन आ पाहुन के कोनो कमी नहि होईन से पूरा तैनात रहैत छलीह,
भोजनक बाद पानक बीरा,लौंग ईलायची सुपारी मतलब मुखशुद्धि त निश्चित,
मिथिला के परंपरा अखनो कायम अछि आ विश्वास सेहो अछि जे कायम रहत कियाक त हम सब जानि रहल छी जे “अतिथी देवो भवः”😊🙏🙏

पूर्वक लेख
बादक लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

6 + 8 =