“पाहुन”

बेबी झा।                                         

# मिथिला में अतिथि सत्कार #

अयं निज:परो वेति गणना लघु चेतसाम्
उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुंबकम् |
अर्थात – छोट सोच बला व्यक्तिक लेल ई हम्मर ओ दोसर के, उदार सोच बला व्यक्तिक लेल त संपूर्ण संसार हुनकर अतिथि वा कुटुंब छैन |

अप्पन मिथिलाक अतिथिक लेल लगभग एहने सोच देखल जाईत अछि |प्राचीन कालक अनेकों कथा हम सब सुनने छी जाहि में शंकराचार्यक प्रसंग स जुड़ल कथा एहि तरहे अछि –
शंकराचार्य सन्यासी स्वरूप एकटा द्वारि पर भोजनक इच्छा स पहुचलाह |गृह में एकटा स्री रहथिन हुनका समक्ष अप्पन इच्छा व्यक्त कयलथि |स्री इच्छा जानि फफकि -फफकि कय कानय लगलिह |संन्यासी हुनकर कनबाक प्रयोजन पुछलनि |स्री उत्तर देलखिन -हमरा घर में भोजनक योग्य कोनो वस्तु नहि अछि |अपनेक आतिथेयक सत्कार स बंचित रहि जायब से सोचि द्रवित छी |सन्यासी पून:कहलनि – अहां अपना घर में देखु शायद, किछु भेटि जाय? स्री के स्मरण भेलनि एकटा आंवला (धात्री) अछि आ ओ दौडि कय आनि संन्यासी के दय देलनि |ई की? हुनका गरहाज करिते लक्ष्मी धनक वर्षा करय लगली |आ स्त्री के दरिद्रता दूर भय गेलनि |
हमरा सबहक घर में अतिथिक आवागमण स वातावरण प्रफुल्लित भय जाईत अछि |नव -नव चादर, चमकैत भोजनक बर्तन आसन, ठाऊक संग रंग – बिरंगक भोजनक ओरियान में दम नहि धरैत अछि |ब्राह्मण भोजनक पवित्रता जेना भगवान भोग होई तुलसी पात स सुसज्जित |बरियातीक आतिथेयक सत्कारक त बाते नहि पुछु ? घरबैया अप्पन सुधि – बुधि बिसरि जाईत छथि |पीढ़ी पर पैर धो गमछा स पोछि माला स सुसज्जित गदगद करैत चेहरा |शरबत, चाह, जलपान ओहि पर भोजन |विदाईक समय पीअर रंग में रागल धोती आ पीअरका पन्नी में जनौ सुपारी साधारण बात अछि कतौ -कतौ त पांच टूक वस्रक संग उपहार सेहो देखल जाईत अछि |
एहि तरहे देखि त अप्पन मिथिला में अतिथिक सत्कारक लेल तन, मन , धन स तत्परता देखल जाईत अछि |कतबो सत्कारक बाद, एहि बातक चिन्ता रहैत अछि किछु त्रुटि त नहि भेल? बरियाती सब खुशी भय गेलाह? आई काल्हि फोनक सुबिधा भेला स सब स पहीने पुछल जाईत अछि |जमाय के त साक्षात विष्णु भगवानक उपाधि देल गेल अछि |चतुर्थीक भातक चारु कात तीरकोरक संग तीमन सचार बरक देखते बनैत अछि |
वस्तु बहुलता त जरूर भय गेर मुदा, भावक कमी जरूर देखना जाईत अछि |जकर जिम्मेदार अतिथि सेहो छथि |जमाय भनसा घर में, बरियाती आंगन में देखल जाईत छथि |एकरा लेल हमरा सबके कनी आतिथेयक मर्यादा के ध्यान रखनाई जरूरी अछि जाहि स मिथिलाक परंपरा कायम रहय 🙏🙏
जय मिथिला 🙏🙏🙏

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