सरस्वती पूजा २०२१ मे एकटा अनुपम मैथिली वन्दनाक उपहार

१० फरवरी २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!!

आबि गेल माँ शारदेक पूजनोत्सवक समय – सरस्वती पूजा २०२१ मे लेल जाउ नव उपहार
 
मौसम बदलि गेल, शीतलहरी समाप्त आ सूर्यदेव केर पुत्र शनिदेवक गृह मे प्रवेश यानि मकर संक्रान्ति सँ लगभग २५ दिनक अवधि सेहो समाप्त भेल, आइ २८म दिवस थिक। कवि प्रेम नारायण झा काल्हि एक सभा मे बड़ा नीक सँ वर्णन करैत बुझेलथि मिथिलाक ओ प्रसिद्ध कहावत – ईसी बीसी मकर पचीसी। माने, कठोर शीतलहरीक समय मकर संक्रान्ति सँ पच्चीस दिन धरि रहैत अछि। से सही मे। पच्चीस दिन धरिक हाल जुनि पुछू। विराटनगर मे सेहो अतिशय ठंढा पड़ल। लेकिन आब नीक रौदा होबय लागल अछि। मौसमक मिजाज बदलि गेल अछि। बसन्तक आगमनक सूचना दय देलक अछि। आर सरस्वती माताक पूजनोत्सव यानी बसन्त पंचमी सेहो लगिचा गेल अछि। आब मात्र ७ दिन बचल अछि। आइ जोड़िकय ७ दिन।
 
विद्यादायिनी माँ शारदा केर पूजा हम हिन्दू धर्मावलम्बी समाज लेल बहुत पैघ महत्वक दिवस होइत अछि। विद्याधनं सर्वधनं प्रधानं – एहि महामंत्र केर प्रबल मान्यताक धारण करयवला हम मैथिल (मिथिलावासी) सरस्वती माताक पूजा बाल्यकालहि सँ करैत रहैत छी। आर कोनो देवी-देवताक पूजा सँ बहुत बेसी महत्व सरस्वती पूजाक होइत अछि।
 
सरस्वती पूजा २०२१ केँ एकटा नव उपहार भेटल अछि। मत्सरी (रौतहट जिला, नेपाल) निवासी आदरणीय सुन्दर देव झा अपन सुन्दरतम् रचना ‘सरस्वती वन्दना’ केर अनुपम रेकर्डिंग श्री प्रवेश मल्लिक केर संगीत (धुन) मे करौलनि अछि। सब सँ पहिने शब्दक संयोजनक सहजता कतेक आकर्षक अछि से देखल जाउः
 
सरस्वती माता हे, विद्या करिअउ अहाँ दान
दान करू हे माता, दान करू हे…
सरस्वती माता हे……
 
हंस सवारी माँ के, वीणा धारी
गीता पुस्तक हाथ सम्हारी
सरस्वती माता हे…..
 
हम सब बालक छी अज्ञानी
पूजा के हम विधि न जानी
सरस्वती माता हे…..
 
माता-पिता के माँ घर हम त्यागल
अहीं के शरण मे छी हम लागल
सरस्वती माता हे….
 
गुरु ‘सुन्दर’ के विनय बनावल
अहीं के चरण हम शीष नवावल
सरस्वती माता हे….
 
आर, आब एकर रेकर्डिंग सुनू एहि लिंक परः
यूट्यूब पर एतय सुनू
 
अत्यन्त मनमोहक आ आकर्षक लागल हमरा।
 
एसकेजे प्रोडक्शन यानि सुजीत कुमार झा जे न्युयोर्क अमेरिका मे रहैत छथि, जे स्वयं सर्जक सुन्दर देव झाक सुपुत्र छथि, ओ पठेलनि मैसेन्जर पर आ सुनिते रोम-रोम रोमाञ्चित भऽ गेल। भगवती सरस्वतीक पूजनोत्सवक बेर, बसन्तक आगमन आ सब सँ बेसी जे विद्याधनक लेल हमर अपनहुँ मोनक लोभ आदि संवरण नहि कय सकलहुँ। अपने सब सँ शेयर करैत अपार हर्षक अनुभव कय रहल छी। जरूर अपन-अपन प्रतिक्रिया दय कृतज्ञ करब।
 
हरिः हरः!!
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