“आब नय रहलै वो गाम”

आब नै रहलै वो गाम,,,,,
ना आब नै रहलै वो गाम….

आब नै रहल घैल घैलसार,,
आब नै वो पाबैन तिहार….
आब ने कुम्हर फरय लेल चार,,
आब नै रंग बिरही अचार..

सबदिश पसरल पक्का मकान..
ना आब नै रहलै वॉ गाम.

ने नवकनियाँ ताने घोघ,,,
नै काकी के खिस्सा पिहानी…
बुदरुक सब के नै रहल धाख,,
नै माल जाल के रहल बथानी…

आब ने कक्का बैसयथ दलान,,
नै आब नै रहलै वो गाम……..

आब ने रहलै नाथ ने पगहा,,
नै आबै पंडा ल क बसहा..
आब ने वो तीमन तरकारी..
नै चिक्कस नै सुनब सोहारी..

नै बाबा के मुह मे जर्दा पान,,
नै आब नै रहलै वो गाम ….

पोखैर झाखैर भेल उदाम,,
आब नै ककरो पैर खराम…
कियो नै पाग पहिर जायथ बरियाती,,
नै आब कल जोड़ि क ठाढ सरियाती..

बिध बेभार सब भेल बूझु बिरान,,
नै आब नै रहलै वो गाम………….

नै कोंटा फरका अय ने ओरियानी,,,
धोती-कुर्ता के खेलक शेरबानी……
शर्बत साती कोका कोला,,,
नौआ नै घुमय टोला टोला….

सोइत भेल आब बूझु हजाम….
नै नै रहलै आब वो गाम…..

घूर के साती पजरय हीटर,,,
डिबिया साती बिजली मीटर….
मसहरी नै टांगब लेसब कछुआ,,
बौग्ली के जगह दफानलक बटुआ…..

आब नै दरबज्जा पर होई ओछान…..
नै आब नै रहलै वो गाम……

नवतुरिया स हम करि नेहोरा,,
मिथिला के जनि करु कुभेला……
मैथिली सन नै मिठ्गर बोली,,,
ननद भाऊज के हसी ठिठोली….
अपन गाम अपन पहचान,,,
सब मिल बचबियौ अपन गाम…..

कोशी कमला आऊर बलान,,,,
ई सब थीक मिथिला क गुमान….
ने छईठ ने बिसरू दियाबाती,,,
सोहर खेलौना सांझ पराती…

ई सब नै पायब आन ठाम….
सब मिल बचबीयौ अपन गाम..Malti Mishra✍✍

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