विद्यापति समारोह अमेरिका २०२० केर आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्नः कार्यक्रमक सम्पूर्ण रिपोर्ट

२१ दिसम्बर २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!!

अमेरिका मे रहनिहार मैथिलीभाषी द्वारा विद्यापति स्मृति समारोह – चिरकाल धरि सन्दर्भ मे राखय योग्य सफल कार्यक्रम लेल मैथिली जिन्दाबाद केर तरफ सँ बधाई संग प्रस्तुत अछि सम्पूर्ण रिपोर्टः

एन्टा – एसोसिएशन अफ नेपाली तराईयन इन अमेरिका – अमेरिका मे नेपालक तराईवासी लोकनिक संगठन द्वारा काल्हि २० दिसम्बर २०२० केँ सन्ध्याकाल पौने ८ बजे केर निर्धारित समय सँ लगभग ४ घन्टा धरि जूम प्रविधि केर मीटिंग पर दर्जनों कलाकार एवं विद्वान् साहित्यकार, सामाजिक अभियन्ता आ वक्ता लोकनिक संग आयोजित भेल। एहि आयोजन मे विद्यापति केर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान संग-संग वर्तमान समाज लेल प्रासंगिकता-उपयोगिता आदि पर विहंगम विमर्श प्रस्तुत कयल गेल छल। मैथिली भाषा एवं मैथिल पहिचान मे कतेको तरहक विसंगति आ जनमानस मे पसरल शंका-आशंका, शिक्षा मे मैथिलीक अवस्था, जातीय समन्वयक स्थान पर दिन ब दिन बढि रहल वैमनस्यता, राजनीतिक परिस्थिति आ आगामी जनगणना २०७८ विसं साल केर समय मातृभाषाक प्रविष्टिक मादे विद्वान् विचारक लोकनि अपन-अपन विचार रखलनि।

एहि आयोजनक अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार व अभियन्ता रामभरोस कापड़ि भ्रमर द्वारा कयल गेल छल। तहिना एहि गरिमामयी समारोहक संचालन एन्टा केर स्पोक्सपर्सन (प्रवक्ता) मोहन यादव कएने रहथि। कंचन यादव द्वारा भैरवि वन्दना सँ कार्यक्रम शुरू कयल गेल छल, तहिना संचालक मोहन यादव एहि कार्यक्रमक उद्देश्य मैथिली भाषाक वर्तमान आ उत्थान संग-संग मिथिला-मैथिलीक समग्र विकास मात्र उद्देश्य रहबाक बात मोन पाड़ैत सहभागी लोकनिक विशिष्ट परिचय करबैत रहलाह। एहि कार्यक्रम मे डा. राजेन्द्र विमल, रामनारायण देव, डा. गोपाल ठाकुर, दिनेश यादव, प्रेम विदेह ललन, देवेन्द्र मिश्र, रोशन जनकपुरी, रामरिझन यादव, श्यामसुन्दर यादव पथिक व गुरुदेव कामत संग नवतुरियाक कइएक सुपरिचित कलाकार लोकनिक उपस्थिति छल। तहिना आयोजक संस्था एन्टा केर प्रेसिडेन्ट डा. इन्द्रदेव साहु, इमीडिएट पास्ट प्रेसिडेन्ट विजय सिंह, इन्टरनेशनल वाइस प्रेसिडेन्ट अनिल द्विवेदी, सह-सचिव डा. विन्देश्वर साह, सलाहकार डा. राम कृष्ण साह, आदि अनेकों गणमान्य विद्वान्-शुभचिन्तक आ मैथिली-मिथिला लेल निरन्तर महत्वपूर्ण कार्य अमेरिका व यूएन जेहेन विशिष्ट मंच सँ पूरा कयनिहार लोकनिक अभूतपूर्व सहभागिता छल। नेपाली संचारकर्म सँ जुड़ल परशुराम भंडारी, गुणराज लुइटेल सहित आरो महत्वपूर्ण पत्रकार लोकनि जुड़ल रहथि। ई कार्यक्रम ई-नेपलीज पेज द्वारा फेसबुक पर सेहो लाइव कयल गेल छल जाहि पर मैथिली जिन्दाबादक सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरी प्रत्यक्ष दर्शक बनि सम्पूर्ण कार्यक्रमक ई रिपोर्ट तैयार करैत प्रस्तुत कयलनि अछि।

कार्यक्रम मे वक्तव्यक आरम्भ सभाध्यक्ष भ्रमर द्वारा विद्यापतिक जीवन, कृतित्व, व्यक्तित्व आ हुनकर साहित्यक खोज-अनुसंधान संग-संग भारत आ नेपाल केर विभिन्न स्थान पर हुनकर साहित्य पर आधुनिक समय मे लेखनी आदिक व्योरेवार चर्चा कयलनि। नेपाल मे विद्यापतिक १२ वर्षक कालखंड बितेबाक आर ताहि अवधि मे हुनका द्वारा कयल गेल कतेको रचना आ अन्य जीवनी प्रसंग पर सेहो ओ प्रकाश देलनि, एहि कालक्रम मे हुनकर रचना लिखनावली जाहि राज्य व्यवस्थाक संचालन पर लेखनी रहनि, दोसर श्रीमद्भागवत पर सेहो ओ नेपालहि मे लिखलनि – ई सब महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि नेपालहि सँ प्राप्त हेबाक जिकिर सेहो ओ कयलनि। एखनहुँ विद्यापति कृत् १५०० सँ ऊपर विद्यापति भनितायुक्त लेखनी राष्ट्रीय संग्रहालय नेपालहि मे उपलब्ध अछि जे विभिन्न लिपि मे छैक सेहो जानकारी करौलनि। विद्यापति केँ आयुर्वेदक ज्ञान सेहो छन्हि ताहि सब पर स्वयं भ्रमर आ प्रसिद्ध पुरातत्वविद् तारानन्द मिश्र द्वारा शोधालेख सब लिखल जेबाक जनतब देलाह। मल्लाकालीन नेपाल मे मैथिलीक प्रभाव कियैक सर्वोपरि रहल ताहि मे सेहो विद्यापति व अन्य मैथिली साहित्यकारक योगदान हेबाक जानकारी करौलनि। नेपाल मे विद्यापतिक नाम सँ राष्ट्रीय पुरस्कार देल जा रहल अछि मैथिली भाषा-साहित्यक कार्य कयनिहार केँ सेहो अद्भुत बात भेल, भारत मे एखन धरि एहि तरहक कोनो पुरस्कार नहि अछि सेहो ओ बतेलाह। विद्यापतिक रचना मे सहज भाव सँ विभिन्न विधाक लेखनी हेबाक बात बतबैत ओ कहला जे विद्यापतिक प्रभाव ओहिना अमरता नहि प्राप्त कएने अछि बल्कि हुनकर योगदान कालजयी रचनाक माध्यम सँ आइयो सजीवता संग भेटि रहल अछि। ओ अपन संबोधन केँ समेटैत अन्त मे विभिन्न देश, विभिन्न प्रान्त मे सक्रिय मैथिलीभाषाभाषी सँ एहि तरहक आयोजन करैत चर्चा केँ गतिशील बनेबाक आह्वान सेहो कयलाह।

संचारकर्मी परशुराम भंडारी अपन शुभेच्छा रखैत महाकविक जीवन सँ जुड़ल विभिन्न पक्ष केर टिपोट तैयार करबाक लक्ष्य रहबाक बात कहैत कार्यक्रम सफलता लेल शुभकामना देलनि। तहिना संचारकर्मी आ मोरंग जिला सँ शुरुए सँ पत्रकारिता कयनिहार गुणराज लुइटेल द्वारा एहि आयोजन मे उपस्थित सम्पूर्ण गणमान्य विद्वान् ओ कलाकार लोकनिक स्वागत करैत कहला जे महाकवि विद्यापति कोनो सीमा मे बान्हयवला व्यक्तित्व नहि भऽ सभक साझा धरोहर थिकाह। हुनक रचनाशीलता आ ओकर वैशिष्ट्यक प्रभाव बादक कवि-रचनाकार जाहि मे आदिकवि भानुभक्त सहित भारतहु केर कतेको कवि लोकनि हुनकर शैली केँ अपनबैत साहित्य, संस्कृति आ समग्र सभ्यताक संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्धन कयलनि ताहि पर प्रकाश देलनि। ओ कहला जे विद्यापतिक सम्बन्ध मे सम्पूर्ण संसार आ नया पीढी धरि पहुँचेबाक जरूरत अछि।

सोनाली कर्ण द्वारा विद्यापति रचित गीत ‘मोरा रे अंगनमा चनन केर गछिया’ केर सुमधुर गान प्रस्तुत कयलीह। एहि आयोजनक एक खासियत ई रहल जे किछु वक्तव्यक बीच मे कलाकार लोकनिक प्रस्तुति लेल गेल आर बिना कोनो ताम-झाम केवल विद्यापतिक गीत सुमधुर कंठ सँ प्रस्तुति लेल गेल। शालिनी कर्ण दिल्ली (भारत) सँ सहभागी भेल छलीह। कलाकार लोकनि सेहो काफी आह्लादित छलथि अपन प्रस्तुति दय केँ। विद्वान् रामनारायण देव द्वारा नेपाल केर राजधानी काठमांडू सँ २०२३ विसं साल सँ मैथिली आ विद्यापतिक स्मृति आरम्भक इतिहास बतौलनि। मैथिली साहित्य परिषदक स्थापना आ मैथिली भाषा मे संचारकर्म आ मैथिली गतिविधिक नेपाल मे रहल समग्र स्वरूप पर सेहो ओ चर्चा कयलाह। श्री देव द्वारा नेपालक वर्तमान राष्ट्रीय पुस्तकालय मे उपलब्ध विद्यापतिक रचना सब पर आगाँ आरो शोध पर ध्यान देल जेबाक जरूरत पर जोर देलाह। विलक्षण शोधक संग प्रस्तुत होयबाक आदी विद्वान् इतिहासकार रामनारायण देव आरो कतेको रास सम्बन्धित लेख-प्रकाशन निरन्तरता मे रहबाक बोध करबैत एन्टाक आगामी कार्यक्रम मे विस्तार सँ वर्णन करबाक आश्वासन देलाह।

वरिष्ठ साहित्यकार, गीतकार, कवि आ विद्वान् चिन्तक डा. राजेन्द्र विमल महाकविक मूल्यांकन सहस्राब्दि मे विरले कोनो कवि केँ प्राप्त भेल ताहि तरहक ऊँचाई पर कहलनि। हुनकर रचनाधर्मिताक प्रभावक्षेत्र उड़ीसा, बंगाल, नेपाल आ मिथिला त स्वाभाविके रूप सँ रहल सेहो ओ बतेलनि। तदोपरान्त हुनकर काव्यशैली मे रहल विशिष्टता केँ विभिन्न दोहाक विश्लेषण करैत पटल पर रखलाह। ओ एक राजकवि रहितो जाहि तरहक देव केर आ लोक केर वर्णन अपन रचना सभ मे करैत छथि से सब अति अनुपम आ विशिष्ट अछि। मैथिल समाज केँ ऐक्यबद्ध करबाक लेल सेहो ओ प्रबल इच्छा अपन रचना सँ स्पष्ट रूपे रखलनि। देसिल वयना – मातृभाषाक महत्व पर हुनकर दृष्टि त जगविदित अछिये। सूरदास, तुलसीदास आदि जेहेन महाकवि पर सेहो विद्यापतिक प्रभाव देखल जाइछ। संगहि अन्तर्राष्ट्रीय मैथिल समाज केर स्थापना लेल, भाषाक उन्नयन लेल सेहो गम्भीरतापूर्वक विचार करैत एहि सब तरहक आयोजन बेसी सँ बेसी हुअय – यैह आह्वान आ विद्यापतिक रचनाक ‘सहज सुमति वर दिअ हे गोसाउनि’ केर शुभकामना दैत, शिव आ गंगाक पर्यन्त प्राप्ति विद्यापति समान सब केँ हो सेहो ओ कहलखिन। तीन तिरहुतिया तेरह पाक के छोड़ि दी, विखंडनकारी वृत्ति केँ छोड़ी, अपन भाषा वा संस्कृति सँ हीनताबोधक शिकार होयब छोड़ि, मिथिला शीर्षविन्दु पर पहुँचत से निस्तुकी अछि – एहेन महान भावना डा. विमल रखलथि।

तनुजा चौरसिया द्वारा ‘जग मे जतय पहिले उगय सुरूजदेव कोसी कमला बलान रे, ओहि धरती पर घर मोरे भैया विद्यापतिजी के गाम रे’ – किसलय कृष्णक एहि कालजयी रचना केँ गाबिकय समस्त दर्शक श्रोताक मन मोहि लेलनि। तहिना अंजली पटेल, संतोष साह, अंजू यादव, इन्दिरा कर्ण आ स्वयं गुरुदेव कामत केर कतेको रास गीत सब बीच-बीच मे परोसल गेल छल। संचालक मोहन यादव केर बेहतरीन संचालन सब वक्ता आ गायक-कलाकार द्वारा अपन सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन कयल गेल से कहय मे कोनो अतिश्योक्ति नहि होयत।

विद्वान् वक्ता रामरिझन यादव द्वारा नेपाल मे आगामी जनगणना जे २०७८ विसं साल केर वैसाख २५ गते सँ आरम्भ होइत जेठ ६ गते धरि चलबाक अछि ताहि मे मैथिली भाषाभाषी द्वारा अपन भाषा मैथिली लिखेबाक विषय पर विस्तार सँ सम्बोधन करैत कहल गेल जे चूँकि एहि देश मे नेपाली पछाति सब सँ अधिक बाजल जायवला भाषा मैथिली थिक, लेकिन किछु शासक वर्गक लोक जानि-बुझिकय मैथिली केँ कमजोर करबाक षड्यन्त्र कयल जा रहल अछि जाहि मे खुद मैथिली भाषी गोटेक अभियन्ता लोकनि केँ परिचालित कयल गेल अछि आर ई लोकनि समाज केँ बरगला रहल छथि। केकरो जातिक नाम पर फरक त केकरो अलग शैलीक बोली पर फराक करबाक एक तरहक कुचक्री अभियान चलाओल जा रहल अछि। एहि तरहक कुचक्र केँ तोड़िकय सब कियो एकजूट भावना सँ साविक समय सँ चलैत आबि रहल सम्पन्न आ समृद्ध भाषा मैथिली प्रति अपन स्वामित्व छोड़ि एम्हर-ओम्हर एकदम नहि भटकथि से जरूरी छैक। एहि लेल हमहुँ सब जतय-जतय भाषा, संस्कृति आ समाज लेल सक्रिय छी, से सब कियो अपना-अपना स्तर सँ लोक केँ सजग बनबैत जनगणना मे अपन मातृभाषा मैथिली प्रति सचेत रहिकय लिखायब नहि त फेर घुमा-फिराकय एक्के भाषा केँ मजबूत स्थिति बनल रहबाक मानसिकता पूर होयत, हम-अहाँ पाछू पड़ि जायब।

तहिना मैथिली भाषा-साहित्य मे अनेकों तरहक योगदान कयनिहार चर्चित अभियानी-साहित्यकार आ शिक्षाविद् देवेन्द्र मिश्र द्वारा मैथिली पठन-पाठन आ व्यवहार मे आबि रहल जनसमस्या सम्बन्धी विषय पर विज्ञ विचार रखलाह। संचालक मोहन यादव द्वारा कहल गेल विषय जे मैथिली लेखन मे काफी समस्या, पढइ मे सेहो समस्या – जखन कि बाजय लेल त सब अपन भाषा बजिते अछि – ताहि पर ओ कहलखिन जे एकर एक शब्द मे उत्तर छैक जे मैथिली केँ पढाई मे लागू नहि कयल गेलैक, यैह कारण लोक केँ समस्या होइत छैक। संसारक कोनो भाषा जेकर पढाइ नहि करायल जाइत छैक तेकरा पढय आ लिखय मे समस्या होइते छैक। एकर कय टा उदाहरण देलखिन ओ। दक्षिण भारत मे साधारण अनपढ टैक्सी ड्राइवर सेहो अंग्रेजी बाजि लैत छैक, मुदा चूँकि ओ पढाइ नहि कएने छैक तेँ ओकरा सँ अंग्रेजी लिखल आ पढल नहि होइत छैक। ओ अपनहु सँ नेपाली मे बच्चा मे कयल पढाइ ‘पापा ल्याए सोली’ केर अर्थ आइ धरि नहि बुझि पेबाक बात कहला जखन कि ‘कुखरी काँ’ ककहरा नेपाली मे पढिते समय मे कंठस्थ कय लेबाक तर्क सेहो ओ देलाह। अर्थात् मैथिली जा धरि विधिवत् कक्षा (विद्यालय) मे पढाइ नहि हेतैक ता धरि एकरा पढय-लिखय मे लोक केँ समस्या हेब्बे करतैक। तदोपरान्त ओ मैथिली विरूद्ध लोक मे भ्रम आ टूटबाक षड्यन्त्र केर शिकार होयब कहलनि। काफी रास तर्कपूर्ण उदाहरणक संग बोली आ भाषा बीच केना तुलनात्मक ढंग सँ समीक्षा हेबाक चाही ताहि प्रति समाज मे सचेतनाक कमी केर विन्दु पर सभाक ध्यानाकर्षण करौलनि।

भाषा विज्ञान अनुसार कोनो भाषा निर्धारित कयल जाइत छैक, तेँ मैथिलीक बोली सब केँ आन-आन भाषाक नाम देनाय ई भाषा विज्ञान केर दृष्टि सँ नहि बल्कि षड्यन्त्रक कारण मात्र भऽ रहल अछि। महाकवि विद्यापतिक सम्बन्ध मे सेहो ओ सब सँ पहिल आन्दोलनकारी कहैत संस्कृत सँ अपन जन-जन द्वारा बाजल जायवला बोलीरूपी भाषा मे साहित्यिक काज केँ गतिशील बनौलनि ई सब तथ्य सोझाँ रखलनि। आइ समाज मे विद्यापतिक साहित्यक औचित्य सँ परिचित हेबाक जरूरत सेहो ओ इंगित कयलनि। मैथिली पर लगायल जा रहल आरोप जे ई आभिजात्य वर्गक भाषा थिक तेकरा ओ विद्यापतिक रचना मे प्रयुक्त शब्द आ बोल केँ रखैत ई सिद्ध कयलनि जे मैथिली वास्तव मे केकर भाषा थिक – आरोप कतेक निराधार अछि से स्वतः सिद्ध होइत अछि आ देखबैत अछि जे षड्यन्त्रकारी केवल हमरा सब केँ कमजोर करबाक लेल एहि तरहक भ्रम पसारि रहल अछि। एहि भ्रम केँ तोड़बाक जरूरत अछि। सब केँ एकजुट बनबाक जरूरी अछि। मैथिलीक पढाइ होयब बहुत आवश्यक अछि। ताहि लेल ओ आह्वान कयलनि। विदित हो जे देवेन्द्र मिश्र मैथिली मे नेपालक बोली-शैली आ ध्वनि विज्ञान आदिक आधार पर एकटा व्याकरण सेहो लिखबाक क्रम मे छथि ताहि पर सेहो चर्चा भेल। पुनः संचालक मोहन यादव द्वारा कयल गेल गहींर अनुसन्धान-अध्ययन सँ वक्ता-संचालक बीच नीक तुकबन्दीक प्रस्तुति एहि कार्यक्रमक सफलता मे चारि चाँद लगबैत बुझायल। वक्ता मिश्र व्याकरणक विभिन्न कृति आ विद्वान् लोकनिक चर्चा करैत अपन काजक संछिप्त व्योरा रखलाह। व्याकरण लोक केँ जहिना बजैत छैक तेकरा लिखतैक कोना – पढतैक कोना, यैह सिखबैत छैक आर से हमर व्याकरण लोक केँ सामग्री आ शिक्षा जुटेतैक – ईहो भाव श्री मिश्र एहि कार्यक्रम मे रखलाह।

जनकपुर सँ सहभागी विद्वान् साहित्यकार आ विचारक वर्गक चर्चित विद्वान् रोशन जनकपुरी सेहो अपन विचार रखलाह आर विद्यापतिक देवत्वीकरण करबाक बदला हुनक योगदान सँ समाज केँ बेसी सँ बेसी लाभ उठेबाक विषय पर प्रकाश देलनि। विद्यापतिक पदावली मात्र पर हुनक महिमामंडन उचित नहि बल्कि हुनकर समग्र योगदान केर वर्तमान प्रासंगिकता आ मानव समाज लेल कि सन्देश सब अछि ताहि सम्बन्ध लोक केँ आरो जानब-बुझब आ जीवन मे अनुकरण करब आवश्यक अछि। विद्यापति केँ आजुक सन्दर्भ मुताबिक – वर्तमान समकालीनता मे बुझला सँ समाजक पैघ हित हेतैक ओ विचार रखलन्हि। तहिना प्रदेश नम्बर २ मे भाषाक स्थिति पर रामरिझन यादव द्वारा सत्तादल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी पर लगायल गेल आरोप केँ हुनकहु दल जनता समाजवादी पार्टी द्वारा मगही केँ सहयोग करबाक स्थिति स्पष्ट कयलनि। हुनकर तर्क मुताबिक मैथिलीक अपनहि अन्तर्विरोधक कारण आ मैथिली मे लिखल जा रहल लेख-रचना व शैली अथवा उपलब्ध लेख्य सामग्री मे सभक बोली केँ आ सहज शैली केँ लागू नहि कयल जेबाक कारण ‘मगही’ वा अन्य बोली सब अपन स्थान ताकि रहलैक अछि। एहि सब समस्या केँ दूर करबाक लेल कोनो स्पष्ट रूपरेखा त नहि लेकिन थोड़-बहुत उपाय पर सेहो ओ चर्चा कयलाह। मैथिलीक संख्या आगामी जनगणना मे घटि जेबाक स्थिति छैक आर से चिन्ताजनक छैक, ताहि लेल सब कियो आरो बेसी सजग बनिकय समाजक लोक केँ जागृत करी से आवश्यकता पर ओ जोर देलनि।

पुनः गुरुदेव कामत समान दिग्गज गायक आ शास्त्रीय संगीतक पुरोधा ज्ञाता द्वारा एकटा सुन्दर जनचेतनामूलक गीत केर प्रस्तुति भेल जाहि मे मिथिलाक वास्तविक स्वरूप आ समस्त जन-जन मे एकजुटताक आह्वान निहित छल, एकर सराहना सब कियो कयलन्हि।

विद्यापति पुरस्कार कोष केर सदस्या श्रीमती आभासेतु सिंह द्वारा वक्तव्य रखैत कहल गेल जे मिथिला आ मैथिली सँ प्रेमक कारण स्वास्थ्य अवस्था नीक नहियो रहैत एहि कार्यक्रम मे जुड़लीह, संगहि ओ अमेरिका सँ कयल जा रहल एहि प्रयास केर सराहना कयलीह। मैथिली भाषा पर जाहि तरहक राजनीति कयल जा रहल अछि तेकरा तोड़ि आयोजक लोकनि अपन भाषा स्थापित करबाक लेल कोन तरहें आन्दोलनरत छथि, ताहि लेल ई सब कार्यक्रम नीक परिणाम आनत, ओ उद्गार व्यक्त कयलीह। महाकवि विद्यापतिक जन्मस्थल पर खूब चर्चा होइछ लेकिन हुनकर समाधि स्थल पर कम चर्चा होइछ, तेँ ओहि पर ओ अपन विचार रखलीह। ओ कहली जे विद्यापति अपन उगना केँ तकैत-तकैक भारतक बिहार केर समस्तीपुर जिलाक वाजितपुर पहुँचि जाइत छथि, ओतय एकटा मन्दिर छलैक, ओ ओत्तहि बैसि जाइत छथि आर ओतय सँ १२ किलोमीटर मात्र गंगाजी छथिन आर हमर जन्म एहि स्थान पर भेल अछि – ताहि सँ हम बहुत भाग्यशाली छी। विद्यापति कोष केर स्थापना केँ सराहना करैत ओ एकर विधान नेपाली मे होयबाक विषय उठेलीह आ कहली जे विधान मे एकर कामकाज सेहो नेपाली भाषा मे करबाक विन्दु पर एतराज जतेलीह आ स्वयं एहि लेल प्रयासरत रहबाक बात कहली। मैथिली भाषा पर राजनीति नहि कय भाषा लेल राजनीति कयल जेबाक आवश्यकता पर सेहो ओ प्रकाश देलथि। पार्टीगत आधार पर भाषा के राजनीति नहि कय सब दल भाषा लेल एकजुट भऽ भाषा केँ बढेबाक लेल आगू आबथि आ प्रदेश २ तथा प्रदेश १ मे राजभाषाक रूप मे मैथिली केँ स्थापित करबाक आह्वान कयलीह। ई काज सब दल मिलियेकय राजनीतिक आन्दोलन करत तखनहि संभव अछि ओ स्पष्ट धारणा रखलीह।

पुनः साहित्याकार, पत्रकार, अनुसन्धानकर्ता आ मैथिली-मिथिला वास्ते अभियान संचालक दिग्गज स्रष्टा दिनेश यादव द्वारा एन्टा केँ एहि तरहक आयोजन लेल आ हुनका विद्यापति पर अपन विचार रखबाक लेल धन्यवाद देलनि। अपन परिचय दैत अध्ययन-अनुसन्धान संग साहित्यिक रचना करबाक रूप मे मैथिली लेल हिन्दी पछाति काज करबाक बात बतेलाह। ओ अपन अध्ययनक आधार पर संचालक मोहन यादवक प्रश्नक उत्तर दैत अपन विचार रखलाह। महाकवि विद्यापति द्वारा तत्कालीन अवहट्ट भाषा मे रचना करबाक कारण हुनकर विरोध आ बहिष्कारक अवस्था सेहो बनबाक आख्यान रखलथि। आधुनिक युग मे विद्यापति केँ वस्तुवादी दृष्टि सँ बुझबाक काज कयल जा रहल छैक ताहि पर सभाक ध्यानाकर्षण करैत मैथिली भाषाक समकालीन साहित्यकार लोकनि केँ विद्यापति प्रति सजग बनिकय लेखन लेल आह्वान कयलनि। ओ कहला जे विद्यापति पर लिखल साहित्य सब एक्के टा धारा पर आधारित अछि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण आ विषय वस्तु केँ समेटिकय इतिहास लिखबाक जरूरत पर ओ बल देलनि। केवल ओढन, पहिरन, जीवनशैली आदिक बात मात्र करब आ हुनकर आजीवन योगदान केँ समाजक सब वर्ग आ व्यक्ति केँ रूचि प्रदान करयवला दृष्टिकोण सँ प्रकाश नहि पाड़ब, ई गलत अछि ओ कहला।

विद्यापति ऊपर कार्य करबाक समय एकल जातीय वर्चस्व आ स्वयं विद्यापति केँ जातीय पहिचानक सीमा सँ बान्हब, ई सब नहि हेबाक चाही। बल्कि सब केँ जोड़बाक आ सब केँ एहि लेल गर्वबोध होयबाक दिशा मे ओ सभाक ध्यानाकर्षण कयलनि। काव्य साहित्य मे विद्यापति सँ पहिने सेहो कतेको सृजनकर्मी भेलाह जिनकर विषय मे मिथिला मे श्रव्य-साहित्य उपलब्ध भेटैछ, लेकिन ओ सब अब्राह्मण होयबाक कारण हुनका सभक सम्बन्ध मे कम लिखल-पढल जेबाक सवाल पर सेहो ओ ध्यान आकृष्ट कयलथि। ओ खुसरो केर उदाहरण दैत हुनक रचना मैथिली सँ अत्यधिक मेल खेबाक तर्क देलनि लेकिन मैथिली साहित्य मे लेख्य सामग्री मे हुनकर चर्चा कम भेल से कहैत ‘ई नहि होबाक चाही’ केर मनोबोध प्रकट कयलनि। देखल जाय तँ दिनेश यादवक उक्ति सँ ‘ई नहि होबाक चाही’ केर शीर्षक मे मैथिली लेल ध्येय कतेको विन्दु प्राप्त होइछ जाहि पर मैथिली सरोकारवाला आ लेखक-सर्जक, सामाजिक चिन्तक आदि केँ ध्यान देनाय आवश्यक छन्हि। अन्त मे ओ कहला जे विद्यापतिक ‘देसिल वयना सब जन मिट्ठा, तेँ तैसओं जंपओं अवहट्ठा’ मे अवहट्ट पर लोकक कम ध्यान गेनाय सेहो नहि होबक चाही आ आमजन द्वारा प्रयुक्त बोली-भाषा व अपभ्रंश केँ सम्मान दैत मूलधाराक साहित्य मे समेटब जरूरी छैक। भाषा-साहित्य आ काव्यक उद्देश्य जन-जन केँ जोड़बाक होबक चाही, एहि पर सभक ध्यान जाय से पुनः-पुनः ओ अपील कयलनि।

कार्यक्रम मे एन्टा प्रेसिडेन्ट डा. इन्द्रदेव साहु संग एन्टाक एडवाइजरी कमिटीक डा. रामकृष्ण साह, डा. मृगेन्द्र व अन्य विशिष्ट व्यक्तित्व सब सेहो उपस्थित छलाह जे वक्ता लोकनिक वक्तव्य सुनिकय बहुत रास स्थिति स्पष्ट हेबाक प्रतिक्रिया दैत रहलाह। संगहि हुनका लोकनि द्वारा अमेरिका, यूएन आ आरहु विभिन्न क्षेत्र मे निज भाषा मैथिली लेल कयल जा रहल प्रयास केर सम्बन्ध मे सेहो प्रकाश दैत रहल छलाह। डा. इन्द्रदेव साहु द्वारा संचालक मोहनजी प्रति आभारक शब्द रखैत कार्यक्रम मे सहभागी एक सँ बढिकय एक स्रष्टा सभक उपस्थिति प्रति आभारक शब्द सेहो राखल गेल। एन्टा द्वारा आयोजित महाकवि कोकिल विद्यापति समारोह काफी दूरगामी हेबाक भाव रखलथि। ई कार्यक्रम विश्व भरि मे करोड़ों मैथिलीभाषी धरि विभिन्न मीडिया माध्यम सँ पहुँचबाक आ एकर दूरगामी लाभ भेटबाक अपेक्षा रखलथि। आगामी समय मे एन्टा केँ नीक मार्गदर्शन भेटत आर आपसी विमर्श सँ भविष्यक योजना विकासक संग क्रियान्वयन मे सेहो उल्लेख्य सहयोग करत ओ वचनबद्धता प्रकट कयलाह। मैथिली जिन्दाबाद सँ बातचीत मे पूर्व अध्यक्ष विजय सिंह ईहो जनतब करौने छलाह जे एन्टा निरन्तर अपन भाषा केँ वैश्विक परिवेश मे चिन्हेबाक संग साहित्यक प्रचार-प्रसार लेल प्रकाशन आ अनुवाद जेहेन महत्वपूर्ण कार्य सेहो करैत अछि। विदित हो जे श्री सिंह केर अध्यक्षकाल मे महाकवि विद्यापतिक रचना ‘पुरुषपरीक्षा’ केर नेपाली भाषा मे अनुवाद आ प्रकाशन कयल गेल छल।

मैथिली साहित्यकार सभाक सभापाल आ विद्वान् – कवि – साहित्यकार – शिक्षाविद् प्रेम विदेह ललन सेहो जनकपुर सँ एहि कार्यक्रम मे सहभागिता देलथि। ओ आशुकविक रूप मे कार्यक्रम पर आधारित अपन तत्काल तैयार कयल कविताक वाचन कयलथि। आकाशीय मंच पर उपस्थित जे नाम – सब केँ हमर प्रणाम कहि ओ अपन शब्द-भाव-उद्गार महाकवि विद्यापतिक संग-संग आयोजक संस्था एन्टा पर सेहो आभारक शब्द रखलथि। करीब-करीब ३ दशक सँ मैथिली भाषा-साहित्य लेल सेवारत हेबाक बात आ ९ वर्ष सँ संचालित अपन संस्थाक सम्बन्ध मे जानकारी करबैत ओकर विधान मैथिली मे लड़िकय लेबाक बात कहला आ आइयो धरि औडिट रिपोर्ट मैथिली मे रखबाक प्रतिबद्धता पर बात कहलथि। पाठ्यक्रम मे सरल भाषाक प्रयोग पर शिक्षाविद् लोकनिक देल गेल सुझाव पर विज्ञ समिति द्वारा मान्यता नहि देबाक विडंबना आ एकर आवश्यकता रहबाक विन्दु पर सभा केँ जानकारी करौलनि।

एन्टा एडवाइजर डा. रामकृष्ण साह ‘अहाँक इच्छा हेतैक त सब किछु भऽ जायत, नहि इच्छा होयत त किछु नहि होयत’ एहि भावना केँ रखैत अपन एक कृति मैथिली मे ३० वर्ष पूर्व ‘पोषण’ नाम सँ करबाक आर ताहि पर गैर-मैथिलक समर्थनक बावजूद अपनहि मैथिली स्वजन द्वारा विरोधक बात मोन पाड़लथि, ओ कहलथि जे मैथिली पाछू पड़बाक कारण गैर-मैथिल नहि बल्कि स्वयं हम सब मैथिले छी। अपन सोचबाक सामर्थ्य केँ वृहत् बनेबाक आ विश्व परिवेशक गति संग डेग मिलेबाक जरूरत पर ओ बल देलनि। संगहि यूएन स्तर पर मैथिली मे कार्यक्रम करबाक अपन योजना आ बुद्धा टेलिविजन व अन्यान्य उपक्रम पर प्रकाश देलनि। सब कियो मिलिकय एहि तरहें आगू बढबाक आवश्यकता पर जोर देलनि। मैथिलीभाषी मे रहल ईगो प्राब्लम आ पैसे केँ सबसँ बेसी महत्व देबाक कमजोरी सेहो ओ उजागर करैत जातीय आधारित ‘ई मैथिली हय’ – ‘ई मैथिली नय हय’ जेहेन झगड़ा आ आपसी फूट केर स्थिति समाप्त कय एकजुट बनिकय विकास आ समृद्धि दिश चली हम सब। डा. साह द्वारा स्वयं मुख्यमंत्री आ अन्य-अन्य स्तर पर अपन भाषा, संस्कृति आ समाज लेल कोन तरहें बढबाक योजना बनबितो अपनहि लोक सँ असहयोगक कारण पाछू पड़ल छी से स्थिति पर सभक ध्यानाकर्षण करैत “अपन मिथिला” नामक मंच सँ सब केँ जुड़बाक आ सब केँ अपन राय-सलाह देबाक आह्वान कयलनि। ओ कहलनि जे भले हम ब्राह्मण जेकाँ नहि बजैत होइ लेकिन हमहुँ मैथिली बजैत छी से हमरा गर्व अछि। ई कोनो जरूरी नहि जे सभक बोली एक रंगक हेतैक, बोलीक फर्क मे केकरो अलग-अलग भाषा बजबाक भाषाभाषी हेबाक बात बिल्कुल नहि करी। ओ इन्टरनेशनल बुद्धा टीवी आ ग्लोबल टीवी केर संचालक हेबाक नाते एहि पर आबि अपन कार्यक्रम रखबाक लेल सेहो आमजन आ कलाकार-विद्वान सब सँ अपील कयलनि। एहि लेल कोनो तरहक सहयोग किनको चाही ताहि लेल ओ उपलब्ध रहता से वचनबद्धता जनौलनि।

कार्यक्रमक अन्त मे सभाक अध्यक्षता कय रहला विद्वान्-स्रष्टा आ नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्य प्राज्ञ राम भरोस कापड़ि भ्रमर मैथिली आ मिथिला पर राखल गेल विभिन्न वक्ताक विचार पर अपन नीक समीक्षा रखैत सभा केँ दोबारा संबोधन कयलनि। कार्यक्रमक उपलब्धि केँ डकुमेन्टेड करबाक लेल प्रकाशन पर जोर दैत ओ कहलनि जे साल मे कम सँ कम एकटा स्मारिकाक प्रकाशन जरूर कयल जाय, एकटा पुरस्कार सेहो मैथिली भाषा-साहित्य या समाज आदि लेल योगदान देनिहार केँ सालाना जरूर देल जाय जाहि सँ भविष्य मे आरो लोक केँ कार्य करबाक प्रेरणा भेटतनि आर तेसर जे विद्यापतिक संगहि हुनका सँ पूर्वक रचनाकार आदिक चर्चा यथा डाक वचन व अन्य पर सेहो काज हो एकर प्रयास कयल जेबाक चाही। विद्यापति कोष केर विधान नेपाली मे कियैक भेलैक या एहि मे तत्कालीन अवस्था मे कि समस्या सब भेलैक ताहि पर प्रकाश दैत नेपाल मे नेपाली भाषा मात्र कामकाजी भाषा (सरकारी भाषा) हेबाक कारण बाध्यतावश विधान आ ओकर कामकाज नेपाली मे करबाक अवस्था रहबाक स्पष्टीकरण देलाह। डा. बाबूराम भट्टराई तत्कालीन नेपाल प्रधानमंत्री द्वारा मैथिली भाषाक विकास-संरक्षणार्थ प्रदत्त सरकारी राशि केँ व्यवस्थापन मे ताहि समय एहि तरहक स्थिति केना भेल तेकर निजी अनुभव ओ सुनौलनि। नेपाल सरकार केर संस्था हेबाक कारण ओतय आन भाषाक प्रयोग सम्भव नहि छल। विधान मे बहुत रास व्यवस्था नहियो रहला पर हाकिमक तजवीज सँ सेहो निर्णय होइत रहबाक उदाहरण ओ देलनि। पाठ्यक्रम केर सम्बन्ध मे कयल गेल चर्चाक मादे ओ बतेलाह जे नेपाल मे कक्षा १ सँ एमए धरि मैथिलीक पढाइ नेपाल मे उपलब्ध छैक, लेकिन हम मैथिलीभाषी स्वयं कतेक अपन भाषा पढबाक दिशा मे जागरुक छी ई आत्ममंथन करयवला बात थिकैक। ई विडंबना थिकैक आ हमरा सभक अपन कमजोरी थिक। सरकार द्वारा देल व्यवस्थाक बादहु हम-अहाँ एहि मामिला मे बहुत पाछाँ छी आर एहि पर सब कियो जागथि से ओ स्पष्ट कयलाह।

सभाध्यक्ष रामभरोस कापड़ि भ्रमर सरकारी कामकाजक भाषाक सम्बन्ध मे सेहो प्रदेश सरकार आ प्रदेशक प्रतिनिधिसभा मैथिलीक कारण निर्णय नहि कय रहल छथि ई आरोप लगबैत वास्तव मे कि हेबाक चाही से बुझाकय बतेलनि। संविधान आ तथ्यांक केर आधार पर प्रदेश २ मे मैथिली केँ सरकारी कामकाजक भाषा हेबाके चाही, लेकिन तैयो निर्णय नहि होयब दुखद अछि। भाषा आयोग सिफारिश करबाक मात्र भरोसा दैत अछि, आब कहिया करत एकर गारन्टी नेपाल मे करब मुश्किल अछि। भाषाक सरलीकरण पर सेहो कि दुविधा अछि, सुझाव देलाक बादहु एहि मे एखन धरि कोनो परिवर्तन नहि भऽ रहल अछि ताहू पर ओ सभा केँ जनतब सब देलनि। पाठ्यक्रमक सिद्धान्त जे बहुसंख्यक द्वारा बाजल जायवला भाषाक आधार पर सरलीकृत कयल जेबाक कुल ४ गोटेक समिति मे सरलीकरण कयल सामग्री देलाक बादो अन्ततोगत्वा वैह कयल गेलैक जे अधिकृत लोक केँ स्वयं करबाक छलैक। एहि बात पर श्री भ्रमर केर दावा रहनि जे एहि समिति मे हुनका रखितो सुझाव केर अनुकरण नहि जेबाक विषय पर मुकदमा तक करबाक प्रतिक्रिया देबय पड़लनि। स्पष्टतः मैथिलीभाषी केँ जानिकय कमजोर करबाक षड्यन्त्र ऊपरे सँ छैक एकरा बुझब आवश्यक छैक। आपसी विमति केँ सुलझबैत ओ कहलखिन जे व्यक्तिगत स्तर पर लोक मे दोष छैक लेकिन समष्टिगत रूप मे जातीयता वा अन्य कोनो तरहक विन्दु समस्या नहि थिकैक। श्री भ्रमर पूर्व वक्ता लोकनिक विशेष ध्यानाकर्षण करैत स्पष्ट कयलाह जे जातिवादक आधार पर कोनो समस्या वास्तव मे कतहु नहि अछि, ई एकटा भ्रम मात्र थिक। व्यक्तिगत ईर्ष्या आ द्वेष केर भावना निश्चित अपन-अपन अनुभव अनुसार लोक मे व्याप्त अछि, परञ्च समष्टिगत आधार पर मैथिली केँ पाछू करबाक ई कोनो मुद्दा नहि थिक। यथार्थतः सब मे अपन भाषा लेल भावना छैक। सब कियो एहि दिशा मे कार्य करैत अछि।

श्री भ्रमर द्वारा एन्टा आ समस्त आयोजक लोकनि लेल काफी रास सुझाव दैत अपन अध्यक्षीय संबोधन केँ राखल गेल छल जेकर सराहना सब कियो कयलनि। आगामी समय मे अमेरिका मे रहनिहार व्यक्तित्व लोकनि सेहो अपन विचार रखता आर दुइतर्फी अन्तर्क्रिया होइ से अपेक्षा रखलाह जाहि पर आयोजक संस्था एन्टा हुनका आश्वासन देलखिन जे आगाँ एहि तरहक आयोजन निश्चित कयल जायत।

संचालक मोहन यादव द्वारा बहुत गम्भीरता सँ एहि कार्यक्रमक संचालन भेल छल। ओ बेर-बेर छूटि रहल वक्ता श्यामसुन्दर यादव पथिक केँ हुनकर वक्तव्य ससमय नहि लय सकबाक लेल खेद सेहो जतेलनि। आगामी समय हुनकर वक्तव्य विशेष रूप सँ लेबाक भावना रखलथि। एन्टाक इन्टरनेशनल वाइस प्रेसिडेन्ट डा. अनिल द्विवेदी द्वारा सब वक्ता प्रति आभार व्यक्त कयल गेल छल। ओ अपन प्रतिक्रिया दैत कहलखिन जे आजुक कार्यक्रम हुनका काफी नीक लगलनि, एहि मे आयल विषय-वस्तु आ निजताक महत्व नहि केवल हुनके बल्कि एहि कार्यक्रम सँ जुड़ल समस्त श्रोता-दर्शक केँ प्रेरणा देने हेतनि से विश्वास जतेलनि। तदोपरान्त वरिष्ठ गायक गुरुदेव कामत पुनः विद्यापतिक एक सुमधुर रचना – चारि पहर राति रंगहि गँवाओल, अब कहु भेल भिनसार’ केर भावपूर्ण प्रस्तुति दैत समस्त श्रोता केँ मंत्रमुग्ध आ विभोर कय देने छलाह। पुनः आयोजक संस्थाक अध्यक्ष डा. इन्द्रदेव साहु द्वारा संस्थाक जिम्मेदारी आत्मसात करैत आजुक समारोह मे आयल भिन्न-भिन्न विषय अनुसार संस्थाक आन्तरिक बैसार मे मंथन करैत सुझाव अनुरूप कार्यक्रम योजना व क्रियान्वयन केर कार्य निश्चित रूप सँ कयल जेबाक आश्वासन देलनि। संगहि सब केँ एहि आयोजनक सफलता लेल धन्यवाद आ आभार व्यक्त करैत नेपाल मे आगामी समय मे पोलिटिकल इनस्टैबिलिटी प्रति सजग रहिकय सब कियो मिलिकय आगू बढबाक आह्वान कयलनि। समाजक विकास केर सूत्र एकजुटता मात्र होइत छैक से सन्देशक संग अध्यक्ष – आयोजक अपन धन्यवादक शब्द रखलथि। संचालक मोहनजी सेहो अन्त मे कवि सम्मेलन केँ मासिक व अर्ध-मासिक स्तर पर संचालित करबाक लेल आ समय-समय पर आरो-आरो विषय सब पर सेमिनार (वेबिनार) करबाक वचन दैत कार्यक्रम केर समापनक घोषणा कयलथि।

मैथिली जिन्दाबाद केर सम्पादक (प्रवीण नारायण चौधरी) एहि कार्यक्रम केँ पूरा देखलथि आर एकरा डकुमेन्ट फौर्म मे चिरकाल धरि संरक्षित रखबाक लेल एक-एक वक्ता आ प्रस्तोताक लगभग सब बात केँ समेटबाक प्रयास करैत ई समाचार प्रस्तुत कयलनि अछि। एहि मे यदि किनको कोनो बात छूटि गेल होयत ओकरो बाद मे जोड़िकय समुचित स्मारिका मे ई लेख स्थान पाओत से ओ आग्रह करैत छथि। निश्चित एहि तरहक आयोजनक बड पैघ महत्व छैक आर जातीय आधार पर चिन्तनक कोनो औचित्य आजुक युग मे नहि रहि गेल छैक से सब केँ मनन करय लेल ई सम्पूर्ण रिपोर्ट केँ बेर-बेर आ गम्भीरतापूर्वक पढबाक-गुनबाक आग्रह सेहो कयलनि अछि। 

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