सौराठ सभागाछी मे आब भव्य सभा लागत एकर गारन्टी अछि – २०२१ देत पैघ प्रमाण

पैघ खुशखबरी – सौराठ सभागाछीक पुनरूद्धार कार्य गति पकड़लक
 
विगत किछु समय सँ ऐतिहासिक सौराठ सभागाछी विकास समितिक सचिव आदरणीय डा. शेखर चन्द्र मिश्र काफी रास शुभ-खबरि (अपडेट्स) सब साझा करैत आबि रहला अछि। डा. मिश्र संग सहकार्य करबाक दिशा मे ‘दहेज मुक्त मिथिला’ अभियान २०११ सँ कयलक। २०११ मे पूरे भारतवर्ष सँ सैकड़ों युवा आ सामाजिक अभियन्ता लोकनि केँ जुटेबाक कार्य दहेज मुक्त मिथिला बढि-चढिकय कएने छल। एहि अभियानक एकटा मजबूत दृष्टि ईहो छल जे ऐतिहासिक धरोहर प्रति युवजन ओ आमजन मे जनजागरण करैत संरक्षण लेल ‘स्वयंसेवा’ केर तर्ज पर काज करी। सर्वप्रथम माधवेश्वरनाथ महादेव मन्दिर केर जीर्णोद्धार लेल ८ जनवरी २०१२ एक वृहत् सभा कयल गेल, काफी रास घोषणा भेल, तहिये आदरणीय नीलाम्बर बाबू जे पंडित ताराकान्त झा (तत्काली बिहार विधान परिषद केर सभापति) द्वारा ओ काज बिहार सरकार द्वारा करेबाक घोषणा कय देने छलाह… संगहि मिथिला चित्रकला लेल जे सरकारी संस्थान खुजत तेकरो चर्चा प्रथमतः तहिये भेल छल जाहि मे जमीन उपलब्धता लेल सौराठक संस्कृत विद्यालय केर नाम ओही दिन भेल रहय, सेहो आ मन्दिरो – दुनू काज भऽ चुकल अछि आइ धरि मे। हम ई सब एहि लेल शेयर कय रहल छी जे एकटा बहुत पैघ अनुभव शुरुए सँ ई भेटल अछि जे पहिने स्वयं फाँर्ह बान्हू, सरकार छुलकले अहाँक ओ काज करत। से भेल। प्रत्यक्षं किम् प्रमाणम् वाली बात, सब कियो ई सब अध्ययन कय सकैत छी। एक-एक टा तारीख आ एक-एक टा वाकया हमरा पास नोट कय केँ सामाजिक संजाल मे सूचीबद्ध अछि।
 
तखन मूल काज जे नहि भऽ सकल अछि आइ धरि – ओ थिक – सभागाछीक पुनर्आरम्भ, माने सभा लागब – मैथिल ब्राह्मणक जेहेन टफेस्ट मैरिज सिस्टम छन्हि यदि ओकरा अक्षरशः पालन कयल जाय तऽ आइयो सम्पूर्ण मिथिला मे ४२ टा सभागाछी केर आवश्यकता अछि। से स्वयं मैथिल ब्राह्मण यदि चाहता तखनहि लागत, नहि कि सरकार लगा देत। सरकार त तखन रुचि लेत सौराठे जेकाँ जखन लाख-सवालाखक भीड़ जुटय लागत। सरकार त सत्तालोभी बनबैत अछि, जतय भीड़ ओतय फीर! सौराठ सभागाछी केँ फेर सँ आरम्भ करबाक लेल पंचकोशी भरिक कय गोट दिग्गज – महादिग्गह – अपूर्वदिग्गज – माने जे एक सँ एक लोक लागल देखेला हमरा। मुदा जे नहि लागल छल ओ छल खुद सौराठ गामक स्थानीय लोक, पोखरौनी गामक स्थानीय लोक…. गप बड़का-बड़का, काज केवल जमीन अतिक्रमण करबाक, अपन सुख-सुविधा वास्ते २२ एकड़, १८ एकड़ आ कतेक-कतेक सभागाछीक जमीन, मकान, मचान, आदिक दुहान मात्र करब बुझैत छल एहि गामक लोक। हमर लेख कतेको केँ कड़ा लागि सकैत अछि, से लागय। लेकिन आब एक गोट एक्स-आर्मी – अनुशासित सज्जनक नाम आइ पेपर मे पढलहुँ जे हुनक अगुवाई मे पूरे गाम जागि गेलहुँ… से सोचि बेर-बेर वाह-वाह सौराठवासी हमरा मुंह सँ अनायासे निकलि रहल अछि। आब एकरा पुनर्आरम्भ करय सँ कियो नहि रोकि सकैत अछि। गारन्टी। अहाँ जागि गेलहुँ, आब देख लियौक २०२१, हम आइये भविष्यवाणी कय रहल छी। एहि बेर सबटा रेकर्ड टूटि जायत। बाकी जानकी सहाय रहथि, सेहो जरूरी।
 
मिथिलाक विकास स्वयं मैथिल कय सकैत अछि
 
पूर्वजक इतिहास – जनककाल सँ जे विधान पर मिथिला चलल वैह टा कारगर अछि एतय। हरेक गाम आ ठाम मे चमकैत स्थल वैह अछि जे स्थानीय लोकक अपन जनसहभागिता सँ निर्मित आ संरक्षित अछि। चूँकि हमहुँ एक कृतिवान परिवारक सदस्य छी, पीढी-दर-पीढी घटत-बढत सब देखलहुँ-सुनलहुँ… विजयी वैह बनैत अछि जे ‘स्वयंसेवा’ लेल कृत्संकल्पित अछि। सरकार – सरकार आ कि स्थानीय जनप्रतिनिधि – धूह! ई सब कि करत! करब अहाँ सब, आमजन! बस, अहाँ सोचि लियौक जे ई करबाक छैक, ओ हेतैक।
 
हालहि विस्फी विद्यापतिक जन्मस्थली गेल रही। ओतय सरकारक निर्मित एकटा सभागार, विद्यापति स्मारक, शौचालय व गार्डेन आदि देखल। ट्वाइलेट एतेक गन्दा – अव्यवस्थित जे कि कहू! गामक लोक केर दोख एतबा जे अपनहि घर जेकाँ एहि स्थान केँ चमकाकय रखितथि। मन्दिर चमकि रहल छैक न! भगवती केर मन्दिर कतेक नीक सँ चमकैत अवस्था मे अछि एतय! कियैक? कियैक त ओतय गंगा स्वयं अबैत छथिन। लोक सब सेहो ओहि ठाम सँ गंगाजल भरि-भरिकय अपन घर-अंगना मे रखैत छथि। ई आस्था मात्र नहि, जाँचल-परखल भक्तिक शक्ति थिकैक विस्फी गाम के। आर, एहि स्थल लेल ग्रामीण खूब ढरल रहैत छथि। विद्यापतिक डीह लेल कियो २-३ गोटे तत्पर रहितो छथि त साफ-सफाई लेल हुनका सब सँ सब किछु पार लागि जायत सेहो सोचनाय हमरे-अहाँक मूर्खता होयत। हँ, जँ गामक लोक एकटा अनुशासन समिति बनाकय एहि स्थल केँ पर्यटकीय महत्वक बुझि रख-रखाव करथि, गामक मुखिया-सरपंच एतय कोनो आदमी केँ नियुक्त कय दैथ, त निश्चिते ओहि भवन मे सेहो देवता सब रमण करता।
 
सौराठ मे आब स्थानीय लोक स्वयं विकासक देखभाल करब आरम्भ कय देलनि अछि। शेखर बाबू जानकारी दैत कहला जे इनारक काज पूर्ण भेल, आब यज्ञ मण्डप पर ध्यान अछि। हम सब लागि गेल छी। आर से करता। हमहुँ बड़भागी होयब जे अपन अंश एतय किछु कार्य मे लगा सकब। लगायब।
 
एकटा महत्वपूर्ण बात आरो –
 
हमर एक मित्र (भाइ) रविन्द्र जी बड़ा लाजवाब बात लिखलथि जे मिथिलाक्षेत्र मे एखनहुँ जनसहयोग सँ काज भऽ रहल अछि, सरकार आ स्थानीय प्रतिनिधि केँ एहि पर ध्यान देबाक जरूरत अछि.. सिर्फ मैथिली मे शपथ लेने मिथिलाक विकास नहि हेतैक।
 
एहि सम्बन्ध मे हमर अवलोकन हिनका सँ अलग अछि। मिथिला मे वैह विकास फलदायी होइछ जे जनसहभागिता सँ कयल जाइछ। बाप-दादा (पुरखा) लोकनि जे पोखरि खुनबथि, महार सजबथि, कलम-गाछी आ कि खेत-पथार, चारागाह, श्मसान, सार्वजनिक उपयोगक मन्दिर-मठ, आदि जे किछु बनौलनि से ‘जनसहभागिता’ सँ आ ओ सब चौजुगी जियैत रहल अछि, जा धरि सन्तान मे पुरखाक कृति प्रति सजगता रहल…. हँ सन्तान बक्र भेल कि कृति ढहि गेल!
गौर कय केँ देखू – जनसहयोग सँ जे सब कृति निर्माण भेल वैह टा दीर्घजीवी बनल।
 
सरकारक काज केँ त मिथिलाक लोक सरकारी माल बुझि नाशे करैत देखलहुँ हम, अफसोस। पूलक लकड़ी चोरबैत देखलहुँ, स्कूलक केबाड़ी खोलिकय अपन घर मे लगबैत देखलहुँ, सड़कक ईंटा, माटि, गिट्टी, आदि सेहो उघैत देखलियैक…. कतेक कहू! आर त आर, हाईवे सड़क पास छैक सरकारी कागज मे आ गाम-गाम मे लोक सड़क केँ अतिक्रमण कय विकास केँ स्वयं अवरूद्ध कयल सेहो देखलहुँ। पता नहि, मिथिलाक लोक जे आइ-काल्हि देखाइत अछि ओ स्वयं कतेक विकास सरकार सँ हुअय ताहि लेल सोचैत अछि! कहू जे साफ-सुथरा सड़क केर कात मे कल गाड़त आ ओकर पानि सड़कहि पर बहायत…, आब त ट्वाइलेट केर हौज सँ आउटलेट पाइप केर गन्दा पानि आ मल सेहो सड़क पर बहैत अछि, ओहि रस्ते सम्भ्रान्त आ सज्जन लोक चलियो नहि पबैत छथि, एहेन बदहाली गाम-गाम मे देखैत छी।
 
तेँ, जनसहभागिताक महत्व मिथिला मे बेसी छैक, ई स्वतः प्रमाणित बात थिक, अहाँ सेहो देखि सकैत छी। सरकारी कृति बर्बाद, जनसहभागिताक कृति आबाद!
कमजोरी प्रति ईमानदार आत्ममंथन करब जरूरी छैक। सौराठ सभागाछी वीरान छैक, कियैक? विद्यापति डीह वीरान छैक, कियैक? स्थानीय जनसहभागिता मे हम नहि त हम नहि, ओ कियैक, ई कियैक आदि बात पर आपस मे शंका सँ घेरायल लोक आजुक समय मे सार्वजनिक आ दसगर्दा उपयोगक धरोहर प्रति निराशाजनक व्यवहार करैत अछि। हम नीक-नीक गाम केर अवस्था बहुत बदतर देखल, सड़कक किनार गन्दा करय सँ लैत पोखरि, फूलबाड़ी, कलम, गाछी आदि सबटा स्वयं नाश कय रहल अछि लोक। एहि सब लेल युवा पीढी केँ जागरुक बनब बहुत आवश्यक अछि। नहि त कोन नैतिकता सँ सरकार सँ सवाल करबैक? आ मैथिली मे शपथ लेबाक बात सँ अहाँ एतेक खौंझायल कियैक छी? जतय किछु नहि, ओतय एतबो त केलक! खुश होउ।
 
हरिः हरः!!
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