हमर माँ आ दादी तथा हमर ओ संस्मरण

संस्मरण

– डा. लीना चौधरी

हमर मां, दादी आ ओ स्मृति
 
शहर ऐला साल होव जा रहल छल बाबूजी हर दू मास पर गांव भ अबइ छला मुदा मां चाइर टा दिअर और एकटा बेटी क ल ओतइ रहइ छल बच्चा सब के पढ़ाई में हर्जा नइ होय तेकर विचार क के। गरमी के छुट्टी भेला पर बाबूजी सब के गांव पठा देलखिन्ह किया की दादी के मन भ रहल छल सब चिलका के देख के। सबसे बड़का दिअर जे दसवीं मे छला हुनके संग ।अपना लेल कहलखिन्ह हम छुट्टी खत्म हैत तखन लेबय लेल आयब जैब तखने दस दिन हमहूँ रहि लेब मां संग।
 
सब गांव ऐला तेकर आंनद से मन उल्लसित छल। बच्चा सब के देख दादी के मन सेहो हर्षित छल। चारू तरफ आनंद छल। मुदा आंगन के लोक सब केँ एक बात नीक नइ लाइग रहल छलैन जे सब दिअर मां केँ छोड़ि सदिखन भौजी केँ ताकय छथि सबटा काज लेल। दु चाइर दिन बाद खेत में मिरचाई के तोड़ाइ छल। दादी केँ भोरे भोरे जलखइ सब करबा मां खेत पठेलाक बाद बच्चा सब केँ तैयार करय लगलीह। एकटा दिअर दस बरखक, एकटा आठ बरखक, अपन बेटी छः बरखक आ सबसँ छोटका दिअर जेकरा तीने महीना सँ अपन दूध पिया पोसलखिन से चारि बरखक छला। सब बच्चा केँ बड़का दिअर जे चौदह-पंद्रह बरखक छलखिन्ह तिनका संग मिलिकय नहासोनाकय सब केँ तैयार करइ छलीह। तैयार क सब के जलखइ करबा पढ़य लेल बइसा आ बड़का दिअर केँ सासुक मदति लेल पठा भानस-भात घरक काज मे व्यस्त भऽ गेलीह।
 
आंगनक लोक सब केँ एहेन समयक प्रतीक्षा रहनि। दोसर आर तेसर नंबर वला दिअर केँ बजाकय पुछय लगलाह – रे बौआ, खाना के बनबैत छौक? भौजी खाय लेल दइ छौ कि नहि? कपड़ा धोइ दैत छौक कि नहि? भौजी मारितो छौक? दूनू भाइ मे छोटका भाइ बाचाल छलाह.. हुनका गप्प करय मे बड़ मन लागैन। ओ बइस गेला सब संग बतियाबय लेल। बड़का भाइ बुझथिन जे ई ठीक नहि अछि तैँ मना करथिन्ह भाइ केँ लेकिन ओ छोटका आनंद ल-ल क सब बात कहय लगलाह। खाना त भौजी बनबइ छथिन्ह।खाली मन खराब भ गेल छलैन तखन दुनू बड़का भइया मिलिकय बनेने छलखिन्ह। नहबय त भइया छथिन्ह आ भौजी कपड़ा सब पहिरा कय तैयार करय छथिन्ह। कपड़ा हमर सब केँ भौजी धोइत छथिन्ह। दुनू बड़का भइया अपन कपड़ा अपने धोइ लैत छथिन्ह। भौजी पढ़य लेल डांटइ छथिन्ह, नइ पढ़ला पर भइया केँ कहि दैत छथिन्ह, तखन भइया मारबो करइ छथिन।
 
एतबे काल मे भानस सब बनि गेल आ मां सब केँ खाय लेल बजा लेलीह।सब केँ आब दादी केर आब के इंतजार छलैन। बड़का दिअर भौजीक आज्ञानुसार मां केँ दुपहरिया मे आराम लेल भेज देलखिन्ह। सब त बस हुनके बाट देखइत छलाह .. देखते सब हुनकर पुतोहु केना नेना सब पर अत्याचार क रहल अछि से खिस्सा सुनबय लगलीह। दादी सबटा गप्प सुइन कय पुछलखिन्ह ई बात कहलक के। सब बता देलखिन जे तेसर चच्चा के नाम जे से कहलक। दादी मां के आ चच्चा दूनू केँ बजेलनि आ चच्चा सँ पुछलखिन्ह भौजी डांटइ छौ, मारय नइ छौ? ओ बालक जीव बहुत खुशी सँ कहलखिन जे नहि भौजी कखनो नइ मारय छथि। तखन दादी मां केँ देखला आ कहलखिन्ह “कनियां! जँ ई सब बदमाशी करय त अहां मारल करू।अहां एकर सभक माय छी। खाना कपड़ा लालन पालन सब अहां करय छी त मारहो के हक अछि अहाँ केँ। ई सब आब हमर नहि अहांक बच्चा अछि। बुझलहुँ हमर बात?
 
मां चुपचाप हां कहि दिअर केर हाथ पकड़ने अंदर चलि गेलीह। आर दादी सब केँ कहलखिन्ह, हमर पुतोहु केँ शिकायत करब से पहिने ओकर कर्त्तव्य देखू। आंगनवाली सभक इच्छा जे लड़ाई देखब, लेकिन दादी ओही दिन पानि फेरिकय सब दिनक लेल हुनका सभक मुंह बन्द कय देलखिन्ह।
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