मैथिली सृजन-श्रृंगारक यौवनावस्थाक परिचायक – महाग्रन्थ ‘महाभारत’ केर मैथिली पद्यमय अनुवाद

साहित्य सृजन – मैथिली मे महाभारत

महाभारत’क पद्यमय मैथिली अनुवाद श्री बुद्धिनाथ झा द्वारा

#कैलाश_कुमार

अनुवाद बहुत कठिन काज अछि। अनुवाद हेतु, ज्ञान, प्रत्युत्पन्नमति, धैर्य आ सतत अध्ययनशील रहब अनिवार्य गुण छैक। अनुवादो मे कवित्तक अनुवाद, आ कवितो मे महाभारत सन महाकाव्य जकर रचना पद्य शैली मे कएल गेल अछि के संस्कृत सँ मैथिली मे काव्यात्मक अनुवाद बहुत कठिन काज अछि। ई काज कएलनि अछि परमादरणीय श्री बुद्धिनाथ झा ( Budhinath Jha) जी। हिनक बजबाक शैली मे सेहो जेना कविता छिड़ियाईत-नेतराईत रहैत छनि। मंच संचालन मे त्वरित कविता बना विद्वान/साहित्यकार/कलाकारक आदिक परिचय पर्यन्त बुद्धिनाथ जी कविते शैली मे दैत छथि।

महाभारत के बारे मे कहल जाइत अछि जे एकर आरंभिक नाम #जय छ्ल। तांहि काल अहि मे 50,000 सँ कम श्लोक छ्ल। बाद मे जखन एकर श्लोकक संख्या 80,000 भ’ गेलैक त’ ई #भारत केर रूप मे प्रसिद्ध भेल। अंत मे श्लोकक संख्या बढ़ा एक लाख क’ देल गेल आ एकर नाम #महाभारत भ’ गेल।

कहल जाइत अछि जे वेद, न्याय, मीमांसा, उपनिषद, ब्राह्मण, काव्य, शास्त्र सब चीजक वर्णन महाभारत मे अछि। अगर कोनो बात एतय वर्णित नहि अछि त’ अन्यत्र कतौ नहि भेटत। आ ताहि विशाल ज्ञानक महासागर रुपी महाभारत केँ मैथिली मे पद्यमय-अर्थमय-भावमय अनुवाद केनाइ असम्भव केँ संभव केनाइ भेल। ई काज बुद्धिनाथ जी गृहस्थ जीवनक यति भेल बहुत धैर्य सँ कएलनि अछि। आशा करैत छी हिनक अनुवाद मैथिली सहित्य आ जनमानस मे नव कृतिमान स्थापित करत।

बुद्धिनाथ जी, हिनक प्रकाशक, परिवारक लोक, आ हितमित्र सभ कियो बधाई केँ पात्र छथि। बुद्धिनाथ बाबू केँ शुभकामना जे अहिना अपन रचनाशीलता सँ मैथिली साहित्य केँ सब तरहेँ समपन्न होबा मे लागल रहथि।

बेर-बेर शुभकामना, आ प्रणाम ।

उपरोक्त लेख थिकनि डा. कैलाश कुमार मिश्र केर जे साभार फेसबुक पोस्ट सँ उद्धृत कयल गेल अछि। महाभारत हिन्दू धर्मशास्त्रक समग्र परिचय मानल जाइत अछि। ई एक महाग्रन्थ थिक। एहि मे मानव जीवनक लगभग समस्त दर्शन आ विभिन्न चरण मे होयवला घटना-परिघटना पर सोदाहरण मौलिक आ नैतिक शिक्षाक संग-संग व्यवहारिक बात केर नीक निरूपण भेटैत अछि। एहि महाभारत केर निचोड़ ज्ञान सँ गीता जेहेन गूढतम् ज्ञान सेहो प्राप्त भेल अछि। श्रीकृष्ण सहित एक सँ बढिकय एक व्यक्तित्व जीवन-चरित्र आ विशिष्टताक शिक्षा सेहो भेटैत अछि। आर, ई सब बात आब संस्कृत, हिन्दी एवं अन्य भाषाक बाद हमरा लोकनिक मातृभाषा मैथिली मे सेहो प्राप्त होयत। लेखकक अदम्य साहस आ वीरताक बखान करब शब्द मे संभव नहि होयत हमरा लेल – ताहि सँ डा. कैलाश कुमार मिश्र केर भावोद्गारक संग ओ ३ भागक आवरण पृष्ठ एतय राखि रहल छी, मैथिलीभाषी केँ बधाई दय रहल छी। जे सृजनधर्म अहाँ लोकनिक मुख्य जीवन श्रृंगार थिक, से एक बेर फेर अपन यौवनावस्थाक परिचय करौलक अछि। लेखक बुद्धिनाथ झा केँ प्रणाम आ हार्दिक बधाई!!

हरिः हरः!!

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