फेसबुक केर भाषाक आम-जीवन पर प्रभाव – एकांकी नाटक “फेसबुकिया परिवार”

भूमिका: मैथिल आ फेसबुक

ई नाटक (एकांकी) सेप्टेम्बर १, २०१२ केँ लिखल गेल छल। एहि मे कल्पना सँ फेसबुक द्वारा मिथिला समाजक किछु गूढ समस्या – यथा बेटीक कुटमैती, दूलहा निरीक्षण, दहेज व्यवस्था, वैवाहिक निर्णय, पारिवारिक माहौल आ ओकर प्रभाव आदि दरसेबाक चेष्टा कैल गेल छल। जानकारी दी जे यमन केर प्रीमियर ओतुका जनता सँ अपन पसिनक नेताक चुनाव लेल फेसबुक केर प्रयोग करबाक अधिकार देलनि आ जनता एहि बात केँ खूब मोन सऽ स्वागत केलक अछि।

जानकारी सबकेँ अछि जे भारतीय आम निर्वाचन मे ताहि समयक विपक्षी (वर्तमान सत्तापक्ष) भाजपा केर चुनावी व्यवस्थापन मे फेसबुक केर महत्त्व ‘नमो’ केर पक्ष मे हवा बहेबाक बड पैघ काज केने छल। भारतक एकमात्र सब सँ पुरान आ गहिंर राजनीतिक दल ‘काँग्रेस’ केँ जैड सँ उखाडि देबाक एकटा ‘हुदहुद’ तूफान चला देलक। राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह, दिग्विजय सिंह सन कतेको महत्त्वपूर्ण नेताक नाम-पहिचान तक बदैल कय राखि देलक। ई कदापि सही नहि छैक जे राहुल कोनो तरहें ‘पप्पू’ छथि, सोनिया-मनमोहन कैटरीना-सलमान छथि, दिग्विजय केर कान मे कथमपि कुकूरक कानक ट्रान्सप्लान्टेशन कहियो भेलनि…. मुदा ई सब सोशियल मिडिया आ फ्रीडम अफ एक्सप्रेसन केर एकटा अजीबोगरीब माहौल सँ संभव भेल जा रहल अछि। एकर सकारात्मक आ नकारात्मक दुनू पक्ष छैक, ओ बहस के विषय हेतैक, ओकरा एखन अलगे राखल जाय, कारण मूल विषय मिथिला आ मैथिली छैक।

मिथिला सनातन पहिचान सँ संपन्न – वर्तमान दुनू राष्ट्र यानि नेपाल तथा भारत मे रहितो संवैधानिक रूप सँ नगण्य भूगोलक संग निर्गुण स्वरूप मे विद्यमान् छैक। ई वैह सिद्धभूमि मिथिला थिकैक जेकर अनगिनती योगदानक चर्चा न तऽ भारतक कोनो इतिहास मे कैल गेलैक अछि आ नहिये नेपालक कोनो इतिहास एकरा ‘मिथिला’ रूप मे सम्मान दैत छैक। तथापि भारतीय पौराणिक ग्रंथ यथा रामायण, विष्णुपुराण, स्कन्दपुराण आदि मे बखूबी मिथिलाक इतिहास, भूगोल, राजवंश, राजव्यवस्था आदि पर चर्चा कैल गेल छैक जाहि सँ एकर ट्रान्सेन्डेन्टल आइडेन्टिटी सनातन विद्यमान छैक, रहबो करतैक। जाबत सूरज-चाँद रहतैक, मिथिला केर सब नाम रहतैक!! वर्तमान समय मे सोशियल मिडिया आ खास कय फेसबुक पर पुन: मैथिली – मिथिला केर सुधारस पान करबाक लेल भेटैत छैक। प्रिन्टेड किताब केँ दिवार लागि गेलैक, कतेको रास सरकार स्वयं एम्हर सँ ओम्हर चोरबा सब लगाकय केने हो, मुदा युयुक्षा आ जिज्ञासा एक बेर फेर मिथिलाक युवा पुस्ता मे प्रवेश कय गेलैक अछि। ई सब फेसबुक पर ‘पठन-संस्कृति’ मे उल्लेखणीय प्रगतिशीलताक परिणाम थिकैक।

एक बेर फेर विद्वान् वचन केँ स्मृति मे आनैत एहि लेख केँ विराम देब, नाटक एक बेर पढबाक अनुरोध सेहो करब… विद्वान् वचन छैक:

एहि वसुधा पर सभ्यता लेल स्वाभाविके भूगोल विद्यमान रहैत छैक। सभ्यताक जननी संस्कृति होइत छैक। संस्कृति समृद्ध-सुन्दर संस्कार सँ बनैत छैक। मिथिला आत्मविद्याश्रयीक सिद्ध-स्थल रहलैक अछि, शिक्षा एतुका लोकमानसक श्रृंगार थिकैक। बस शिक्षाक प्रसार करैत अपन संस्कृतिक रक्षा आ सभ्यताक पुनर्निर्माण सँ मिथिला राज्य दुनू राष्ट्र मे फेर स्थापित हेतैक।

जय मिथिला – जय जय मिथिला!!

हरि: हर:!!

प्रस्तुत अछि:

एकांकी नाटक: “फेसबुकिया परिवार”

(आइ-काल्हि फेसबुक जाहि तरहें मैथिल समाज में अपन स्थान बनेने जा रहल अछि तेकरा ध्यान में रखैत किछु मनोरंजनात्मक लेकिन सच कथा हम लिखय जा रहल छी – मातृभाषा पत्रिका लेल जे मैथिली ई-पाक्षिक के रूपमें आइ संध्याकाल सँ हमरा सभक सोझाँ अयबाक बात व्यवस्थापक रोशन कुमार झा कहलनि अछि।)

बाबु: हे रौ! नुनुआं! जहिया सऽ तूँ ई 2G-3G मोबाइल फोन पठौलें आ फेसबुक पर जोड़लें तहिया सऽ बुझ जे ई मोबाइल हरदम च्यों-च्यों करैत रहैत छौक।

नुनु: से कि बाबु? फंक्शन सभ तऽ सबटा बता देने रही ने? किछु दिक्कत भऽ रहल अछि तऽ फेर बुझा दी।

बाबु: अपन बचपनवाला बात आ किछु रास फोटो सभ जहाँ अपलोड करैत छियैक आ कि तोरा तड़ातड़ लोक सभके लाइक आ कमेन्टक बौछार भऽ जाइत अछि आ ततबा बेर मोबाइल चिचियैत अछि जेना बुझ जे हमर मुइलहा बाबा ऊपर सऽ शोर कऽ रहल होइथ… हे रौ नागे… हे रौ हरवाह खेत पर गेलौ कि नहि से गेबो केलही देखय लेल… मान जे वैह आवाज हमरा काम में पड़ैत रहैछ।

नुनु: देखियौ बाबु! अहाँ सभ दिन रहलहुँ मिथिला के माटि-पानि में आ हम सभ बनि गेलहुँ परदेशी… तखन तऽ जतय रहत धिया-पुता ओतहि नऽ अहुँ के रहय पड़त… ई घुमा-फिरा कऽ हमरा जे अहाँ गामक प्रलाप सुना रहल छी से हम सभ बात बुझैत छी। १० दिन नहि एना भेल अछि दिल्ली आ लगलहुँ बाबा के बात मोंन पारय।

बाबु: (खिखियैत) छौंड़ा… आखिर बेटा केकर छी… धियेपुता सऽ हमर मास्टर सभ कहने छल जे नागधर… तोहर संतान सेहो बड़ होशियार हेतौक… उड़ैत चिड़िया के पकैड़ लेतौक! से सही में! ई नुनुआ हमर भितरका बात चट दिन बुइझ जाइत अछि। (जोर सऽ हाक पाड़ैत) हेगै मुन्नी! ला दू कप गरमागरम चाह… ओना तऽ दिल्ली में ततेक गर्मी पड़ैत छौक जे बाहर-भितर दुनू आइग फुकने रहैत छौक… लेकिन जहाँ चाह के गर्मी देबैक आ कि बुझ जे गर्मी – गर्मी के कटतैक।

नुनु: (बाप के हंसीमें संग दैत दाँत खिसोरैत) आ… आब कि दिल्ली आन छी… ईहो तऽ मिथिले न छी? हस्तिनापुर आ मिथिला के कतेक पटरी खाइत छैक से नहि देखैत छियैक?

(दुनू बाप-बेटा दाँत खिसोरैत हंसैत छथि… ताबत मुन्नी चाय लऽ के अबैत छैक… आ कि ओकरो मोबाइल में नोटिफिकेशन ट्युन बाजि उठैत छैक)

बाबु: बुच्ची! बुझाइत अछि तोरो कोनो सूचना छह… देखहक… कहीं हमर होइवाला जमाय तऽ नहि फोटो पर लाइक या कमेन्ट पठेला छथि?

मुन्नी: (लजाइत) बाबु! अहुँ के मजाक करऽ के आदैत नहि छूटत… भैया के सोझां में हमरा संगे मजाक कऽ के खिसियाबैत छी… लेकिन सच तऽ यैह छैक जे अहाँ के होइवाला जमाय के बुझू तऽ आर किछु काजे नहि रहैन – भैर दिन हमर फोटो सभ ताकि – ताकि के लाइक आ कमेन्ट पठबैत रहैत छैथ। सभटा खत्म भऽ जाइत छैक तऽ कहैत छैथ जे नवका-नवका पोजवाला फोटो अपलोड करू नहि तऽ हम पापा लग दहेज माँग करऽ के सिफारिश कय देबैन.. बिसैर जायब जे हम दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सऽ शपथ खेने दूलहा विवाह लेल हामी भरलहुँ अछि। से बाबु, अहाँ हुनकर वाल पर पोस्ट कय दियौन जे बेसी ऊचक्का जेकां मैसेज आ पोस्ट सभ नहि करैथ… मजबूरन हमरा ब्लॅक करय पड़त।

नुनु: देखिहऽ तऽ ध्यान दिहक… आइ-काल्हि के युवा सभ के ई फोटो लाइक करनाइ – फ्रेण्ड रिक्वेश्ट पठेनाइ आ शेरो-शायरी… बूझा रहल अछि जे सभ केओ कवि आ मशहूर शायर बनि जायत… एतय तक जे आइ-काल्हिक लड़कियो सभ अपन फोटो तेहेन-तेहेन लगबैत अछि जे बाबु के उमेर वला लोक सभ सेहो पहुँचि जाइत छथि हाइ-हुंइ करय लेल।

बाबु: रे चुप! बेटीके सोझां में तों एना कहबें। (बेटा के डपटैत)

मुन्नी: भैया! से जों हेतैन तऽ चैन पर खापैर फोड़ि देबैन… पहिले वर्च्युअल मिटींग सऽ रियल मिटींग तऽ होमय दियऽ।

नुनुः गाम-वाला काका के बेटा कुमर सेहो फोन केने छल… पूछि रहल छल जे लड़का के गाम जा के घर-परिवार देखनाइ सेहो जरुरी अछि। फेसबुक पर तऽ लोक गाड़ी संग फोटो खिचा लेलक आ कहि देलक जे दिस इज माइ न्यु कार… १० गो अपनहि नजदिकी लफुआ मित्र सभ सऽ कांग्रेच्युलेशन लिखबा लेलक… से सभ भाइ ध्यान राखब आ एक बेर ओकर गाम के स्टेटस चेक करब बहुत जरुरी छैक। फेसबुक पर ओकर गाम के पेज देखलहुँ… मरल सन के बुझाइत छैक… नहि कोनो धरोहर न खास कोनो इतिहास आ ने बेसी मेम्बरे।

मुन्नी: आब जेहेन छैक… लेकिन हमर छैक… फोकटिया कमेन्ट के हम कहियो केयर नहि केलियैक अछि। बस! एक बेर पति के रूपमें स्वीकार कय लेने छियैक आ आब हमरा ओही लड़का सऽ विवाह करबाक अछि। ई लव बेर-बेर नहि कैल जाइत छैक… भले इन्टरनेट किऐक नहि हो। हमरो भारतीय नारी होयबाक गर्व अछि।

बाबु: वाह, वाह! बेटी! आखिर बेटी केकर छियें! मास्टर हमरा बच्चे में कहने छलाह जे नागधर तोहर संतानो तोरे जेकां आदर्शवान हेतह। गर्व अछि तोरा सभ पर।

मुन्नी: (नाक फूलबैत) बाबु! काल्हि हुनकर एगो पोस्ट आयल छैक, ताहि पर नहियो किछु तऽ २५० लाइक आ ५०० सऽ ऊपर कमेन्ट अयलैक अछि। कहू तऽ ओ मामूली लोक भऽ सकैत छथि? बुद्धिक परावार नहि छन्हि।

नुनु: कुमर के कहब सऽ हम सहमत छी… ई विवाह तखनहि करेबौ जखन ओकर गाम जाय सभ किछु नीक जेकां पता लगायब।

मुन्नी: भैया! दहेज मुक्त मिथिला पर जे जुड़ल छैक से केओ फोकटिया नहि भऽ सकैत अछि। कारण ओहिठाम लोक के बड़ हिसाब-किताब सऽ जोड़ल जाइत छैक। एकोटा इन्फोर्मेशन गलत नहि भऽ सकैत अछि।

नुनु: तखन ओकर गामक पेज कियैक मरहन्ना जेना छैक?

बाबु: भऽ सकैत छैक जे गाम में खाली जमाय बाबु के परिवार कनेक मुँहगर-कनगर हो आ मोबाइल पर फेसबुक आ सोशियल मिडिया के उपयोग बुझि सकल हो… पेज देखि के गाम नीक बेजाय निर्णय नहि कैल जा सकैत छैक। हम सहमत छी जे कुमर के ओहि गाम के पूरा पता लगेबाक चाही… आ हम तऽ कहबऽ जे अहू काजे हमरे जाय दऽ तू सब। खाली गामहि नहि, कुल-मूल-पाँजि आर बहुत तरहक बात होइत छैक जेकर अनुसारे निर्णय करबाक एक पौराणिक परंपरा रहलैक अछि।

मुन्नी: लेकिन बाबु… आब ई सभ बात प्रथम नहि बादक भऽ गेल… हमर विचारे लड़का के विचार आ पुरुषार्थ अन्तिम भेल जेकरा हम वरण करब।

नुनु, बाबु आ मुन्नी सभ एक दोसर के मुँह तकैत मुस्कुराइत एहि बात के सहमति दैत छथि आ आजुक युग में प्राथमिकता लड़का-लड़की के कैरियर मात्र होइछ… बहुत तरहक दुनियादारी सऽ कोनो सरोकार नहि… यदि इन्टरनेट सऽ विवाह ठीक होय तऽ बस एक करार यैह जे लड़का आ लड़की विवाहोपरान्त अपन स्वतंत्र कैरियर के संग राष्ट्र लेल सेहो योगदान देत, ई नहि जे झूठ के पारिवारिक शान के चक्कर में केओ केकरो ऊपर हावी बनत।

जय मैथिल समाज! जय मैथिली! जय मिथिला!

हरिः हरः!

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