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सरस गीत – कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी

सरस गीत – कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी

कुकुरक नाङड़ि – सियाराम झा सरस कुकुरक नाङड़ि सोझ करै मे लागल छी अहाँ बुझइ छी पागल, तँ हम पागल छी अइ नाङड़ि लै भेल कतेको बुधिबधिया धिमका भए गेल चौरस, चौरस भेल खधिया बारह बापुत सोझ करै छी पुछड़ी केँ जेना अगत्ती नेन्ना गीजए छुछड़ी केँ नहे सँ जतबा सकैत छी – खोंटै छी […]

बाप केँ एना ठकलनि गोनू झा

बाप केँ एना ठकलनि गोनू झा

गोनू झा क रोचक कथा: बालकथा – संकलन: प्रवीण नारायण चौधरी गोनूक पिता एक दिन कहलखिन “रे गोनू! दुनियामे सबकेँ ठकलें, मुदा बाप तोहर बापे रहि गेलौक।” गोनू हँसैत कहलखिन “बाप तऽ बाप होइते छैक, मुदा कला मे बेटा सेहो बापोक बाप बनि जाइत छैक।” पिता पूछलखिन “कि मतलब?” गोनू कहलखिन “रुकू! समय पर कहब।” […]

नवका हरिमोहन झा उर्फ संतोषीक टटका प्रसंग: उन्नैति कि खच्चरहि!!

नवका हरिमोहन झा उर्फ संतोषीक टटका प्रसंग: उन्नैति कि खच्चरहि!!

यथार्थ व्यंग्य – संतोष कुमार “संतोषी” उन्नैति…. की “खच्चरैहि “ से सत्ते, हम सब गोटे बेसिये उन्नैतिक बाट पर छी…. पुरना रिति रेवाज, रहन सहन आ समाजिक सुसंस्कृति केँ ताख पर राखि नव-नव विचार नव-नव व्यवहार केँ संग सत्ते बेसिये उन्नैति कय रहल छी……! जाईत-पाईत अनुसारे काज बाँटल गेल रहय कि काजक अनुसारे जाईत-पाईतक बँटवारा भेल छल […]

मिथिला के बौस

मिथिला के बौस

गीत – प्रवीण नारायण चौधरी ‘किशोर’ (जनवरी १०, २०१२ केर रचना – फेसबुक पर किशोर एनसी द्वारा प्रकाशित, अन्तिम २ पाराग्राफ आइये जोड़ल गेल) सासुर हमर जनकपुरमे, मधुबनी के ननिया सौस! गाम अपन दरभंगा अछि, पुर्णियाक मौसिया सौस! पीसी हमर बरौनीमे छै, चलै अछि सगरो धौंस! जेम्हरे देखु अपनहि लोक, हम मिथिलाके बौस! खगड़ियामे हमर […]

गरम फोटो गरम गीत – मिथिला के है नवका रीत

गरम फोटो गरम गीत – मिथिला के है नवका रीत

व्यंग प्रसंग जनकपुर बजार पर रमना आ चुमना पोस्टकार्ड कीन रहल छल। रमना दोकानदार सँ कहलकय जे भाइ हौ, हमरा मैथिली फिल्मी हिरोइन के फोटो दहु। ओकर बात सुनिकय दोकानदार कहलकय मैथिली फिल्म मे कौन ऐसन हिरोइन है जे तोरा निमन लागय हौ। तयपर रमना कहलकय नाम हम आर ओतना कहाँ जानय छी। सुनली जे […]

मिथिला मे खच्चरहि प्रसंग – ४: दहेजक माँग आ वरागत-कन्यागतक कनफूसकी

मिथिला मे खच्चरहि प्रसंग – ४: दहेजक माँग आ वरागत-कन्यागतक कनफूसकी

व्यंग प्रसंग – संतोष कुमार संतोषी दहेजिया …..”खच्चरैहि” बरक देखा-सुनी भ गेल रहै… हंगामा लोक दरबज्जा पर बैसल गप सरक्का के आनन्द ल रहल छल. लगभग समुच्चा समाज बैसल छल भैरू बाबू के दलान पर…. किएक नै… आय हुनका बेटा प्रति कन्यागत सब जे एलखिन अई….. चाह पानक त बुझू तुर्रा उठल अई,, जनानी सब […]

‘मि. बुफैलो’: नवका नेता

‘मि. बुफैलो’: नवका नेता

व्यंग्य प्रसंग – प्रवीण नारायण चौधरी आधुनिकताक क्रान्ति या विज्ञानक चमत्कार मात्र मनुखे लेल कियैक, एहि सँ पूर्ण दमन आ उत्पीड़नक अनुभूति पबैत एकटा गामक सब पोसा जानवर सब सुतली राइत मे अपन विशेष आवाज सँ खुट्टा पर बन्हले-बान्हल वार्ता शुरु कएलक। बड़-बुजुर्ग सब जे छल ओ सब पहिने अपन-अपन स्मृति सँ विषय पर संबोधन […]

मिथिला मे खच्चरहि केर दर्शन – तीत-सत्य

मिथिला मे खच्चरहि केर दर्शन – तीत-सत्य

खच्चरहि प्रसंग – यथार्थ अनुभूति पर आधारित – संतोष कुमार संतोषी ई खच्चरैहि……बाप रे……. उजरका पैजामा आ चितकबरा बुसट पहिरने, बिच्चैहि आँगन में खाट पर बैसल डाक्टर साहेब — कोनो जानवरक छाला सँ बनल अपन करिकबा बेग में भरल रंगबिरहा गोटी आ दबाई संग तोर जोर क रहला… एम्हर,, जर (बुखार )सँ तलफैत अपन चाईर […]

नुनु झा उवाच: मिथिलाक तरुआ सबहक आपसी नोंक-झोंक

नुनु झा उवाच: मिथिलाक तरुआ सबहक आपसी नोंक-झोंक

मिथिला के तरुआ के स्वाद तs बहुत नेने होयब, आउ आइ तरुआ सबहक आपस मे नोंक-झोंक केर मजा ली ….. भिंडी :- भिनभिनाइत भिंडी के तरुआ, आगु आ ने रे मुंह जरूआ हमरा बिनु उदाश अछि थारी, करगर तरुआ रसगर तरकारी । कदीमा :- गे भिंडी तू चुप्पे रह, अहि से आगु किछ नै कह […]

मिथिला मे खच्चरहि केर अद्भुत दर्शन – भाग २

मिथिला मे खच्चरहि केर अद्भुत दर्शन – भाग २

व्यंग्य प्रसंग एहि खच्चरहि केर कि जबाब? – संतोष कुमार संतोषी बरकी भौजी -चाहक कप हाथ में पकरेलैनि कि अकस्मात् हम पुछि देलियैन….. हम–: भौजी बच्चा सब स्कूल जाई अई की नै…. भौजी –: उँ,,,जाऊ जरलाहा के…. . जेहने गेने -तेहने विनु गेने, ओ त, दू दू टा टीशन लागल छै तैँ बड बढियाँ .. […]