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मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्-रावण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्-रावण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌-रावण संवाद दोहा : कपि देखि के दसानन हँसल कहल दुर्बाद। सुत वध सुरति कयल पुनि उपजल हृदय बिषाद॥२०॥ भावार्थ:- हनुमान्‌जी केँ देखिकय रावण दुर्वचन कहैते खूबे हँसल। फेर पुत्र वध केर स्मरण करिते ओकर हृदय मे विषाद उत्पन्न भऽ गेल॥२०॥ चौपाई : कहे लंकेश […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और मेघनादक हनुमान्‌जी केँ नागपाश मे बान्हिकय सभा मे लऽ गेनाय

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और मेघनादक हनुमान्‌जी केँ नागपाश मे बान्हिकय सभा मे लऽ गेनाय

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌जी द्वारा अशोक वाटिका विध्वंस, अक्षय कुमार वध और मेघनादक हनुमान्‌जी केँ नागपाश मे बान्हिकय सभा मे लऽ गेनाय दोहा : देखि बुद्धि बल निपुण कपि कहली जानकी जाउ। रघुपति चरण हृदय धरू तात मधुर फल खाउ॥१७॥ भावार्थ:- हनुमान्‌जी केँ बुद्धि और बल मे निपुण […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री सीता-हनुमान् संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री सीता-हनुमान् संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद श्री सीता-हनुमान्‌ संवाद सोरठा : कपि कय हृदय विचार देलनि मुद्रिका सोझाँ खसा। जेना अशोक अंगार देला हरखि उठि हाथ लेली॥१२॥ भावार्थ:- तखन हनुमान्‌जी हदय मे विचारिकय (सीताजीक सामने) अँगूठी खसा देलनि, मानू अशोक अंगार दय देला (से बुझिकय) सीताजी हर्षित होइत उठिकय ओ हाथ […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री सीता-त्रिजटा संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री सीता-त्रिजटा संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद श्री सीता-त्रिजटा संवाद दोहा : जहिं तहिं गेल तखन सबटा सीता मन मे सोच। मास दिन केर बितिते मारत निशिचर पोच॥११॥ भावार्थ : तखन (ओकर बाद) ओ सब जहाँ-तहाँ चलि गेल। सीताजी मन मे सोच करय लगलीह जे एक महीना बीत गेलापर नीच राक्षस रावण हमरा […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌जी केर अशोक वाटिका मे सीताजी केँ देखिकय दुःखी होयब आर रावण केर सीताजी केँ भय देखायब युक्ति विभीषन सब सुनेलनि। चलथि पवनसुत विदाई लेलनि॥ कय वैह रूप गेला फेर ओहिठाँ। वन अशोक सीता रहथि जहाँ॥३॥ भावार्थ : विभीषणजी द्वारा (माता केर दर्शनक) सब युक्ति (उपाय) […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री हनुमान् विभीषण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री हनुमान् विभीषण संवाद

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित रामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌-विभीषण संवाद दोहा : रामायुध अंकित गृह शोभा बरन न जाय। नव तुलसीक बृंद ओतय देखि हरख कपिराय॥५॥ भावार्थ : ओ महल श्री रामजी केर आयुध (धनुष-बाण) केर चिह्न सँ अंकित छल, ओकर शोभा वर्णन नहि कयल जा सकैत अछि। ओतय नव-नव तुलसी गाछक समूह केँ […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश

मैथिली सुन्दरकाण्डः लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दकाण्डक मैथिली अनुवाद लंका वर्णन, लंकिनी वध, लंका मे प्रवेश नाना वृक्ष फल फूल सोहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए॥ सैल विशाल देखि एक आगू। ओहिपर दौड़ि चढल भय त्यागू॥४॥ भावार्थ : अनेकों प्रकारक वृक्ष फल-फूल सँ शोभित अछि। पक्षी आर पशु सभक समूह केँ देखिकय ओ मनहिमन […]

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध

मैथिली सुन्दरकाण्डः हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध

मैथिली सुन्दरकाण्ड – श्री तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद हनुमान्‌जी केर लंका केँ प्रस्थान, सुरसा सँ भेंट, छाया पकड़यवाली राक्षसी केर वध चौपाई : जामवंत के वचन सोहेलनि। सुनि हनुमंतक चित्त रमेलनि॥ ता धरि तूँ सब रुकिहें भाइ। रहिहें दुःखे कंद मूल फल खाइ॥१॥ भावार्थ : जाम्बवान्‌ केर सुंदर वचन सुनिकय हनुमान्‌जी केर हृदय […]

मैथिली सुन्दरकाण्ड – मंगलाचरण

मैथिली सुन्दरकाण्ड – मंगलाचरण

श्री तुलसीदास रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्ड केर मैथिली अनुवाद अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी प्रेरकः मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार ‘लेखक रमेश’  शेष सम्पूर्ण कृपा श्री सीताराम व श्री गौरीशंकर संग स्वयं पवनसुत हनुमानजी छथि। महाकवि तुलसीदास प्रति पूर्ण श्रद्धा आ समर्पण संग हुनक गुण-धर्मक अंश मात्र भेटि जाय अपने पाठक लोकनि केँ, यैह सोचि ई ‘मैथिली सुन्दरकाण्ड’ […]

मैथिली सुन्दरकाण्ड – समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध आर समुद्रक विनती – श्री राम गुणगानक महिमा

मैथिली सुन्दरकाण्ड – समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध आर समुद्रक विनती – श्री राम गुणगानक महिमा

मैथिली सुन्दरकाण्डः श्री तुलसीदासजी रचित श्रीरामचरितमानस केर सुन्दरकाण्डक मैथिली अनुवाद समुद्र पर श्री रामजी केर क्रोध और समुद्र केर विनती, श्री राम गुणगान केर महिमा दोहा : विनय नै मानय जलधि जड़ गेल तीनि दिन बीति। बजला राम सकोप तखन भय बिनु होय न प्रीति॥५७॥ भावार्थ:- एम्हर तीन दिन बीत गेल, मुदा जड़ समुद्र विनय […]