कोलकाता मे डा. अशर्फी झा स्मृति सम्मान सर्जक लक्ष्मण झा सागर केँ समारोहपूर्वक देल गेलनि

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कोलकाता सँ राम बाबू सिंह – मैथिली जिन्दाबाद लेल

नवम्बर २७, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

डॉ० अमरेश रिसर्च वेलफेयर एजुकेशन फाउंडेसन, कोलकत्ता द्वारा आयोजित डॉ अशर्फी झा “अमरेश” स्मृति मातृभाषा संवर्धन सम्मान-2016 संगहि कवि गोष्ठीक आयोजन 26 नवम्बर रविदिन बड़ाबाजार लाईब्रेरी (आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री सभागार) मे शुभारम्भ कएल गेल। प्रो० डॉ विद्यानन्द झा (आई.आई.एम), कोलकत्ता केर अध्यक्षता आओर भाष्कर झाक कुशल मंच संचालनमे मिथिला मैथिलीक हस्ताक्षर समर्पित एवं लब्ध प्रतिष्ठित कवि श्री लक्ष्मण झा “सागर” केँ उपरोक्त सम्मान समारोहपूर्वक प्रदान कएल गेलनि।

सम्मानित स्रष्टा सागर केँ हुनक महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान सँ मैथिली भाषा केँ उत्कर्ष पर पहुँचेबाक लेल प्रशस्ति पत्र तथा नगद एगारह हजार टका प्रदान कएल गेलनि।

समारोह केर विधिवत शुरुआत विश्वम्भर नेवर (निदेशक-ताजा टी. भी. एवं प्रधान सम्पादक दैनिक छपते-छपते) द्वारा उद्घाटन सँ भेल। तत्पश्चात् सम्मानित सर्जक सहित समस्त अतिथिगण महाकवि विद्यापतिक चित्र पर पुष्प अर्पित कएलनि। कुमारी अंजना इस्सर द्वारा गोसाउनिक गीत “जय जय भैरवी” गाओल गेल जे उपस्थित श्रोता एवम् मंचासीन विद्वान्-सर्जक लोकनि केँ मंत्रमुग्ध कय देलक। तदोपरान्त स्वागत भाषण डारवेफ अध्यक्ष प्रो० शंकर झा कएलनि आ संगहि लक्ष्मण झा सागरक मातृभाषा मैथिली मे रचनाधर्मिताक अविरल यात्रा पर चर्च कय अपनहि हाथ सँ पुरस्कार प्रदान कएलनि।

सम्मान समारोह सम्पन्न भेलाक बाद लक्ष्मण झा सागर 1974 केर एकगोट संस्मरण मोन पाड़ैत कहलनि जे कोलकत्ता केर गुप्ता धर्मशालामे सर्व भाषा कवि सम्मेलनक आयोजन भेल रहय जाहिमे मैथिली सँ डॉ वीरेंद्र मल्लिक, सुकान्त सोम आर नवतुरियमे ओ स्वयं आमंत्रित रहथि जेकर अध्यक्षता डॉ अशर्फी झा ‘अमरेश’ कयने छलाह। कविता केर शुरुआत केलखिन सुकान्त सोम आर हुनक कविताक शीर्षक छलन्हि “आगिक बेगरता”। फेर डॉ वीरेंद्र मलिक कविता पढलाह जेकर शीर्षक सेहो “आगिक बेगरता” रहनि आर भाव सेहो लगभग बरोबरि आ हिनकर कविताक शीर्षक रहन्हि “मैथिली आन्दोलनक दूटा छेपक”। कवि गोष्ठी खतम भेलाक बाद अपन अध्यक्षीय भाषण मे सभाध्यक्ष अशर्फी झा बजलाह जे आगिक बेगरता तँ अछिए जेकरा नकारल नैS जा सकैछ कारण आगि आन्दोलनक एकगोट विम्ब होएछ, परञ्च ई युवा बालक जिनका सबकेँ श्रृंगार रसक रचना करबाक चाही से मैथिली आन्दोलन लेल रचना कय रहल अछि से नीक लागल आ कोलकाताक मिथिला-मैथिलीक भविष्य लेल सुन्नर संकेत अवश्य बुझना जाएत अछि। एहि प्रकरण केँ मोन पाड़ैत सम्मानित स्रष्टा सागर ईहो बजलाह जे हुनकहि प्रेरणा सँ हिनकर साहित्यिक एवं अभियानक अविरल यात्रा जे शुरू भेल से आइ धरि निर्वाध चलि रहल अछि। “हमर सौभग्य जे आई हुनकहि स्मृतिमे सम्मान भेट रहल अछि से वास्तवमे आर्शीवाद स्वरूप अखनहुँ प्रेरित कS रहल अछि आ भविष्यमे सेहो होयत रहब।” – सागर सम्मान प्रति आभारक शब्द प्रकट केलनि।

मुख्य अतिथि डॉ रामकुमार मुखोपाध्याय केर वक्तव्यक अलावे विशिष्ट अतिथि मैथिलीक प्रसिद्ध साहित्यकार राम लोचन ठाकुर,  समाजसेवी तथा बहु्आयामी सर्जक अशोक झा अपन-अपन वक्तव्य रखलाह जेकर मुख्य केंद्रविन्दु वर्तमान परिप्रेक्षमे मिथिला-मैथिलीक समकालीन स्थिति आ ओकर निदानक वृतान्त वर्णन कयल गले छल । मैथिली भाषाक महानगर तँ महानगर गामोघर मे कोना अपनहिसँ उपेक्षित भ रहलैए आ कोलकता मे मैथिली भाषी बहुतायत अछि तँ स्कूल कॉलेज में पढाउनी होय ताहि पर सेहो विमर्श भेल। हिंदी अंग्रेजी कोना मैथिली पर भारी पड़ि रहलैए आ जिम्मेबार कोना हम स्वयं छी, आ ओकर निदान कयल जाय एहि तरहक अन्तर्मनक हजारो सरोकार पर खूब चर्च भेल। अछैत हजारो हजार संस्था मोनमे कचोट जे बेसी किछु भऽ नहि रहल अछि से कोना एकजुट भऽ जनानंदोलन कयल जा सकत ताहि दिशा मे प्रयासक आवश्यकता पर सब कियो जोर देलनि।

दोसर सत्र कवि गोष्ठीक भेल जाहिमे सहभागी कवि लोकनिक नाम अहि प्रकारे अछि प्रो० विद्यानन्द झा, नवोनारायण झा, उज्ज्वल झा, शम्भू नाथ मिश्र, कामेश्वर झा “कमल”, संजय ठाकुर, अमरनाथ भारती, डॉ अनमोल झा, रामबाबू सिंह मधेपुर, विजय इस्सर, शैल सागर, रूपा चौधरी, रुपेश त्योथ, लखनपति झा, नवोनाथ झा, विनय भूषण ठाकुर, मणिकांत झा, हास्य व्यंग्य केर प्रख्यात कवि जय प्रकाश जनक, अशोक झा आओर भास्कर झा भास्करानन्द आदि कविवर लोकनिक समयक विषय पर कविता पढ़ल गेल। दिल्ली सँ पहिल बेर कोलकाता धरिक यात्रा करैत एहि महत्वपूर्ण समारोह मे सहभागी बनि हमरा सहित समारोहक समस्त साक्षी बननिहार मिथिला-मैथिलीक हस्ताक्षर, साहित्यकार, नाटककार, कथाकार, कवि समागम सँ सब लाभान्वित भेलाह। आयोजनकर्ता प्रो० श्रीशंकर झा द्वारा एहेन भव्य आयोजन हेतु धन्यवादक संग आभार प्रकट सेहो सब कयलन्हि।

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