मिथिला भैर काली-पूजाक धूमः तंत्रपीठ मे देवी कालीक पूजाक बहुत पैघ महत्व

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अक्टूबर १९, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

आदिशक्ति माँ दुर्गाक दस महाविद्या स्वरूप मध्य एक अत्यन्त शक्तिशाली आ देखय मे भयंकर रूपवाली काली थिकीह। देवाधिदेव महादेव केर प्रिया सती केर लीला सँ प्रकट दसो महाविद्या मे काली, तारा, छिन्नमस्ता, षोडशी, भुवनेश्वरी, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी आ कमला छथि।

काली हिन्दू धर्मक एक प्रमुख देवी थिकीह। ई अत्यन्त सुन्दर-सौम्य रूपक भगवती दुर्गाक कारी आ भयप्रद रूप छथि, जिनकर उत्पत्ति राक्षस सभ केँ मारबाक लेल भेल छलन्हि। दुर्गा सप्तशती मे भगवान् शिव केँ दूत रूप मे पठबैत भगवती महादुर्गा हिनक आह्वान तखन कएलनि जखन रक्तबीज नाम्ना भयंकर राक्षस पर प्रहार सँ निकलल रक्तक छींट मे सँ पुनः कतेको रक्तबीज उत्पन्न भऽ जाएत रहय। अन्त मे महाकाली अपन रौद्ररूप मे प्रकट भेलीह आ जहिना माँ दुर्गा अपन तरुवारि सँ रक्तबीज पर प्रहार करथिन आ जहिना रक्तक छींट बाहर निकलैक आ कि काली ओहि रक्त केँ खप्पर मे लैथि आ पीब जाएथ। एहि तरहें रक्तबीजक सम्पूर्ण रक्त जखन क्षीण भेल तखनहि ओकर बध कयल जा सकल छल। काली केर व्युत्पत्ति काल अथवा समय सँ भेल अछि जे सब केँ अपन ग्रास बना लैत अछि। माँ केर ई रूप ओना त नाश करयवला अछि, परन्तु नाश दानवीय प्रकृति केर, अन्याय-असत्य आ राक्षसी प्रवृत्ति केर करैत छथि। असत्य पर सत्य केर जीत लेल नीक मनुष्य लेल काली आराध्या थिकीह। मानवताक धर्म निर्वाह मे लागल हरेक मनुष्यक शुभेच्छु आ पूजनीय छथि काली।हिनका ताहि हेतु महाकाली सेहो कहल जाएत छन्हि।

कार्तिक मासक अमावस्या तिथि हिनक अवतार दिवस मानल जाएछ। ताहि सँ एहि दिन पूरे भारत मे दियाबातीक संग-संग काली देवी केर पूजा कयल जाएछ। मिथिला मे शाक्त भक्तिक प्रचूरता भेटैत अछि। एतय तांत्रिक पद्धतिक आधिक्य अछि। काली देवी कुलदेवीक रूप मे अधिकांश परिवारक आराध्या थिकीह। एतुका विभिन्न कालखंड मे राजा परिवार द्वारा सेहो काली केर विशेष पूजाक विधान रहबाक अवशेष आइयो जगह-जगह पर भेटैत अछि। काली देवीक मुण्डमाल पहिरैत छथि, शव (लहास) हिनक सवारी होएत छन्हि, हाथ मे तरुवारि (कत्ता), खप्पर, योगीनियां आदि रखैत छथि। हिनक जीवनसाथी शिव छथिन। एकटा हाथ सदैव अभय-मुद्रा मे सत्य केँ आशीर्वाद दैत रहैत छन्हि। देवी भागवत मे वर्णन अबैत अछि जे शिव सेहो भगवतीक लीला सँ विस्मित रहि गेल छलाह। काली देवीक भयंकर रूप केँ शान्त होयबाक लेल ओ धरा पर चित्ते लेटा गेल छलाह – सहसा भगवतीक पैर हिनक छाती पर पड़ि गेलन्हि आर तखनहि लज्जाक अनुभूति करैत देवीक जीह बाहर निकैल गेल छलन्हि। मूर्ति रहस्य मे एहि स्वरूपक दर्शन करैत हम भक्त-आराधक भगवतीक पूजा गोसाउनिक घर सँ लैत नवरात्रक विशेष अवसर एवम् काली पूजा पर आरो खास ढंग सँ करैत छी।

मिथिला मे सेहो गणेश, गौरी आ लक्ष्मीक पूजा उपरान्त भगवती कालीक पूजा करबाक विधान अछि। एतय सेहो यैह मान्यता प्रचलित अछि जे कार्तिक अमावस्याक दिन देवी काली ६४,००० योगिनियाँक संंग प्रकट भेल छलीह। मिथिला, बंगाल आ आसाम मे काली पूजा खूब धुमधाम सँ मनायल जाएत अछि। दीपावलीक एक दिन पूर्वहि सँ विधिवत् मूर्ति पूजा आरम्भ भऽ जाएत अछि। गाम-घर आ शहर सब ठाम खूब चहल पहल रहैत अछि। मेला सेहो कतेको स्थान पर लगैछ एहि अवसर पर।

भगवती कालीक रूप एहेन भयंकर छन्हि जे बहुतो लोक केँ देखिते डर होमय लगैत छैक। परञ्च शास्त्र कहि रहल अछि जे ई डर असुर प्रवृत्ति केँ होएत छैक। जे सत्य पर चलैछ, ओ कथमपि नहि डेराय। भगवती सदिखन सत्यक रक्षा करैत छथि। अन्यायी व दानवी केँ संहार करैत सत्य आ न्याय केर बचाव करैत छथि।

महाकवि विद्यापतिक आराध्या गोसाउनिः काली

महाकवि विद्यापतिक रचना ‘जय जय भैरवि असुर भयाउनि – पशुपति भामिनी माया’ भगवती काली केर विनती थिक। ई रचना आइयो मिथिलाक जन-गण-मन केर कंठ मे विराजैत अछि। आइ काली-पूजाक विशेष अवसर पर एहि रचना केँ एतहु राखि रहल छीः

जय-जय भैरवि असुर भयाउनि, पशुपति भामिनी माया

सहज सुमति वर दिअ हे गोसाउनि, अनुगत गति तुअ पाया

वासर रैन शवासन शोभित, चरण चन्द्रमणि चूड़ा

कतओक दैत्य मारि मुख मेलल, कतेक उगिलि करू कूड़ा

जय-जय भैरवि असुर भयाउनि…..

सामर वरण नयन अनुरंजित, जलध जोग फूल कोका

कट कट विकट ओट पुट पाँड़रि, लिधूर फेन उठ फोका

जय जय भैरवि असुर भयाउनि……

घन-घन घनन घुघुर कत बाजय, हन-हन कर तुअ काता

विद्यापति कवि तुअ पद सेवक, पुत्र बिसरु जनि माता

जय जय भैरवि असुर भयाउनि….

मधुबनी जिलाक बेला गाम मे तीन दिन धरि चलयवला काली पूजाक उद्घाटन

बाबूबरही प्रखंडक बेला मे आयोजित काली पूजा मे पूजा समितिक अध्य्क्ष श्री वासुदेव झा द्वारा पूजा कार्यक्रमक फीता काटि कय उद्घाटन कयल गेल अछि। एहि गाम सँ मैथिली जिन्दाबाद सहित विभिन्न संचारक्षेत्र लेल स्वयंसेवा देनिहार मिहिर कुमार झा ‘बेला’ ई जनतब पठौलनि अछि। उद्घाटन उपरान्त पूजा अर्चना करैत माँ कालीक आशीर्वाद लेल गेल। एहि अवसर पर उपस्थित सचिव चंद्रशेखर झा श्रद्धालु सब केँ संबोधित करैत कहलखिन जे पूजन सँ धार्मिक वातावरण तैयार होएत छैक, संगहि क्षेत्र मे सुख समृद्धि अबैत छैक। पूजा समितिक उपाध्य्क्ष, अभिभावक धार्यनाथ झा सेहो सभा केँ संबोधित कयलनि। समितिक सोशल मिडिया प्रभारी मिहिर झा, ग्रामीण पूजा प्रभारी – पंकज झा, छोटकन झा, सचिन झा, बिपुल झा, रमेश झा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित छलाह। शुरुआती संबोधन उपरान्त मिथिलाक सुपर स्टार  गायक माधव राय केर टोली द्वारा एतय काली पूजा मे प्रथम रात्रि १८ अक्टूबर, २०१७ केँ भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमक प्रस्तुति कयल गेल। उपस्थित श्रोता आ दर्शक सब अपन मैथिली भाषाक सुमधुर सांस्कृतिक संध्या सँ खूब प्रसन्न भेलाह।

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