मिथिला पर दृष्टिकोण: मार्कण्डेय काटजू

मिथिला

– मार्कण्डेय काटजू
markandeya kataju
हमर पूर्वक पोस्ट द्वारा महान न्यायिक दार्शनिक उद्यानाचार्य, सुविख्यात नीतिशास्त्र ‘न्याय कुसुमाञ्जलि’ केर रचयिता जे मिथिला सँ छलाह तिनकर संदर्भ देल गेल छल।

मिथिला, उत्तरी बिहारक एक क्षेत्र, (आंशिक अवस्थिति नेपालहु मे) भारतक एहि भूभाग जतय हम एखन धरि नहि जा सकलहुँ, मुदा मृत्यु सँ पहिने कम सँ कम एक बेर जरुर जाय से इच्छा अछि, किऐक तऽ मिथिला एक सँ बढिकय एक दार्शनिक, विद्वान्, कवि, आदि केर जन्मस्थल थीक। गौतम बुद्ध आ महावीर एतहि रहलाह। उद्यानाचार्य जिनक हम चर्चा केने छी, हिनकर अतिरिक्त एतय जे महान् विद्वान् लोकनि अवतार लेलनि ताहि मे कुमारिल भट्ट, मंडन मिश्र, वाचस्पति मिश्र, डा. गंगानाथ झा, डा. अमरनाथ झा आदि छथि। महाकवि विद्यापति (१३५२-१४४८) सेहो मिथिलाक छलाह।

कहल जाइत छैक जे जखन आदि शंकराचार्य केरल (अपन गृहराज्य) सँ उत्तर भारतक यात्रा पर महान मीमाँसा-विज्ञ मण्डन मिश्र (श्रेष्ठ मीमाँसा-विज्ञ कुमारिल भट्ट केर शिष्य) सँ शास्त्रार्थ करय लेल अयलाह, हुनक पता मंगला पर कहल गेलनि जे मंडन मिश्र केर घर एक एहेन गाछक निचाँ अछि जेकर डाड़्हि पर बैसल सुग्गा निरंतर पूछि रहल अछि, ‘सत्य कि थिक, असत्य कि थीक?’, ‘मोक्ष कोना प्राप्त होयत’, आदि। अर्थात् सगरो मिथिला मे विद्वानहि-विद्वान् भरल अछि आ हर क्षण शास्त्रार्थ चलिते रहैत अछि।

हमर विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जतय हम १९६३ सँ १९६७ धरि अध्ययन केलहुँ, ओतहु मिथिलाक महान् विद्वान् लोकनि छलाह जेनाकि पूर्व कुलपति डा. गंगानाथ झा एक महान् मीमाँसा शास्त्रविद् (जेकर हम स्वयं सेहो अध्येता बहुत समय तक लेल रहलहुँ)। हिनकहि महान् योगदान सँ कुमारिल भट्ट केर तंत्रवर्तिका, श्लोकवर्तिका आ शाबरभाष्य आदि केर संस्कृत सँ अंग्रेजी मे अनुवाद संभव भेल, एहि चलते हम व्यक्तिगत रूप सँ सेहो लाभान्वित भेलहुँ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय मे न्यायाधीश रहबाक समय मे हम डा. गंगानाथ झा पुस्तकालय, अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद मे यैह ग्रंथ सब अध्ययन करय लेल जाइत छलहुँ जे विभिन्न कानूनी कथ्य केर व्याख्या मे हमरा मददगार होइत छल।

हमहु पूर्व मीमाँसा केर विज्ञ-अध्येता रहलहुँ किऐक तँ एहि शास्त्र द्वारा गूढतम् सूत्र-सिद्धान्तक पूर्ण व्याख्या सहज बनैछ। एहि शास्त्र केर उद्भेदन मिथिलाक किछु विद्वान् लोकनि केने छथि। इलाहाबाद उच्च न्यायालय केर न्यायाधीश रहैते हम एक पोथी ‘The Mimansa Rules of Interpretation’, मीमाँसा विषय पर अंग्रेजीमे एकमात्र (बाकी सब संस्कृत मे अछि) तेकर हस्तलेख तैयार कय लेने रही आ प्रकाशक केर खोजी मे रही। इलाहाबाद केर एक समारोह मे मिथिला विश्वविद्यालय केर एक प्रोफेसर संग भेट भेल, हुनका सँ एहि पोथीक विषय मे कहलियैन, हम कहलियैन जे “महोदय, अहाँ राजा जनक केर भूमि मिथिला जतय मीमाँसा शास्त्र केर एक सँ बढिकय एक विद्वान् मर्मज्ञ भेला ताहि ठाम सँ छी, कृपया एहि पुस्तक केँ प्रकाशन कराउ।” ओ सकारात्मक जबाब सेहो देलनि, मुदा बाद मे किछुओ नहि केलनि।

मैथिली, मिथिलाक भाषा, सबसँ मीठ भाषा मे सँ एक जे हम आइ धरि सुनलहुँ से अछि हलाँकि हम बुझि नहि पबैत छी। जहिया हम मद्रास उच्च न्यायालय केर प्रमुख न्यायाधीश छलहुँ, ओतय एक तमिलियन महिला वकील मैथिली नामक छलीह तिनका सँ भेट भेल छल। हम हुनका सँ पूछने रही, “कि अहाँकेँ अपन नामक अर्थ पता अछि”, ओ कहने छलीह जे, “नहि”। तखन हम हुनका कहने रहियैन जे एकर माने ओ जे मिथिला सँ होइथ, उत्तर बिहार मे, महान दार्शनिक राजा आ सीताजी जिनकर विवाह भगवान् राम संग भेलनि तिनक पिता जनक आ भारतक किछु महान् विद्वानक भूमि मिथिला ताहि ठाम सँ होइथ।

किछु दिन पूर्वहि हमरा मिथिला भ्रमण पर जयबाक आमंत्रण भेटल छल। किछु आन-आन काज मे फँसल रहलाक चलते हम ओहि मौका केँ उपयोग नहि कय सकलहुँ, मुदा जँ आमंत्रण यथावत् रहय तऽ हम जरुर एकरा हासिल करबाक लेल आतुर रहब। हम इमेल आइडी mark_katju@yahoo.co.in अछि।

– अनुवादक – प्रवीण नारायण चौधरी

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