मिथिलाक अति-महत्वपूर्ण नक्षत्र केर अस्तः नहि रहलाह डा. हेतुकर झा

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अगस्त २०, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

मिथिलाक नामी विद्वान् – विचारक – शोधकर्ता – लेखक – इतिहासकार – शिक्षाविद् डा. हेतुकर झा केर निधनक समाचार सँ मिथिला मे दुःख आर शोक केर माहौल बनि गेल अछि। काल्हि १९ अगस्त, २०१७ केँ संध्या ८ बाजिकय १० मिनट पर हुनकर निधन होयबाक समाचार घरक लोक मार्फत भेटल अछि। ओ बहुत दिन सँ बीमार चलि रहल छलाह, हालहि दिल्लीक गंगाराम अस्पताल सँ इलाज करा पटनाक घर वापस भेल छलाह।

दरभंगा आकाशवाणी सँ जुड़ल वरिष्ठ संचारकर्मी मणिकान्त झा श्रद्धाञ्जलि दैत कहलनि अछि जे डा. हेतुकर झा केर मृत्युक समाचार समस्त मिथिलावासी लेल अपूरणीय क्षति थिक। डा. झा पटना विश्वविद्यालय मे समाजशास्त्र विषयक विभागाध्यक्ष पद सँ अवकाश ग्रहण कएने रहथि, संगहि मैथिली भाषा-साहित्य ओ मिथिलाक पहिचान एवम् विशिष्टताक महान संरक्षक कल्याणी फाउंडेशनक मैनेजिंग ट्रस्टी छलाह।

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालयक पूर्व आचार्य डा. सतीरमण झा अपन श्रद्धाञ्जलि सन्देश मे प्रसिद्ध समाजशास्त्री एवं मैथिलीक प्रख्यात साहित्यकार डा. हेतुकर झाक निधनक दुखद समाचार सँ मैथिल/मैथिली केँ अपूरणीय क्षति भेल अछि । अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध डा. झा मिथिला/दरभंगा क दुर्लभ ओ ऐतिहासिक अनेक शोध ग्रन्थक प्रकाशन/लेखन/सम्पादन द्वारा अपन कीर्तिसँ बौद्धिक जगत मे चिरस्मरणीय रहताह । अश्रुपूर्ण नमन ओ श्रद्धाञ्जलि!

अपना पाछाँ धर्मपत्नी, तीन बालक सहित भरल पूरल परिवार छोड़ि गेलाह अछि डा. हेतुकर झा। अंतिम संस्कार आइ प्रात:काल हिनक पैतृक गाम सरिसवपाही मे कयल जेतनि ।

डा. हेतुकर झा केर प्रारंभिक जीवन आ परिवार

हिनक जन्म ५ मार्च १९४४ केँ मधुबनी जिलाक सरिसव पाही गाम मे भेलनि। हिनक पिता बाबू छेमकर झा उर्फ बलदेव झा आ मायक नाम मोहिनी देवी छलनि। हिनक प्रारंभिक शिक्षा गामहि केर विद्यालय मे भेल छलन्हि।

इन्दिरा सिंह झा सँ हिनक विवाह १९६० मे भेलनि जिनका सँ तीन पुत्र छथिन। अपन पिताक नाम पर एकटा गैलरीक स्थापना लेल चन्द्रधारी मिथिला म्युजियम दरभंगा केँ अपन पारिवारिक समस्त विरासत दान कय देलनि।

शिक्षा

पटना साईंस कालेज तथा पटना विश्वविद्यालय सँ उच्च अध्ययन कएलनि। सोसियोलाजी (समाजशास्त्र) विषय सँ बीए प्रतिष्ठा पटना कालेज सँ १९६५ मे आर १९६७ मे एहि विषय सँ एमए कएलनि। तहिना पटना विश्वविद्यालहि सँ १९८० मे पीएचडी पूरा कएलनि।

आजीविका

पटना विश्वविद्यालय मे समाजशास्त्र विषयक व्याख्याता (लेक्चरर) केर रूप मे १९६८ मे कार्यारम्भ कएलनि, जखन कि एहि विषयक विभागाध्यक्षक पद सँ २००४ मे प्रोफेसर रहैत अवकाशग्रहण कएलनि। 

In 1984–85 he was on the interview-board of Fulbright Scholarship offered by USEFI द्वारा संचालित फूलब्राइट स्कौलरशीप केर इन्टरव्यु-बोर्ड मे १९८४-८५ मे रहलाह। सुलभ इन्स्टीच्युट अफ सोशल साईंसेज केर डायरेक्टर केर रूप मे २ वर्ष रहलाह।

बिहार केर समाज आ संस्कृति पर १९६८ मे शोध आरम्भ कएलनि। हिनक शोध केर निष्कर्ष एहि तरहक रहलः A basic problem is the break down of the traditional village community as a functioning whole.

संयुक्त राज्य अमेरिका केर US Educational Foundation द्वारा १९७२ केर फूलब्राइट छात्रवृत्ति सेहो हिनका भेटलनि।

प्रमुख प्रकाशन

डा. हेतुकर झा रचित पोथी केर निम्न प्रकाशन मुख्य अछिः

पोथी

  • Man in Indian Tradition: Vidyapati’s Discourse on Purush, Aryan Books International, New Delhi, 2002, ISBN 978-81-7305-217-0.
  • Perspectives on Indian Society and History: A Critique, edited, Manohar, New Delhi, 2002, ISBN 978-81-7304-422-9.
  • Mithila in the Nineteenth Century : Aina-i-Tirhut of Biharilal ‘Fitrat’, edited, Kameshwar Singh Bihar Heritage Series – 5, M.K.S.K.Foundation, Darbhanga,2001.
  • Amaranatha Jha, Makers of Indian Literature Series, Sahitya Akademy, New Delhi, 1997, ISBN 978-81-260-0294-8.
  • A Glimpse of Tirhut in the second Half of the Nineteenth Century: Riaz-I-Tirhut of Ayhodhya Prasad ‘Bahar’, edited, Kameshwar Singh Bihar Heritage Series – 3, M.K.S.K.Foundation, Darbhanga, 1997.
  • Ganganatha Jha, Makers of Indian Literature series, Sahitya Akademi, New Delhi, 1992, OCLC 30810275.
  • Social Structures of Indian villages: A Study of Rural Bihar Sage Publications India, New Delhi, 1991, ISBN 978-0-8039-9687-8.[6]
  • Upnivesh Kalin Mithilaka Gam O Gamak Nimna Varga (in Mithilli), Maithili Academy, Government of Bihar, Patna, 1988. This book discusses the condition of the lower classes of the region of Mithila (north Bihar) during the colonial period.
  • Colonial Context of Higher Education in India, Usha Publications, New Delhi, 1985.
  • Social Structures and Alignments: A Study of Rural Bihar, (with J.B.P.Sinha, Surendra Gopal and K.M. Tiwary) Usha Publications, New Delhi, 1985.
  • Autobiographical Notes Of Mahamahopadhyaya Dr. Sir Ganganatha Jha (edited), Ganganatha Jha Kendriya Sanskrit Vidyapeetha, Allahabad, 1976.
  • Tirhut in Early Twentieth Century: Mithila Darpan of Ras Bihari Lal Das, edited, Kameshwar Singh Bihar Heritage Series – 8, M.K.S.K.Foundation, Darbhanga, 2005.
  • Courage and Benevolence : Maharajadhiraja Kameshwar Singh (1907–1962), (edited) Kameshwar Singh Bihar Heritage Series – 10, M.K.S.K.Foundation, Darbhanga, 2007.
  • India : Some Crucial Questions, (edited) Kameshwar Singh Bihar Heritage Series – 12, M.K.S.K.Foundation, Darbhanga, 2007.
  • Reflections on History, Society and Social Change in India Hetukar Jha ed., Daanish Books, 2012, ISBN 978-93-81144-25-1.

आलेख

नोट्स – टिप्पणी

  1. Jump up to:a b “Management”. Maharajadhiraja Kameshwar Singh Kalyani Foundation. 2013. Archived from the original on 15 August 2014.
  2. Jump up^ The Maharajadhiraja Kameshwar Singh Kalyani Foundation is headquartered in the Kalyani Niwas (palace) in Darbhanga, which was the residence of the younger queen of the former Maharaja Kāmeshwar Singh of the Raj Darbhanga.
  3. Jump up^ Srivastava, Amitabh (3 January 2011). “The new Bihari”India TodayArchived from the original on 15 August 2014.
  4. Jump up^ Lindberg, Staffan (30 August 2011). “Patna, Bihar – in another country?”. Swedish South Asian Studies Network (SASNET), Lund UniversityArchived from the original on 15 August 2014.
  5. Jump up^ “Hetukar Jha (1944–)”. Open Library.
  6. Jump up^ Reviewed:Henry, Edward O. (1993). “Book Reviews – South Asia”The Journal of Asian Studies52 (4): 1056–1057. doi:10.2307/2059411.
  7. Jump up^ Dube, Leela (1978). “On the Applicability of the Concept of Sanskritization: Comment on Hetukar Jha”. Indian Economic & Social History Review15 (4): 521–523. doi:10.1177/001946467801500406.

साभारः विकीपेडिया

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