राजनीतिक दाव केर खेल मे नीतीश कुमार केर टक्कर नहि

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सम्पादकीय

जुलाई २७, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

राजनीति केर दाव खेलेनाय नीतीश कुमार केर विशेषता

बिहार केर राजनीति मे महागठबंधन निर्माण सँ लैत नव सरकार गठन आर सरकार चलेबाक सैद्धान्तिक आन्तरिक सहमति – हर डेग मे नीतीश कुमार केर नेतृत्वक जतेक प्रशंसा कएल जाय ओ कम होयत। देश मे जतय एक दिशि मोदीक आँधी चैल रहल छल, ताहि समय आँधी केँ रोकबाक सामर्थ्य बनेबाक आ देखेबाक कार्य नीतीश कुमार केर तीक्ष्ण राजनीतिक सुझ-बुझ सँ संभव भेल छल। राज्य मे नीतीश कुमार केर मोदी-विरोधी होयबाक बात सँ एक तरहक विरोधी माहौल रहितो अपन घोर दुश्मन राजनीतिक पक्ष सँ बड़ा सफाई सँ ओ जुड़ि गेला, नाम पड़ल ‘महागठबंधन’ आर मोदीक विजय रथ केँ नहि सिर्फ रोकल गेल बल्कि सौंसे देशहि मे ‘मोदी-आँधी’ आगू एहि तरहक प्रयोग स आगू निरन्तरता नहि पायत – कतेको पोलिटिकल पण्डित एतेक तक कहय लगलाह।
 
राजनीति मे व्यक्तिक नेतृत्व वजनदार होएतो दल मुताबिक विचारधारा आ सिद्धान्तक पालन सेहो जरुरी होएत छैक। महागठबंधन मे तीन मुख्य विचारधाराक संगम संग आरो कतेको छोट-छोट धारा सब आबिकय मिल गेल छल। राज्य संचालन लेल बनाओल गेल अदृश्य समझदारी मे मुख्यतया एहि बातक मजबूत समझौता छल जे कियो एक-दोसराक प्रोटोकोल मे हस्तक्षेपकारी भूमिका निर्वाह नहि करत। सब स्वतंत्र रूप सँ काज करत। लेकिन सरकारी पद आ जिम्मेदारी केँ वितरण व्यवस्था मे दुइ प्रमुख दल जदयू आ राजद केर पास बेसी कार्यभार छलैक। एहि विन्दु पर दुनू मे द्वंद्व तखन आरम्भ भेलैक जखन शासन व्यवस्था मे राजद केर कार्यकर्ता-नेता अपन बलथूथ्री पूर्वहि जेकाँ फेर सँ चलाबय चाहलक – प्रशासन पर अपन बेसी हिस्सेदारीक दाबी झाड़य लागल आर विदिते अछि जे एहि वर्चस्वक लड़ाई मे बिहारक चुस्त-दुरुस्त प्रशासन एक बेर फेर लूज बनि गेल आर राजनीतिक आका सब केँ प्रसन्न राखय लेल ओकर नेता-कार्यकर्ता सभक तलवा चाटय लागल। जंगलराज-२ केर आगाज भेल सौंसे पसैर गेल। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहितो चुनावी परिणाम मे दोसर पैघ राजनीतिक दल केर नेता होयबाक कारण कतहु न कतहु ई सब देखितो समाधान लेल समधानल डेग नहि बढा सकैत छलाह आर ओ पेशोपेश मे पड़िकय कोहुना दिन काटि रहल छलाह।
 
पैछला वर्ष करीब-करीब यैह मौसम मे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संग बिहार मे बाढि आ सुखाड़ केर स्थिति सँ निपटबाक मामिला मे भेल एक अन्तरंग भेंटघांट मे बिहार केर प्रगतिक नव आधारशिलाक सोच बनि गेल छल। एहि भेंटक बाद नीतीश कुमार केर बाडी लैंग्वेज कहि देने छल जे परिवर्तन कोनो समय आबि सकैत अछि। गोटेक राजनीतिक भविष्यवक्ता सब ओहि समय राजनीति केर गणित सेहो जोड़ि लेने छलाह। लेकिन शनैः शनैः दाव खेलेबाक सही बेर बनल बिहार केर राज्य संचालन केर सबसँ पैघ दल राष्ट्रीय जनता दल केर मुखिया परिवार केँ भ्रष्टाचारक मामिला मे घेराव केलाक बाद। जखन अहाँक घरक नींब जातीय बहुल्यताक दंभ पर ठाढ होयत, आर ताहि पर सँ अहाँ शासन-प्रशासन केँ अपन मुठ्ठी मे राखि कार्यकर्ता-तुष्टीकरण मे आमजन केँ समस्या देबाक कार्य करब आर एम्हर लूट-भ्रष्टाचार सँ अकूत काला धन अर्जन करब – ई सोनाक लंका बेसी दिन नहि टिकत। ताहू मे तखन जखन देश मे २०१४ सँ भ्रष्टाचार-मुक्त केन्द्रीय सरकार काज कय रहल छैक जे आर्थिक क्रान्तिक दिशा मे एक सँ बढिकय एक अदम्य हिम्मत केर कार्य सब कय रहल छैक, चाहे नोटबन्दी हो, चाहे कालाधन पर अंकूश हो, चाहे बेनामी सम्पत्ति केर धड़-पकड़ हो, चाहे टैक्स रिफोर्मेशन हो – हरेक काज देशक पुरान जंग लागल सिस्टम केँ बदैलकय एकटा ठोस आ मजबूत सिस्टम बनबैत न्यु इंडिया बनेबाक तर्ज पर काज कय रहल छैक। जखन ओ कहैत छैक ‘कांग्रेसमुक्त भारत’ तखन बुझि जाउ जे ओकर मनसा कि छैक। लेकिन एहेन बदलैत माहौल मे अहाँ अपन हरमुठाई करब त ई बेसी दिन नहि टिकत आर यैह भेल अछि अहाँक संग। नीतीश कुमार अन्तिम समय मे बुझबैत थाकि गेलाक बाद आखिर एहेन दाव खेलेला जे आब अहाँ बौखैत रहू, नीतीश अपन पुरान घर वापसी करता, सरकार बनेता आ अहाँ हुनकर टांग खींचय लेल लागब – यैह सब चलत किछु दिन। परन्तु देश बदैल रहल अछि। एहि समय कमजोर डेग बढायब आरो अहाँ केँ नोकसान देत।
 
हरिः हरः!!
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