मैथिली साहित्य लेल अच्छे दिनः आबि रहल अछि २ गोट महत्वपूर्ण पोथी

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जुलाई २२, २०१७. मैथिली जिन्दाबाद!!

पटना सँ संस्कृत आ मैथिली साहित्यकर्मी भवनाथ झा सोशल मीडिया मार्फत जनतब दैत कहलनि अछि जे मैथिली साहित्य केँ जल्दिये दुइ गोट अत्यन्त महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धि भेटय जा रहल अछि। भवनाथ बाबूक निम्न पोस्ट स्वतः सब बातक जनतब दैत अछिः

मैथिलीक प्रसिद्ध उन्नायक बाबू भुवनेश्वर सिंह भुवनक पितामह बाबू ललितेश्वर सिंहक सम्पादन में 1912 ई. मे प्रकाशित दू टा ग्रन्थक पता लागल। पहिल अछि मैथिलभक्तिप्रकाश आ दोसर संक्षिप्त तन्त्राह्निक। पहिल पुस्तक मिथिलाक प्राचीन मैथिली गीत सभक संकलन मे महत्त्वपूर्ण रहल। विद्यापतिक नाम पर प्रख्यात “जय जय भैरवि असुर भयाउनि” गीत प्रथमतः एही पुस्तकमे अन्य तीन गीतक संग संकलित भेल आ बिसैवार विद्यापतिक नाम पर चर्चित भए गेल। एकर संकलन आ सम्पादनमे महावैयाकरण दीनबन्धु झाक सेहो योगदान रहल।

दोसर पुस्तक संक्षिप्त तन्त्राह्निक मैथिल परम्पराक अनुरूप दैनिक नित्यकर्मक पुस्तिका थीक। एहिमे प्रातःकाल सँ रात्रिशयन पर्यन्त सभटा कृत्यक विवेचन तन्त्रोक्त मार्गसँ कएल गेल अछि। पं. गोविन्द झाक भूमिकाक संग हमर सम्पादनमे ई दूनू पुस्तक मुद्रणक लेल प्रेस मे चल गेल अछि।

 

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