दीना-भदरीः श्रमिक-मजदूर केर हक लेल लड़निहार गाँधी-मार्क्स, आइ धरि ओतबे प्रासंगिक

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मिथिलाक ऐतिहासिक विभूतिः लोकदेव दीना आ भदरी

– प्रवीण नारायण चौधरी

(प्रेरणास्रोतः लोकसंस्कृति कोश – मिथिला खंड, लेखकः डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव)

मुसहर जाति मे उत्पन्न दुइ श्रमिक-जननायक लोकदेव केर नाम दीना आ भदरी मिथिलाक पुण्य भूमि मे भेल छथि। दीना आ भदरी सहोदर भाइ छलाह। ई सब जोगियानगर – वर्तमान राजविराज (सप्तरी, नेपाल) केर निवासी कैलू सरदार केर पुत्र छलाह। हिनकर मायक नाम निरसूदेवी छल। बच्चहि सँ दुनू भाइं खूब तेजस्वी, अद्भुत बलशाली, जुझारू आ श्रमिक नायक केर रूप मे लोक प्रसिद्ध होवय लगलाह। हिनका लोकनिक कुश्तीक धाक् दूर-दूर धरि प्रसिद्ध भऽ गेल छल।

 
ई सब अपन पैतृक खेती अपनहि हाथ सँ करैत छलाह। हिनकर हाथक कोदारिक वजन पाँच मन कहल जाएछ। ई सब बीघाक बीघा खेत एक दिन मे कोड़ि कय राखि दैथ। हुनक सहयोगी मित्र केर नाम छल – जोगमल पहलमान। दीना आ भदरीक केर विवाह बरहानगर केर रहबैया फूदन सदाक बेटी क्रमशः हंसा आ संझा संग भेल छल।
 
एक बेर जाँगर गामवासी कनक सिंह अपन खेत मे जबर्दस्ती मजदूरी कयबाक लेल दबाव देबाक लेल दीना-भदरीक घर पहुँचलाह। मुदा दुनू भाइ कनक सिंह पर १२ पसेरीक लोहंगर खण्डा लय केँ मारय लेल छूटलापर ओ भागिकय अपन गामक गठुल्ला मे नुका गेल। मुदा एहि अपमानक बदला लेबाक लेल कनक सिंह खूब तपस्या करय लागल। कहल जाएछ जे बाघेश्वरी देवी सँ दीना-भदरीक मारबाक वरदान प्राप्त कय ओ बुधनी नामक डायन केर सहायता सँ कट्टैया जंगल जे भीमनगर (वर्तमान बैरेज) समीप अछि ओहि ठाम शिकार खेलाएत समय दुनू भाइ केँ मरबा देलक।
 
दुनू भाइ दिव्य अवतारी लोक छलाहे, देहान्त भेलाक बादो ओ सब सूक्ष्म शरीर धारण कय अपन लोक-प्रभाव केँ निरंतरता दैत रहलाह। श्रमिक वर्ग पर होयवला अत्याचार आ मुसहर जाति पर गाढ-विपत्ति एला पर दीना-भदरी केर प्रत्यक्ष प्रभाव सँ सब दुःख दूर भऽ जाएक। ई परंपरा आइयो धरि आस्थावान् लेल विद्यमान् अछि। दीना-भदरीक मुख्य मददगार नंगरागोड़िया (जोगियानगर सँ पूब) केर ग्रामवासी जीतन यादव केँ मानल जाएत अछि, कहल जाएछ जे यैह दीना-भदरीक मृत शरीर केर दाह-संस्कार अपना हाथ सँ कएलनि।
 
दीना-भदरीक अनेकानेक वीर-गाथा लोककथा मे प्रचलित भेटैत अछि। मिथिलाक लोकसाहित्य पर काज कएनिहार एहि प्रचलित कथा सब केँ पुस्तकक रूप मे प्रकाशित सेहो करौलनि अछि। दीना-भदरीक वीरगाथा सेहो मुसहर जनसमुदायक लोकगान मे भेटैत अछि। मैथिली-मिथिला अभियानी तथा संचारकर्मीक संग लोक-साहित्यपर विशेष काज कएनिहार श्याम सुन्दर यादव पथिक केर मुताबिक दीना-भदरी सँ जुड़ल अनेको ऐतिहासिक साक्ष्य सब आइयो भेटैत अछि। एहि पर पुरातात्विक खोज केर आवश्यकता पर ओ जोर दैत कहैत छथि जे कम सँ कम हाल धरि मौजूद हुनका सब सँ जुड़ल स्मृति-चिह्न सब पर्यटक लेल खास आकर्षण त अछिये, ओ सब जाहि विषय यानि श्रमिक-मजदूरक हक-हित लेल संघर्ष करैत अपन प्राणक आहूति देलनि आर तदोपरान्त अपन सूक्ष्म शरीर सँ पर्यन्त ओहि जनसंघर्ष केँ बल प्रदान केलनि ईहो बड पैघ सन्देश दैत अछि जेकरा राज्य द्वारा उचित प्रचार-प्रसार आ संरक्षण भेटबाक जरुरति छैक। तहिना लोकदेव केँ राष्ट्रीय विभूतिक रूप मे मान्यता दियेबाक संघर्ष कय रहला अभियानी आ भोर नामक संस्थाक संचालक राजकुमार महतो दीना-भदरी केँ नेपालक राष्ट्रीय विभूति घोषित करबाक मांगक संग एखन धरि मुसहर जनसमुदायक धिया-पुता मे शिक्षाक अवस्था कमजोर रहबाक बात दिशि सभक ध्यान आकृष्ट करैत मानव जीवनक मुख्य धारा संग ओकरो सब केँ जोड़बाक दिशा मे कार्य करबाक लेल प्रेरित करैत स्वयं छात्रवृत्ति उपलब्ध करबैत एहि विन्दु पर कार्य कय रहला अछि।
 
दीना-भदरी सँ जुड़ल किछु लोक-गाथा
 
मोरंग केर राजा भीमसेन केँ बुधनी डायन बड सतायल करैत छलैक। भीमसेन केर विनती पर दीना-भदरी भीमसेन केँ मदद केलाह आर बुधनीक योगबल केँ समाप्त करबाक लेल ओ मक्का-मदीनाक मकेश्वरनाथ महादेव जे आब सऊदी अरब मे मुसलमान धर्मावलम्बीक सब सँ पवित्र आ पैघ तीर्थ छैक ताहि मठ मे पहुँचिकय कठोर तप-बल सँ वरदान प्राप्त करैत मोरंग केर प्रजाक दुःख दूर कएलनि।
 
कुनौली (नेपाल-भारत केर सीमा, वर्तमान सुपौल जिला मे) केर राजा जोरावर सिंह छलाह। ओ ओहि ठामक मुसहर जाति पर क्रूर अत्याचार कएल करैत छलाह। बिना भैर पेट भोजन खुऔने आ उचित मजदूरी देने ओ मुसहर सब सँ जंगल मे जगर्दस्ती कास-पटेर कटबाकय मथबोझी उघबबैत छलाह। गरीबक दशा देखि द्रवित दीना-भदरी लौकिक शरीर धारण कय ओतुका मजदूर केँ संगठित कय जोरावर सिंह केर अत्याचारक विरुद्ध कठिन संघर्ष कएलक। अन्त मे जोरावर केँ मारिकय ओ सब मजदूर सब केँ ओकर आतंक सँ मुक्त कएलाह। तहिया सँ दीना-भदरी केर मुसहर जाति द्वारा जाति-पूजा होमय लागल। कतेको स्थान पर गह्वर आ छोट-छोट मन्दिर बनाकय हुनका लोकनिक आराधना-पूजादि होमय लागल।
 
दीना-भदरीक सम्पूर्ण जीवन जमीन्दारी-सामन्ती जुल्म केर विरोध मे बीतल आर हुनका लोकनिक मृत्युक कारण सेहो यैह बनल। डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव हुनका वर्तमान जनजीवनक आधार पर गाँधी आ मार्क्स सँ तूलना करैत छथि। दीना-भदरी केँ प्रेरणास्रोतक रूप मे स्थापित करबाक लेल राज्य सँ उचित अनुशंसा अहु आधार पर उचिते बनैत छैक। मिथिलाक लोकविभूति सँ सदिखन किछु न किछु सीखबाक लेल भेटैत अछि। बहत रास बात किंवदन्ति मे ताहि युग अनुरूप आइ काल्पनिक आ मिथक समान बुझेलाक बादो मूल विषय बेजोड़ आ प्रेरणादायक बुझनाय स्वाभाविक छैक। अतः एहि दिशा मे वर्तमान अभियानी लोकनि केँ हम सब वृहत् स्तर पर सहयोग उपलब्ध करबैत एहेन महान लोकपुरुष केँ समाजक बीच सम्मानजनक ढंग सँ बेर-बेर स्थापित करी।
 
हरिः हरः!!
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