गोरखालैन्ड केर मांग आ औचित्य, मिथिलाक जनमानस लेल अनुकरणीय

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विचार

– राजन झा

अपन संस्कृति आ भाषा कतेक प्यारा होय छै से दार्जिलिंग के रहनिहार गोरखा जे नेपाली भाषी छथि, हुनका से मैथिल सब के सीख लेनाय परम आवश्यक अछि। दार्जिलिंग जे पश्चिम बंगालक एकटा बहुत ही छोटा हिस्सा छैक आर जे अपन प्राकृतिक सौंदर्यता के कारण देश विदेशक पर्यटक के आकर्षणक केंद्र अछि से आय काल्हि आन्दोलनक हिंसा सँ जरि रहल य। राज्य सरकार द्वारा आंदोलन करय वाला नेताक घर पर छापा पैड़ रहल छै। ई हिंसा में बहुत रास लोकक जान जा चुकल अछि। ई हालातक कारण हम सब इतिहास से एखन धरि के  विश्लेषण क के समझय के कोशिश क रहल छी। देश में बहुत बेर भाषाक आधार पर राज्यक विभाजन भेल छल। 1960 से एकर सुरुआत भेल जखन मराठी बाजे बला के महारष्ट्र आ गुजराती बाजे बला क्षेत्र के गुजरात बनाओल गेल। एकर बाद हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, आ तेलंगाना सहित बहुत रास राज्य बनाओल गेल। किछु के आधार भाषा त किछ के आधार आर्थिक पिछड़ापन छल। ओतहि दार्जिलिंग के सिक्किम में विलय केर मांग या एक अलग राज्यक यथा गोरखालैंड केर माँग पुरान अछि।

इतिहास केर अध्ययन करय सँ पता चलय अछि की दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र सिक्कीमक हिस्सा रहल छल। 1841 ईस्वी तक दार्जिलिंग सिक्किम केँ लगान दैत रहल छल। बाद में अंग्रेज दार्जिलिंग केँ सिक्किम सँ अलग कय केँ बंगालक हिस्सा बना देलक। तखने सऽ दार्जिलिंग पश्चिम बंगालक हिस्सा अछि।

भारत में राज्यक गठन छेत्रक संस्कृति खास क के भाषाई सांस्कृतिक आधार पर होयत रहल छल मुदा दार्जिलिंग केँ पश्चिम बंगाल के साथ मिलाकय ओकर गोरखाली संस्कृति केँ पश्चिम बंगाल केर साथ मिलाकय खत्म कयल जा रहल अछि । ई अहिना अछि जेना हमर मिथिला  क्षेत्र केँ अन्य भाषाई क्षेत्रक संग मिलाकय मिथिलाक संस्कृति आ मैथिली भाषा केँ खत्म कयल जा रहल अछि।

पश्चिम बंगाल केर मुख्यमंत्री द्वारा हाल में 10वीं तक केर शिक्षा बंगला में अनिवार्य करि देनाइ वर्तमान हिंसा भड़कबाक आ एक बेर फेर सँ गोरखालैन्ड अलग राज्यक मुद्दा प्रकाश मे एबाक सबसँ पैघ उदहारण  अछि।

1865 ईस्वी मे जखन अंग्रेज दार्जिलिंग में चाय केर बागान शुरू केलक त बहुत रास मजदुर एतय काम करय लेल आयल छल। बगल मे नेपाल आ पहाड़क शृंखला रहबाक कारण गोरखाली मूलक नेपालीभाषी लोक एतय बेसी रहय लागल। आजादीक बाद भारत और नेपाल में शांति आर दोस्तीक खातीर 1950 केर समझौता कयल गेल। सुगौली संधिक परिणाम अनुसार लगभग १८६० मे नेपाल-भारतक सीमा विभाजन भेलाक बाद ई हिस्सा भारत में आबि गेल। आजादीक बादहि सँ एतुका गोरखाली मूलक लोक सब अलग राज्यक मांग लगातार करैत आबैत रहल अछि। बंगाली आ गोरखक संस्कृति एक दोसर सँ अलग हेबाक कारण ई आंदोलन केँ बल भेटल।

गोरखालैंड माँगक सुरुआत सबसँ पहिने गोरखा लिब्रेशन फ्रंट केर सुभाष घीसिंग केने रहथि। पहिल बेर 1980 में घीसिंग गोरखालैंड नाम देलखिन। एकर बाद काफी हिंसा हेबाक कारण सँ पश्चिम बंगाल केर तत्कालीन राज्य सरकार गोरखा हिल कौंसिल बनेबाक लेल राजी भेल छल । घीसिंग केर लीडरशिप में अगला 20 साल तक ओतय शांति बनल रहल लेकिन विमल गुरुंग केर उभरलाक बाद हालत बदतर भ गेल । गोरखा लिब्रेशन फ्रंट से अलग भ विमल गुरुंग गोरखालैंड के मांग फेर सँ तेज भ गेल।

जाहि हिस्सा लय केँ गोरखालैंड बनेबाक मांग कयल जा रहल अछि ओकर कुल एरिया 6246 वर्ग km अछि। ओतय के लोग गोरखा नेपाली भाषा बाजय छै। आंदोलनकारी चाहैत अछि जे केंद्र सरकार गोरखालैंड बना कय ओकरा सभ केँ अपन संस्कृति केँ सुरक्षित करय के मौका देथि। मुदा राजनीति मे सक्रिय पक्ष गोरखालैंड केँ नेपालक साथ जाय के डर सँ अलग राज्य बनेबा सँ कतराएत प्रतीत होएत अछि।

मुदा एकटा सवाल ईहो अछि जे जतय के लोक भारतीय सीमा पर अपन शौर्य लेल जानल जाएत अछि ओय क्षेत्रक लोक पर अपन देशक साथ छोड़य के शंका करनाय उचित अछि की? की हुनका सभ केँ अपन संस्कृतिक संरक्षण करबाक अधिकार नय अछि? नव भाषा सीखनाय कतहु सँ गलत नहि अछि, मुदा कोनो भाषा केँ जबरदस्ती थोपबाक बात पूर्णरूपेण गलत अछि। किछु लोक एहि आन्दोलनक तूलना कश्मीर सँ करैत आछि मुदा हमरा अनुसारे दुहुक तुलना नहि कयल जा सकैत अछि, कियाक तऽ कश्मीर घाटीक आंदोलन करयबला सब धर्मान्धता सँ ग्रसित भऽ कय पाकिस्तानक झंडा लहरबैत अछि; मुदा गोरखालैंड केर मांग केनिहार भारतक राष्ट्रीय ध्वज लय केँ सड़क पर निकलल अछि। ओ बस एतबहि चाहैथ  अछि जे केंद्र सरकारक कनिक सहयोग सँ ओकर संस्कृति बचि जाय आ ओकर मूल अस्तित्व बचल रहैक।

2011 में गोरखालैंड एडमिनिस्ट्रेटिव कौन्सिलक समझौता केंद्र , राज्य आ जीजेएम के बीच भेल छल जाहि में बहुत रास बिभाग एहि कौंसिल केँ देबाक बात भेल छल, जेना शिक्षा आ संस्कृति सहित विकास लेल जरुरी बिभाग – मुदा ईहो एकटा कागजी समझौता बनि कय रहि गेल अछि। जकर परिणामस्वरूप आ बंगाली थोपबाक कारण ई हिंसाक दौर सुरु भेल अछि। जीटीए द्वारा बजायल गेल बंदक दौरान हिंसाक कड़ाई सँ कुचलल गेल आ ई बात सेहो सही अछि की लोकतंत्र में हिंसाक कुनु जगह नहि मुदा कियो अपन संस्कृति केँ बचेबाक लेल अलग प्रदेशक माँग करैत बंदक आह्वान करय छै आ आम जनता ओकर साथ दय छै त प्रदेश सरकार गोली कियाक चलौतैक?

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