बरसाइत पाबैन कोना मनायब, विधान आ कथा सहित

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मिथिलाक लोकपाबैनः बरसाइत (वट सावित्री)

साभारः व्हाट्सअप सँ संकलित

बेरसाइत पूजा (वट-सावित्री) नवविवाहित कनियाँकऽ एहि वर्ष25 मई 2017 गुरुवार कऽ दिन।

सामग्री –
1. बियैन-8 टा
2. डाली -8 टा
3. बोहनी-1
4. अहिवात
5. उड़ीदक दालि के बङ-14
6. सुतरी
7. सरवा -२
8. मईटक नाग-नगीन
9. केरा क पात
10. लावा
11. एकटा सरवा में दही
12. मुंग (फुलायल नवेद्यक वास्ते )
13. चना फुलायल
14. लाल कपङा
15. कनिया -पुतरा
16. साजी
17 अरवा चौर
18. जनॐ -एक जोङ आ गोटा सुपारी
19. फल ,फूल ,मिठाई
20. कांच हरैद ,दुईब,गोटा धनिया
21 बिन्नी (ललका कपङा में चौर,दुईब , हरैद बांधल)
22 .दूध

विधः
एक दिन पहिने कनिया नहा धोय कए अरवा भोजन करथिन. साँझ खन भगवती, महादेव, ब्राह्मण, हनुमान आर गौरी कें गीत गावि, दुईब, कांच हरैद, धनिया (कनी) फेंट कए गौर बनत, जकरा ढउरल सरवा पर एकटा सिक्का पर गौरी राखि पान क पात स झाँपि, पान क पातक ऊपर सिंदूरक गद्दी राखि ललका कपडा सँ झाँपि भगवती लग राखि देबइ।

उड़ीद दालि केर फुलाकय १४ टा बड़ पकैल जायत, जकरा सरेला पर सुतरी में गांथल जायत (बिना सुइया के) बड़ गुथल सुतरी के बोहनी के मुँह पर बांधल जायत । केरा के पात पर सिन्दूर आ काजर सँ बिष-विषहारा लिखल जायत । राति खन कनी मुंग आ बेसी बूंट (कला चना ) फुलय ल पड़तय ।

वट सावित्री पूजा क दिन

नव कनियाँ नहा धो क सासुर स आयल नव कपङा पहिर के श्रृंगार कय, खोंइछ लय, भगवती क पूजा कय, हाथ में साजी (जाही में कनिया पुतरा रहत), आ माथ पर बोहनी (जाहि में लाबा भरल रहत आ जकरा मुँह पर सुतरी में बांधल 14 टा बर रहत)लय केँ भगवती केँ गोर लागि सब संगे बरक गाछ तर जेती । गाछ तर बोहनी में राखल लाबा कर के पात पर राखि देथिन आ ओही बोहनी में पानि भैर देथिन
गाछ तर अरिपन रहत, एकटा अरिपन के ऊपर 7 टा बिअनि रहत, आ सात टा डाली में फुलायल बूंट, फल, मिठाई राखल रहत।

गाछ तर अहिवात जरायल जैत

एक टा डाली में चाउर, सुपारी, जनेऊ, पैसा, फल, मिठाई राखल रहत जे पूजा के बाद पंडित केँ देल जायत । आम क पात पर 60(साइठ )ठाम फुलायल मुंग आ फल -मिठाई के नवेद्य लगायल जायत । एकटा बियनि पर आ एक टा आम पर पांच टा सिन्दूर लगा बङ के गाछ के जैङ में ‍‌‍‍राखल जैत । अरिपन पर विष-विषहारा लिखल पात राखि ओही पर मईटक विष -विषहारा राखल जायत । कनिया एक टा बरक पात केश में खोसती । सबटा ओरिआन बाद कनियाँ गौरी सबहक (सासूर बला, नहिअर बला जे राति में बनल आ विवाह बला) आगु नवेद्य राखि फूल आ सिन्दूर लय गौरी पूजती । ओकरा बाद बिन्नी हाथ में लय जांघ तर बोहनी राखि कथा सुनती (कथा ब्लॉग में नीचां उपलब्ध भेटत ) । कथा सुनला के बाद कनिया साड़ी के खूंट पर गाछ तर रखलाहा आम आ एक टा सिन्दूर क गद्दी ल के मौली धागा बांधैत गाछ के चारू तरफ पांच बेर घूमती । फेर गाछ तर राखल बियनि से गाछ के तीन बेर होंकैत गला मिलति । आब पुतरा के हाँथों कनिया के सिंदूरदान हेतई (कनिये करेती)
ओकरा बाद सबटा नवेद्य उसगरति ,आ विष-विषहरा के दूध लाबा चढेति । बोहनी में बांधल सबटा बङ के वायां हाथ के अंगुठा और अनामिका स तोरी के एक बेर आगु आ एक बेर पाछु फेकैत फकरा पढती-बर लिय(पाछु ), मर दिय (आगु ) । ओकरा बाद माथ पर फेर बोहनी उठेती, हाथ में साजी लेती आ भगवती घर में एती । गाछ तर राखल डाली सेहो उठी के भगवती घर में रखायत । भगवती के गोर लागि 7 टा अहिवाती केँ डाली देथिन आ सब पैघ सब के गोर लागि आशीर्वाद लेती।

कथा

एक टा गाम में एकटा ब्राह्मण अपना कनियाँ और सात टा पुत्र संगे खुशी खुशी रहेत छलाह Iहुनका घर के चौका में चिनवार लग एक टा नाग-नागिन अपन बिल बना क रहेत छल Iब्राह्मण क कनिया साँपक डरे प्रतिदिन भात पसेला क बाद ओकर गरम माँर साँप क बिल में ढारि दैत छलईथ जाहि सं साँप क सबटा पोआ(बच्चा ) सब मरि जाईत छल I निरंतर अपन पोआ सब के मरला सं क्रोधित भय नाग –नागिन एक दिन ब्राह्मण के श्राप देलखिन जे “जेना अहाँ हमार बच्चा सब के मारलउ तहिना अहाँ के वंश के सबटा बच्चा सब साँप के कटला से मरि जायत “I समयांतराल में ब्राह्मण के बङका बेटा के हर्षो- उल्लास सं विवाह भेलनि Iविवाहोपरांत ब्राह्मण बेटा कनियाँ के द्विरागमन करा अपना घर दिश बिदा भेला I रास्ता में किछु देर क वास्ते सुस्तेवा लेल एक टा वट वृक्ष क नीचा में दुनू बर कनियाँ बैसलाह Iओहि गाछ के जैङ में एकटा धोधैर चल जाहि में नाग-नागिन रहित छलईथ I नाग-नागिन धोधैर सं निकलि दुनू बर कनियाँ के डैस लेलखिन जाहि सं दुनू के मृत्यु भय गेल I ब्राह्मण क घर में दुःख के पहाङ टूटि परल I अहिना क कय ब्राहमण के छ्हो पुत्र के एक एक करि कय कसर्प-दोष सं मृत्यु भय गेलनि I ब्राह्मण –ब्राह्मणि चिंतित रहअ लगला आ अपन छोटका बेटा के हमेशा अपना आँखि के सामने रखैत छलैथ I बेटा के हमेशा झापि-तोपि के रखैत छलैथ कि कतहुँ साँप –बिच्छु ने काटि लई I ब्राह्मण क बेटा जखन पैघ भेला त धनोपार्जन हेतु घर से बाहर जेबा लेल जिद करय लगला I पहिने त हुनकर माता-पिता हुनका बाहर भेजवा लेल तैयार नई होईत छला ,फेर एही शर्त पर राजी भेला कि हमेशा अपना संगे एकटा छाता और जूता रखता I शर्त मानी ब्राह्मण बेटा घर सं बिदा भेला I जाईत-जाईत एकटा गाम लग पहुचला, गाम के बाहर एकटा धार छल ,ब्राह्मण बेटा जूता पहिर लेलथि आ धार के पार करअ लगला I तखने गाम के किछु लङकी सभहक झुण्ड सेहो धार पार करैत छल Iसब सखि सब ब्राह्मण के बेटा के जुत्ता पहिर पानि में जाईत देखि ठठहा के हंसअ लगली आ कह लगली कि – “हे देखू सखि सब केहन बुरबक छै ई ब्राह्मण बेटा पानि में जूता पहिरने अईछ “I ओहि झुण्ड में एकटा सामा धोबिन के बेटी सेहो छल से सखि सबके अपन तर्क देलखिन जे –हे सखि नई बुझलौं ,ब्राह्मण बेटा पानी में जूता एही दुआरे पहिरने ऐछ जाहि सं पनि में रहै बला साँप –कीङा ओकरा पैर मे नइ काटि लइ” I ब्राह्मण बेटा ओहि लङकी के तर्क सुनि चकित भेला I धार पार कय सब गोटा आगु बढ़ल ,धुप बेसी छल मुदा ब्राह्मण बेटा छाता अपना कांख तर दबने रहल, सब सखि सब मुँह झाँपी मुस्कुरैत रहलि आ सोचैत छलि ,जे एतेक धुप छै आ ई मानुष छत्ता कांख तर दबेने ऐछ Iबर रौउद छल आ गाम क उबर-खाबङ मैइटक रस्ता ,सब गोटा चलैत-चलैत थाईक गेल I रस्ता कात में एकटा बरका विशाल बङ क गाछ छल जकरा देख सब गोटा ओहि छाया में विश्राम करवा हेतु गाछ तर बैस रहल I ब्राह्मण बेटा जखने गाछ तर बैसला अपन कांख तर दबैल छत्ता खोइल ताइन लेलइथ I सब सखि सब फेर जोर सं हंस लागलि आ कह लागलि जे – “देखिअऊ इ मानुष के धुप छल त छत्ता कांख तर देवेने छल आ जखन गाछ तक छाया में बैसल ऐछ त छत्ता तनने ऐछ “I सामा धोबिन क बेटी जे ब्राह्मण बेटा के बार ध्यान सं देख रहल छालैथ,फेर अपन तर्क देलखिन जे –“ हे सखि सब अहाँ सब फेर नई बुझलौं ,इ ब्राह्मण बेटा गाछ पर रहै बला साँप-कीङा सं अपना क बचबै लेल गाछ तर छत्ता तनने ऐछ “I ब्राह्मण क बेटा जे बरि काल सं सामा बेटी के तर्क सुनैत छला ,ओकर बात सं ततेक प्रभावित भेला कि सोचलैथ कि अगर विवाह करब त एही चतुर कन्या सं करब Iब्राह्मण बेटा गाम क धोबिन लग गेला आ धोबिन सामा सं कहलखिन जे हम आहाँ क चतुर बेटी सं विवाह कर चाहैत छी I सामा धोबिन तैयार भय गेलि आ खुशी –खुशी दुनू के विवाह कय देलखिन I जखन विदागरी क समय आयल त सामा धोबिन कहलखिन जे –“हे बेटी हम त गरीब छी ,हमरा लग धन –दौलत किछु नहि अछि, अहाँ के हम विदागरी में कि दिय ?” सामा क बेटी ताहि पर उत्तर में कहलखिन जे –“हे माय अहाँ हमरा किछु नय मात्र कनी धान क लाबा ,कनी दूध ,बोहनी आ एक ता बियन दिय आ आशीर्वाद दिय जे हम अपना पति आ हुनकर वंश वृद्धि में सहायक होइयन I” सामा धोभिन सब चीज जे हुनकर बेटी कहलकैन ओरिआन कय क देलखिन आ आशीर्वाद दय दुनू बर कनियाँ के बिदा केलखिन Iब्राह्मण बेटा अपना कनियाँ क लय अपना गाम दिश चल लगला I चलैत-चलैत जखन दुनू गोटा थाईक गेला त विश्राम करवा लेल एक टा बङ गाछ के नीचा में रुकि गेला I सामा धोबिन क बेटी अपन माय क देल सबटा समान गाछ के निचा में राखि अपना वर संगे आराम करय लगलि I ओही बङ के जइङ में एकटा नाग अपना नागिन बिल में संगे रहैत छल Iगाछ के जैङ लग दूध, लाबा आ बोहनी में राखल पानि देखि नाग कय भूख और प्यास जागृत भय गेल आ नाग अपना बिल सं निकलि बाहर जेवाक लेल व्यग्र भ गेला I नागिन बार बार मना कर लागलैथ किन्तु नाग नइ मानलैथ आ बाहर आबि जहिना बोहनी में राखल पानी के पिबा लेल ओहि में मुहँ देलखिन, धोबिन बेटी नाग समेत बोहनी के हाथ सं पकङि अपना जाँघ तर में दाबि क राखि लेलैथ I नाग कतबो प्रयाश केलैथ निकलि न हि पेलैथI जखन बरि काल बितला क बादो नाग घुरि क नहीं अयलाह त नागिन बाहर निकललि आ देखलखिन जे नाग के त एकटा नव कनियाँ पकङने अछि I नागिन ओकरा से कहलखिन कि नाग क छोङि दिअऊ ,परन्तु सामा बेटी नइ मनलखिन I नागिन के निरंतर अनुनय –विनय क बाद धोबिन बेटी एकटा शर्त राखलखिन जे –“हे नागिन हम अहाँ के पति नाग राज के तखने छोङबनि जखन अहाँ हमरा पति आ हुनकर वंश के सर्प-दोष सं मुक्त करब संगहि हुनकर छबो भाई के जे मरि गेल छैथ के पुनः जीवित करब “ I नागिन विवश छलि धोबिन बेटी के शर्त मानवा लेल I नागिन स्वर्ग सं अमृत अनलेइथ आ ब्राह्मण के सबटा पुत्र ,पुत्रवधु के जीवित कय सर्प –दोष सं मुक्त कय सब के आशीर्वाद देलखिन I तखन जा क धोबिन बेटी नाग के छोङलखिन और अपन करनी लेल क्षमा माँगी नाग –नागिन के प्रणाम केलैथ I तखन नाग नागिन ब्राह्मण के सबटा पुत्र आ पुत्रबधु सबके आशीर्वाद दैत कहलखिन –“जेष्ठ मॉस के अमावश्या दिन विवाहित कनियाँ सब ज्यों बङ के गाछ के पूजा करति आ बिष-विषहारा के दूध लाबा चढ़ा हुनकर पूजा करती तँ हुनकर सब के सुहाग अखण्ड रहतेंन “I

नाग –नागिन सं आशीर्वाद लय ब्राह्मण क सातों पुत्र आ सातों कनिया जखन अपना घर पहूँचला त ब्राह्मण –ब्राह्मणि के प्रसन्ता के नई त कुनु ओर रहलनि न छोङ आ दुनू गोटा धोबिन सामा के बेटी के बहुत बहुत आशीर्वाद देलखिन Iओकरा बाद सब गोटा प्रसन्ता पूर्वक रहअ लगला I
समाप्त

।। नमस्कार , धन्यवाद ।।
।। जय मिथिला , जय मैथिल , जय मैथिली ।।⁠⁠⁠⁠

पूर्वक लेख
बादक लेख

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