मिथिलाक लोकप्रिय नाचः दुलरा दयाल

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मिथिलाक ऐतिहासिकता आ लोकसंस्कृतिः दुलरा दयाल नाच

दुलरा दयाल
 
दुलरा-दयाल नाम सँ मिथिलाक गाम-घर मे गीत गाबिकय नटुआ नाच होयबाक परंपरा रहल अछि। एहि गीत मे दयाल सिंह केर जीवन गाथा पर प्रकाश देल जाएत अछि। मिथिला मे व्याप्त डायन-जोगिन परम्परा सेहो खूब प्रचलित रहल अछि, आर एहि विधा मे सेहो लोकमानस मे सिद्धि आ उपलब्धिक प्रतिस्पर्धाक अनेक लोकगाथा पढय-सुनय लेल भेटैत अछि। किछु एहि तरहक विधा पर विस्तृत प्रेरणा भेटैछ दुलरा-दयाल केर नाच मे।
 
कि अछि किंवदन्ति? के छलाह दुलरा दयाल सिंह?
 
दयाल सिंह केर नाम सेहो लोकदेव केर रूप मे मान्य अछि। हिनका द्वारा हक्कल डायन अपनहि सासु केर सिद्धि सँ ऊपर जाय करीब ७०० आदमीक प्राण रक्षाक कथा गीत-नाटिकाक रूप मे गाबिकय आ नाचिकय प्रदर्शित कएल जाएछ। दुलरा दयाल सिंह स्वयं दरभंगा जिलाक भरौड़ा गामक निवासी मलसम्भर सिंह केर पुत्र छलाह। हिनक मायक नाम गजमोती तथा पत्नीक नाम अमरौटी देवी छलन्हि। दयाल सिंहक विवाह बखरी-सलौना गामक निवासी दुखरन सहनीक पुत्री संग भेल छलन्हि। हिनकर सासु बहुरा गोंढिन और सार मानिकचन्द छलखिन। खगड़िया जिलाक बखरी-सलौना क्षेत्र मे तंत्र सिद्धिक प्रचलन घरे-घर होयबाक बात प्रसिद्ध छलैक। आइयो ओहि क्षेत्र मे एहि पौराणिक विधाक मान्यता ओतबे प्रचलित मानल जाएछ।
 
दयाल सिंहक विवाह मे सात सौ लोक बरियाती पहुँचल छलाह। एहि विवाहक समय कोनो बात-विवाद अथवा अन्य प्रकरण मे दयाल सिंहक परीक्षा लेबाक लेल सासु आ सरहोजि द्वारा मंत्रक प्रयोग कय केँ सब सातो सौ बरियाती केँ गायब कय देल गेलैक। एहि चलते दयाल सिंह कामरूप-कमख्या पहुँचि सावर मंत्र सीखिकय सिद्ध तांत्रिक बनि बखरी लौटलाह आर अपन हक्कल डायन सासु बहुरा गोंढिन सँ बदला लय केँ अपन सातो सौ बरियाती केँ पुनः जियौलनि। तदोपरान्त अपन पत्नीक द्विरागमन कराकय भरौड़ा गाम वापस भेलाह।
 
एहि नाचक मार्फत समाज लेल सन्देश कि?
 
एहि प्रकरण केँ गीत आ नाच मार्फत लोकसमाज केँ एकटा सन्देश देल जाएछ जे परिस्थिति केहनो बिपरीत कियैक नहि हो, बहादुरी आ वीरता सँ संघर्ष केलापर ओहि बिपरीत-प्रतिकूलता सँ जीत हासिल कएल जा सकैत अछि। मिथिलाक लोकरीत मे एहेन विभिन्न रहस्यमयी विधा सब चलन-चलती मे रहल जे विज्ञानक चमत्कार सँ क्रमशः स्वतः उठाव केर क्रम मे अछि। डायन-जोगिन प्रथा आब विरले कतहु सुनय लेल भेटैछ।
 
हरिः हरः!!
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