मिथिलाक एहि इतिहास केँ कोनो जातिवादी अथवा विखंडनकारी राजनीति नहि मेटा सकैत अछि

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आलेख

– प्रवीण नारायण चौधरी

लोकदेव, भगताइ आ लोककल्याणः सन्दर्भ लालमैन चमार
 
मिथिलाक लोकरीति मे प्रसिद्ध जनश्रुति अलग-अलग क्षेत्र मे अलग-अलग महापुरुषक ऐतिहासिक वीरगाथा केँ नहि मात्र पुनर्स्मरण करैत अछि, बल्कि कतेको महापुरुष केर आत्मा गोटेक भगत कहेनिहार लोकक देहपर सवार भऽ जनकल्याणकारी कार्य आइयो धरि करैत आबि रहल अछि। आब राजनीति कएनिहार कतेको बुधियार लाला सभक मुंह सँ भले अहाँ ‘सीमांचल’, ‘कोसी’, आदि मिथिलाक उप-क्षेत्रक नाम सँ अन्तर्खंडीकरणक कार्य होएत देख सकैत छी, मुदा एतुका अकाट्य इतिहास जे लिपिबद्ध सेहो कएल गेल अछि ताहि मे उल्लेखित कथा-वस्तु आ ताहू सब सँ ऊपर प्रचलित जनश्रुति मे एहि महान लोकदेव सभक चर्चा सँ एहि विशिष्ट सभ्यताक प्राचीनता आ विशालता प्रमाणित होएछ।
 
डा. लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा लिखल गेल शोध-ग्रंथ “लोक संस्कृति कोश” मे एहेन लोकदेव सभक विशेष चर्चा भेटैत अछि। पूर्वी मिथिला मे वर्तमान बंगलादेश धरि मिथिलाक सीमा रहबाक बात सेहो एहि लोकदेव सभक चर्चाक क्रम मे पता चलैत अछि। प्राचीन मिथिलाक प्राकृतिक भूगोल मे जलजमावक क्षेत्र आ सघन जंगल सँ आच्छादित अनेको स्थानक चर्चा भेटैत अछि। ताहि आवोहवा मे वर्तमान जिला अन्तर्गत अनेको स्थान पर के लोकपुरुष कोना प्रसिद्ध भेलाह, किनका लोकदेवताक रूप मे कोन जाति-समुदाय केना स्वीकार केलक, एहि सब बातक विलक्षण चर्चा पढबाक-गुनबाक लेल भेटैत अछि। आउ, आइ एहि क्रम मे लालमैन चमार आ लाला बाबाक २ गोट कथा संछेप मे बुझी।
 
लालमैन चमार – चमार जातिक लोकदेव लालमैन केर नाम बड पैघ श्रद्धा सँ लेल जाएछ। हिनका बारे मे कथा कहल जाएछ जे लालमैन आ मनसा राम दुइ लंगोटिया मित्र छलाह। सब काज संगे करैथ। भोरहरबे उठिकय दुनू मित्र महींस चरेबाक लेल संगे निकलल करैथ। आदिकाल सँ मिथिलाक लोकरीति अनुरूप पोसल पशु केर चारा वास्ते सामूहिक चारागाह होएत रहल अछि। ई चारागाह गैरमजेरुआ आम जमीन होएत छल जे गामक जमीन्दार अथवा लोक-समाज द्वारा अपन स्वेच्छा सँ सामूहिक दान करैत बनाओल जाएत रहल अछि। लगभग सब गाम-समाज केर खेत-कलम दिशि एहेन चारागाह केँ व्यवस्थित कएल जाएत छल। आब त लोक स्वार्थ मे डूबल अपना-अपना लोभक घेरा मे बन्हायल सामुदायिक सहयोग सँ काफी दूर भऽ गेल अछि, मुदा लालमैन राम आ मनसा रामक समय मे केदलीवन एहने चारागाहक रूप मे उपयोग मे अबैत छल।
 
केदलीवन केर चारागाह नजदीक सघन वन सेहो छल जाहि मे बाघ-बाघिन सेहो समय-समय पर विचरन करैत देखल जाएक। आइ ई केदलीवन ‘नौहट्टा’ बथान सँ जानल जाएत अछी। वर्तमान समय सहरसा जिलाक नवहट्टा प्रखंड अन्तर्गत ई स्थल आइयो काफी प्रसिद्ध अछि। एक दिन लालमैन आ मनसा राम जखन महींस चरेबाक लेल केदलीवन गेलाह त एकटा लुल्ही बाघिन लालमैन केँ घेर लेलकनि। लालमैन वीर छलाह, ओ बाघिन संगे भिड़न्त करय लगलाह। स्वयं बलशाली रहितो ओ तिरिया होयबाक कारण पशु बद्ध नहि करबाक संकल्पित छलाह। कहल जाएछ जे ओ बाघ केँ नहि मारलनि। आ मित्र मनसा केँ शीघ्र गाम पर जाय लोक सब केँ मदैद लेल बजेबाक बात कहलखिन। संगहि ओ ईहो कहि देलखिन जे जँ एहि बाघिन सँ हम मारल जायब त हमर दाह-संस्कार केर व्यवस्था करब।
 
मित्र मनसा राम एहेन डरपोक छलाह जे बाघिन संग लालमैन केर भिड़न्तक समाद ओकर घर-परिवार केँ जानकारी दय स्वयं अपना घर मे नुका गेलाह। ओ घुरिकय फेर बथान दिशि नहि गेलाह। जाबत ग्रामीण आ सम्बन्धी सब ओतय पहुँचलाह ताबत लालमैन केर हड्डी-गुड्डी मात्र बचल रहल, बाघिन हुनकर देहक माँस नोंचिकय खा गेल छल। बाघिन द्वारा हतल गेला लालमैन केर आत्मा केँ मित्र मनसारामक ई गद्दारी पसीन नहि पड़लनि, ओ दिव्य शरीर धारण कय केँ अपन यार मनसा राम केँ खून बोकराकय मारि देलनि। ग्रामीण जखन मनसा राम केर शरीर खून बोकैर कय मरल अवस्था मे देखलक त सब बात एकटा भगता के मुंह सँ सुनि-बुझि दुनू गोटाक अन्तिम संस्कार केलक। तहिया सँ लालमैन बाबा लोकहित केर काज अपन सेवक केर देह मे प्रवेश कय भगताय केर माध्यम सँ पान-अक्षत सँ वाक्-खाक् दय केँ कएल करैत छथि। लालमैन बाबाक नाम पर ललमैनियाँ गामक नाम पड़ि गेल अछि। आर भगताय परम्परा अनुरूप चमार जातिक लोकदेव केर रूप मे लालमैन बाबाक आइयो सेवा-पूजा करबाक परंपरा जारी अछि।
 
एहि पृथ्वीलोक मे जे कोनो संत-हृदयक महापुरुष जन्म लैत छथि ओ अपन जीवनकाल मे आ मृत्योपरान्त पर्यन्त लोकहित केर सुकार्य करैत छथि। आस्थाक विषय भले ई हो लेकिन मिथिलाक ऐतिहासिकता मे एहि तरहक लोकरीति सँ हमरा लोकनि आइयो उचित शिक्षा ग्रहण करैत छी जे मनुष्य तन केर महत्व अत्यधिक छैक, एकरा ब्यर्थ कदापि नहि जाय दी।
 
हरिः हरः!!
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