कलाकार रंञ्जुक कमी शूल जका चुभैत रहत:श्रद्धाञ्जली

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  • कलाकार रंञ्जुक कमी शूल जॅका चुभैत रहत:श्रद्दाञ्जली

जयन्त ठाकुर,जनकपुरधाम।२मई २०१७.मैथिली जिन्दावाद !!

मिथिलाबासीक मनमस्तिष्कसँ वि.सं. २०६९ साल बैशाख १८ गतेके ओ दिन कहिओ हटि नहि सकैत अछि । कारण ई जे ओहि दिन मिथिलाक राजधानी जनकपुरधाममे हृदय विदारक स्थिति देखबा लेल मिथिलाबासी बाध्य भेल छल जेकर टिस अखनोधरि शूल सन गरैत बुझाइत अछि । ओ उएह शोकाएल दिन अछि जाहि दिन मिथिलावासी रञ्जु झा सहित पाँच गोट मैथिल अभियानी योद्धाके गमओने छल ।

मिथिला नाट्यकला परिषद्क हास्य कलाकार रामनारायण ठाकुर कहैत छथि जे ई टिस हमरासभक हृदयसँ कहिओ नहि हटत कारण जे रञ्जु आब हमरासभक बीच नहि रहलीह । रञ्जुक जन्म एकटा सामान्य परिवारमे बि.सं. २०३४ सालमे भेल छल । एकटा सामान्य परिवारमे जनमलाक बादो भीतरके प्रतिभाके बेसीसँ बेसी कोना प्रयोग क आमजनके हृदयमे अपन स्थान बना सकबत कर प्रयत्न सदति करैत रहलीह तकरहि परिणति अछि जे बहुत कम समयमे अभिनयक माध्यमसँ मैथिल जनके हृदयमे अमिट छाप बनाबएमे सफल रहलीह ।

बच्चेसँ अपन लक्ष्यप्रति सजग रञ्जु समयक सूईके संग धिरे धिरे ओ यौवन अवस्थामे पहुँच गेलीह । ताधरि रञ्जु किछु खास नहि करए सकल छलीह । मुदा नियति कि कि खेल खेलबैत अछि ककरो बुझएमे नहि अबैत अछि । हुनक विवाह भऽ गेल । परिवारक बोझ हुनका माथपर पडए लगलन्हि ओहिपरसँ दू दूटा सन्तानक लालन पालनक अभिभारा सेहो रहन्हि । रञ्जु अपन दुनू सन्तानक भविश्य प्रति बहुत बेसी चिन्तित रहैत छलीह । मुदा घरक आर्थिक तंगीक कारण किछु करए नहि पाबि रहल छलीह । इएह क्रममे रञ्जु अपना भितर नुकाएल गायकी आ लेखन क्षमताके उजागर करएके प्रयास कएलीह ।

ओ अपन पतीक संग वि.सं २०५६ सालमे मिथिला नाट्य कला परिषदक परिसरमे गेलीह अपन गायकीक उडानके पाँखि प्रदान करबाक लेल । मुदा मिनापक बरिष्ठ कलाकार सुनिल मिश्र हुनक लेखनी आ गायकीसँ प्रभावित नहि भेलथि । तथापि मिनापके महिला कलाकारक खोजी छल । मिश्र वएह लोभसँ रञ्जुके मिनापमे स्थान देबएके सोच बनौलथि । रञ्जु गायिका बनबाक सोचसँ निरन्तर मिनापमे आबए जाए लगलीह । एवमप्रकारे हुनक भेट नाटककार महेन्द्र मलंगियासँ भेल ।

मलंगिया सर कहलथि रञ्जु अहाँ गायकी कहिआ सिखब कहिआ नहि, ताबे अहाँ अभिनयमे सेहो किए नहि लागि जाइत छी । मलंगिया सरक बात रञ्जु काटए नहि सकलथि । ओ उएह बर्ष काठक लोक नामक नाटकमे पहिल बेर अभिनय कएलीह मुदा हुनक अभिनयसँ किओ प्रभावित नहि भेलथि । जखन दोसर बेर गाम नहि सुतैया नामक नाटकमे अपन अभिनयक क्षमतामे उर्जा झोकलथि तऽ केहन केहन महारथिसभके दाँत तर आँगुर काटए बाध्य कऽ देलथि ।

 

रञ्जु ओ खाली मुह देखै छै, गाम नई सुतैया, ओरिजिनल काम, छुतहा घैल, पुस जाढ कि माघ जाढ, विर्जु विल्टु आ बाबु, प्रेत चाहे असौच सहितक नाटकमे अपन अभिनय प्रतिभाक कौशल देखौलथि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानसँ २०५७ सालमे उत्कृष्ट कलाकारक पुरस्कार पौने रञ्जु दीपक रौनियारद्वारा निर्दे्शित टेलि फिल्म चौकैठ आ पूजा, आमा–२, सृष्टि, कालाजारमे सेहो अपन सशक्त अभिनय प्रस्तुत कएने छलीह । तहिना रञ्जु बीबीसी नेपाली सेवाक रेडियो नाटक कथा मीठो सारङ्गीकोमे सेहो अपन आवाज देने छलीह ।

२०६९ साल अबैत अबैत रञ्जु मिथिलाक एकटा हस्ती बनि गेल छलीह । सम्पूर्ण मैथिल नारीक नेतृत्व करबाक क्षमता हुनकामे चलि आएल छल । वएह अनुरुप मिथिला राज्य संघर्ष समितिद्वारा मिथिला राज्यक माँग सहित कएल जा रहल आन्दोलनमे महिला मात्रे नहि कि पुरुषवर्गक कलाकारसभके सेहो प्रेरित करैत छलीह । मुदा ई ककरा बुझल छल जे मिथिला मैथिलीक लेल लडएबाली रञ्जुक लेल ओ अन्तिम लडाई छल । ओ मिथिलाक लेल जानक उत्सर्ग कएलीह । तएँ तऽ मिनापक तत्कालिन अध्यक्ष सुनिल मल्लिक हुनका योद्धाक संज्ञा देने छथि।

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