नेपाली राजवंश मे मैथिल ब्राह्मणी ‘कान्तावती देवी’

आलेख

– प्रवीण नारायण चौधरी

नेपालक शाहवंशीय राजवंश केर मिथिला कनेक्सन
 
नेपाली राजवंश ‘शाहवंश’ केर संछिप्त परिचय
नेपाल मे शाहवंशीय राजवंश केर १७६८ ई. सँ २००८ ई. धरिक २४० वर्षक इतिहास मे एकटा पन्ना एहेन गंभीर अछि जे मिथिलाक संग जुड़ल आ अत्यन्त रहस्यमयी मानल जाएत अछि। एहि सम्बन्ध मे विभिन्न इतिहासकार लोकनिक बहुचर्चित कथा-गाथा पढबाक-सुनबाक लेल भेटैत अछि।
 
पूर्व मे ‘नेपाल’ केवल काठमान्डू उपत्यका केँ मानल जाएत छल। काठमान्डू सँ करीब ८० कि.मी. दूर ‘गोरखा राज्य’ मे शाह वंशीय राजा द्वारा राज कएल जाएत छल। जाहि मे ‘राम शाह’ केर प्रसिद्धि ‘न्याय’ देबाक लेल जानल जाएत अछि। न्याय चाही त गोरखा राजा लग चलू – ई एकटा लोककहिनीक रूप मे प्रचलित आ प्रसिद्ध अछि। एहि कुलक एक प्रतापी राजा भेलाह पृथ्वी नारायण शाह जे गोरखा राज्य केर सीमा बढेबाक लेल तत्कालीन नेपाल अर्थात् काठमांडू उपत्यका व आसपास केर क्षेत्र मे मल्ल राजा सभक ३ गोट राज्य कान्तिपुर, ललितपुर आ भक्तपुर केँ अपन राज्य मे मिलाबय चाहैत छलाह, हलांकि ओ २१ बेर अपन प्रयत्न मे मल्ल राजा सब सँ हारल छलाह, मुदा अन्ततोगत्वा रणनीतिपूर्वक कोनो उत्सवक परंपरा मे मस्त मल्ल राजा पर हुनकर आक्रमण सफल रहलनि आर ओ ‘नेपाल’ पर जीत हासिल कएलनि।
 
बडामहाराजाधिराज पृथ्वीनारायण शाहः नेपालक एकीकरण कएनिहार मूल व्यक्तित्व
नेपालक बडामहाराजाधिराज सेहो कहेनिहार तथा विभिन्न छोट-छोट राज्य केँ एकीकरण करैत पूर्ण नेपाल निर्माण केनिहार – पृथ्वीनारायण शाहदेव केर राज मे एहेन कतेको कथा भेटैत अछि जाहि पर कतेको रास कथा, उपन्यास आ फिल्म लिखल जाय त एको टा पाठक लेल अरुचिक विषय नहि बनि सकत। आइ एहि ठाम मिथिला सँ जुड़ल एकटा महत्वपूर्ण गाथाक चर्चा करबाक अछि। बडामहाराजाधिराज पृथ्वी नारायण शाहक पौत्र महाराजाधिराज रण बहादुर शाह एक मैथिल ब्राह्मणी विधवा कान्तावती झा केर सुन्दरता, बुद्धिमत्ता आर सर्वगुणसम्पन्नता पर मंत्रमुग्ध भेल छलाह। ओ अपन मैथिल राजपुरोहित द्वारा वर्णित कथा-गाथाक आधार पर अथवा प्रत्यक्ष दर्शन करैत कान्तावती सँ विवाह करबाक प्रस्ताव रखलनि आर एहि शर्त पर जे राजगद्दीक उत्तराधिकारी जँ हिनकहि पुत्र केँ बनायल जायत तखनहि ई विवाह सम्बन्ध होयत – राजा एहि शर्त केँ स्वीकार कएलनि आर कान्तावती संग हुनक विवाह सम्पन्न भेल।
 
हलांकि राजाक एहि तरहक व्यवहार सँ दरबारक नियम भंग होयबाक बात पर आर लोक छुब्ध व असन्तुष्ट छल, राजाक एहि निर्णयक कठोर आलोचना सेहो कएल गेल। परन्तु एवरीथिंग इज फेयर इन लव एण्ड वार केर कहिनी मुताबिक राजा रण बहादुर शाह अपन मति अनुसार कतेको गति मनमानी ढंग सँ करैत रहलाह। हिनका संग जुड़ल आरो कतेको प्रसंग पर गहिंर अध्ययन उपरान्त किछु लिखि सकब, परन्तु हाल लेल ई कहि सकैत छी पृथ्वीनारायण शाहक तेसर पीढी मे हिनकर शासनकाल मे काफी रास आन्तरिक षड्यन्त्र आ शाही खेला-वेला सब होयबाक अनेकों कथा प्रचलित अछि। एहने एक कथा थिक मिथिला विधवा ब्राह्मणी कान्तावती देवी (झा) संग विवाह।
 
नेपालक शाहवंशीय राजा रण बहादुर शाह आ कान्तावती देवीक भेंट
१७९५ ई. केर मध्य मे भेंट आर तात्कालीन प्रचलन मुताबिक अर्ध-जाति (half-caste) पुत्र केँ राजगद्दीक उत्तराधिकारी बनेबाक रीत अनुरूप कान्तावती केँ राजा रण बहादुर हुनकहि सँ उत्पन्न पुत्र केँ राजा बनेबाक सहमति देलनि आर तखन हुनका संग विवाह कएलनि। १७९७ ई. मे ई विवाह भेल। ओहि वर्ष कान्तावती केँ एक पुत्रधनक प्राप्ति भेलनि। हुनक नाम गीर्वाणयुद्ध राखल गेल। किछुए समय उपरान्त कान्तावती केँ क्षय रोग होयबाक बात राज-चिकित्सक द्वारा कहल गेल आर इलाज लेल कठोर परहेजक धर्म पालन करबाक लेल राज्यक नियम अनुरूप अलग सँ स्वास्थ्यलाभ हेतु बनल स्थानपर रहबाक सल्लाह देल गेल। क्षयरोग ताहि समय एक खतरनाक रोग मानल जाएत छल, जेना वर्तमान समय मे कैन्सर रोग सँ मृत्युक दिन नजदीक आबि गेल बुझल जाएत अछि, किछु तहिना छल क्षयरोह ओहि समय मे। रानी कान्तावती केर पुत्र केँ हुनका जीबिते राजा बनेबाक प्रतिज्ञा अनुरूप राजा नर बहादुर शाह केँ गद्दी सँ उतरय पड़ि गेलनि, मात्र १८ मासक उमेर मे ८ मार्च १७९९ ई. केँ गीर्वाणयुद्ध केँ राजगद्दी पर बैसाकय पिता रण बहादुर कान्तावतीक संग संन्यासक जीवन मे पत्नीक स्वास्थ्यलाभ हेतु चलि गेलाह। देवपाटन मे राजा संन्यासीक भेष मे रहय लगलाह। आध्यात्मि चिन्तन मे रत ओ अपन नाम ‘स्वामी निर्गुणानन्द’ राखि लेलनि। पत्नी कान्तावती लेकिन बहुत दिन नहि जी सकलीह। बीमारी सँ पूर्वहि हुनक दोसर सन्तान पुत्रीक रूप मे धनशाही लक्ष्मी देवीक नाम सँ जन्म लेने छलीह। हिनक मृत्यु १७ अक्टूबर १७९९ ई. केँ भेलनि।
 
भारतीय शोधकर्ताक मत जनश्रुति आधारित
लोकसंस्कृति शब्दकोश (डा. लक्ष्मीप्रसाद श्रीवास्तव) द्वारा वर्णित नेपाल राजवंश मे मैथिलक जुड़ाव शीर्षक मे कहल गेल अछि जे राजा रण बहादुर शाह केँ पुत्रधनक प्राप्ति नहि भऽ रहल छल। राजपुरोहित एवम् ज्योतिषी संग परामर्श कएला उत्तर राजा दोसर विवाह करबाक निर्णय कएलनि। जनकपुरक मैथिल ब्राह्मण राजपुरोहित गजराज मिश्र केर पुत्र ईश्वरदत्त मिश्रक दुइ बेटी राजवती तथा कान्तिवती संग महाराजाधिराज रण बहादुर शाह केर विवाह एहि शर्तपर करायल गेल जे एहि रानी सँ प्राप्त पुत्र मात्र राजगद्दीक उत्तराधिकारी बनत। रानी कान्तिवती केँ पुत्रधनक प्राप्ति भेलनि। ओहि पुत्रक नाम ग्रीवाणयुद्ध राखल गेल। परन्तु एहि बालक केर जन्मक १८ मास बीतिते पिताक देहान्त भऽ गेल। एहि तरहें मात्र १८ मासक आयू मे ग्रीवाणवीर केँ उत्तराधिकारी स्वीकार करैत मंत्री-परिषद् द्वारा शासन संचालित होमय लागल। एहि ठाम जनश्रुतिक आधार पर लेखक संछेप मे ई सब छापाखानाक युग मे लिखने हेताह। जखन कि उपरोक्त वर्णन नेपालक इतिहास मे वर्णित गाथाक अनुरूप कहल गेल अछि।
 
कान्तावतीक पुत्र राजा गीर्वाणयुद्ध केर राज्यकाल
राजा गीर्वाणयुद्ध डेढ वर्षक अवस्था मे भले गद्दी आरोहण कएलनि, परञ्च शासनक बागडोर हुनक सतमाय राज राजेश्वरीक हाथ मे रहलनि, जे मंत्रीमंडलक सहयोग सँ राज्य शासन सम्हारैय लगलीह। एम्हर राजा ग्रीवाणयुद्ध केर राजगद्दी, ओम्हर किछुए मासक बाद हुनक माय कान्तावती देवीक मृत्यु – पिता रण बहादुर शाह केँ पागल जेकाँ बना देलक। ओ मन्दिरक पूजारी आ चिकित्सक, ज्योतिष, राजपुरोहित आदिक संग अजीब दुर्व्यवहार करय लगलाह। निश्चिते कान्तादेवी संग हुनक प्रेम एहि तरहें असमय अन्त पाओत ओ सोचनहिये नहि छलाह। ईश्वर सँ आस्था पर मनहि मन सवाल उठि गेलनि आर चिरचिरा स्वभावक कारण ओ एहि तरहक निराशावादी मनोविज्ञान केर शिकार भऽ गेल हेताह ई अन्दाज लगा सकैत छी। एम्हर हुनकर एहि तरहक क्रियाकलाप सँ राज-दरबार मे सेहो हरकंप मचि गेल छल। आब ओ फेर सँ सब नियम केँ ताख पर राखि अपने राजा बनबाक लेल सेहो प्रयास करय लागल छलाह जेकर विरोध नियम-निष्ठा सँ बान्हल दरबारी व मंत्रीमंडल द्वारा कएल गेल। राज पुरोहित सेहो एकर विरोध कएलनि। खींचातानी मे समानान्तर दुइ गोट शासन एक्के संग राजदरबार मे हावी भऽ गेल। अन्ततोगत्वा राजा नर बहादुर केँ देश सँ निर्वासन सेहो देल गेल। ई कथा फेर कोनो दोसर दिन!
 
डेढ वर्षक अवस्था मे गद्दीपर विराजमान अबोध गीर्वाणयुद्ध केर राज्यकाल २० नवम्बर १८१६ ई. धरि रहल जहिया चेचक बीमारी सँ ग्रस्त होयबाक कारण मात्र १९ वर्षक अवस्था मे हुनकर मृत्यु भऽ गेल छलन्हि। पहिने सतमाय राज राजेश्वरीक नेतृत्व मे राजकाज चलल छल, आर बाद मे पिताक १८०४ ई. मे विवाह कएल गेल अति सुझबुझ आ साहित्य सँ सिनेह रखनिहाइर राजमंत्री परिवारक बेटी ललित त्रिपुरसुन्दरी द्वारा राजकाज चलायल गेल छल। राजा गीर्वाणयुद्ध केर मृत्यु उपरान्त हुनक पुत्र राजेन्द्र बिक्रम शाह राजगद्धी पर बैसलाह।
 
अपन कम उम्रक जीवन मे ताहि समयक चलन-चल्तीक अनुरूप राजा गीर्वाणयुद्ध केर तीन विवाह मे ४ सन्तान सेहो भेल छलन्हि, जाहि मध्य सँ राजेन्द्र बिक्रम आगाँक राजा भेलाह, धरि १८३२ ई. सँ ओ अपन राज्य संचालन योग्य उमेर पुरलाक बाद शासनक बागडोर अपना हाथ मे लेलनि – मुदा नेपाल राजवंशक एक कमजोर आ निर्णय लेबा मे असमर्थ राजाक रूप मे सेहो जानल गेलाह। हिनकहि समय मे मंत्री भीमसेन थापा केर सैन्य परिचालन अधिकार सेहो कटौती कएल गेल। किछुए दिन मे हिनक एक सन्तान केर असामयिक मृत्युक आरोप सेहो भीमसेन थापा पर लागल, हुनका जेल भेजल गेल, हुनकर सम्पत्तिक जब्ती-कुर्की कएल गेल – मुदा ओ किछुए दिन मे निर्दोष साबित भेलाक बाद जेल सँ मुक्त कय देल गेलनि। मुदा अन्य सशक्त मंत्री द्वारा पुनः भीमसेन पर अत्याचार आर जेल देबाक बात भेलाक कारण भीमसेन द्वारा जेल मे आत्महत्याक गाथा सेहो प्रचलित अछि। फेर बीच मे १८३९ सँ १८४१ धरि राजकाज सँ फूर्सत पेबाक इच्छा जतेलाक कारण हिनकर जेठकी रानी आर १९४१ मे हुनकहु मृत्यु भेलाक बाद छोटकी रानी द्वारा राज्यसत्ता संचालन कएल गेल। एहि उतार-चढावक बीच राणा शासनक उदय भेल। मंत्रीक परिवार सँ जुड़ल राम कुँअर द्वारा १८४६ ई. मे कोतपर्व हत्याकाण्ड करैत राज्य संचालनाधिकार अपना हाथ मे लय लेल गेल, धरि एहि शासनाधिकारी द्वारा राजाक पद केँ बरकरार राखि १८४७ ई. सँ राजा राजेन्द्र विक्रम शाहक पुत्र सुरेन्द्र विक्रम शाह केँ राजा नामक लेल बनायल गेल। राणा शासनकाल सँ कुल १०४ साल बाद भारतक स्वाधीनता प्राप्ति उपरान्त नेपाली काँग्रेसक संस्थापक बी पी कोइराला व अन्य द्वारा १९५० ई. मे भारतक नवनियुक्त नेहरू सरकारक सहयोग सँ संभव भेल।
 
यैह राजा गीर्वाणयुद्ध केर कार्यकाल मे भारतक ब्रिटिश शासक संग पिता रण बहादुर शाहक विभिन्न रणनीतिक परिणामस्वरूप युद्ध आर फेर सुगौली संधि सेहो भेल छल। ब्रिटिश सम्राज्य केर सम्राज्यवाद आर नेपाली राजाक सम्राज्यवादक लड़ाई बीच कतेको तराई-मधेशक स्वायत्तशासी राज्य चाप मे पड़ैत अन्ततोगत्वा राणा शासक द्वारा अंग्रेज केँ भारतीय स्वाधीनता संग्रामक पहिल ‘सिपाही विद्रोह’ केँ दमन करबाक लेल सहयोग करबाक फलस्वरूप १८६० मे नेपाल-भारत बीचक सीमांकन करैत वर्तमान सीमा परिभाषित भेल अछि, जाहि सँ मिथिला सहित विभिन्न सझिया भारत-नेपाल संस्कृति-सभ्यताक क्षेत्र दुइ देश बीच विभाजित होयबाक दंश आइ धरि झेल रहल अछि। भारत दिशि मिथिलाक लोक बिहारी बनि गेल, अबधक लोक उत्तर-प्रदेशक नागरिक बनि गेल, नेपाल दिशि मधेशी बनि गेल….!! अस्तु!!
 
हरिः हरः!!
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3 Responses to नेपाली राजवंश मे मैथिल ब्राह्मणी ‘कान्तावती देवी’

  1. Lal babu singh

    Bahut nick लगाल padake

  2. Pingback: Rana Bahadur Shah: This ‘insane’ king of Nepal was also an example of social reforms – OnlineKhabar

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