जनजागरण केर प्रयास कदापि रिक्त नहि जाएछः कथा

मंगनू काका केर नागरिक सम्मान
 
(कथाः प्रवीण नारायण चौधरी)
 
condom-adमंगनू काका केर काजे छलन्हि देवाल पर पेन्टिंग कय प्रचार-प्रसार केनाय…. ओना त ओ सब प्रचारक पाइ लैथ तखने देवाल पर लिखैथ…. मुदा कंडोम केर प्रचार लेल ओ कोनो कंपनीक पाइ लेने बिना प्रचार करैत छलाह। लोक सब पूछैन त कहथिन जे एतेक पैघ हितकारी उत्पाद चाहे जाहि कोनो देश सँ आयल, एकर प्रचार लेल हम पाइ लय केँ पाप नहि करब। तर्क-कूतर्क कतेक तरहक गप-सरक्का होएत छल हुनका संग अशर्फीक चाह दोकान पर भोर-साँझ। मंगनू काका केर बात सब सुनिकय लोक सब खूब आनन्दित सेहो होएत छल। बेर-बेर टोकि दैन लोक हुनका। “ऐँ हौ काका! तऽ आर सभ बातक पैसा लय छह तखन प्रचार करय जाए छह…. ई कंडोम मे एहेन कोन बात छैक जे तूँ बिना पाइये लेने प्रचार करैत छहक?” मतलब जे घूरि-फिरि एतबे प्रश्न!
 
मंगनू काका थाकिकय एतेक तक कहि देथिन जे, “रौ! एतेक रास जे जनैम गेलैक हँ से कहे जे कोनो काजो के बुझाएत छौक? हमरे तीन गो अछि आ तिनू जे बम्बई धेलक से घूरिकय कहियो पूछितो नहि अछि। हरासंख सब अपनो पेट ठीक सऽ भरैत अछि कि नहि से बुझय सँ बाहर अछि। कम सऽ कम मरब तहियो आबि आगि दय श्राध कय देत त बुझब जे जन्मेलौं से ठीक केलौं। जहिया स तोरा ई कंडोमक बात अस्पताल पर सुनलियैक तहिया स बुझ जेना पृथ्वीपर भगवान् भेट गेल। जन्मेनाय बन्द करबाक लेल लोक सब केँ सीधे देवाल पर प्रचार लिख देबैक त तामशो चढतैक, तैँ हम कोनो कंडोम के प्रचार लेल पाइ लेने बिना करबाक शपथ खेने छी।”
 
चुटकी लेनिहार कहि देलकैक, “ऐँ हौ! तऽ ई जन्मेनाय कोनो बेजा बात थोड़े न छियैक?” मंगनू काका जबाब देलकैक, “से त हमहुँ-तहुँ जनमलियैक तखने ई सृष्टि चलैत छैक…. मुदा देखय नहि छहीन जे खेत मे मूरय बाग केला पर जेना घौंदा-घौंदा गाछ जनैम जाएत छैक तहिना आइ-काल्हि लोक सब खाली जन्मेनाय टा बुझय छैक। सोरहि-के-सोरहि जन्मेलक आ सब कूपोषण सँ मरैत-मरैत कोहुना बाँचि गेल… आ बड़का भेल त अशिक्षा आ कूपोषण सँ सुखायल माथ कोढिया बनिकय भैर दिन तोरा एम्हर-ओम्हर टल्ली मारैत रहल। मिथिला जे आइ शिथिला भऽ गेल छैक तेकर कारण कि?” ओकर जबाब मे प्रति-प्रश्न सुनिकय लोक सब चौंकय, कारण मंगनू काका एतेक रास देवाल प्रचार लिखि चुकल छल जे ओकरा मे भितरका सब ज्ञान छलैक। लोक सबकेँ जबाब नहि सुझैक त कहि दैत छलैक, “से तऽ तूँ ठीके कहैत छहक। जन्माबय बेर मे ई थोड़े न लोक बुझैत छैक जे एहि बेर मे जनैम जेतैक। ई त जखन तोरा जन्मैत छैक तखने लोक केँ ज्ञान होएत छैक। पढल-लिखल छहिये कतेक हौ!”
 
एकटा समय एलैक जे गाम मे साक्षरता बढि गेलैक। लगभग सब जाति-वर्गक लोक मे परिवार नियोजन केर महत्व बुझय मे आबय लगलैक। एतेक तक जे मौलबी साहेब अपने सँ घूमि-घूमिकय सब परिवार केँ अनुरोध केलखिन जे वर्तमान अर्थक युग मे ‘हम दो – हमारे दो’ केर अर्थ बुझब आवश्यक छैक। मंगनू के त्याग आइ सौंसे गाम केँ एकटा सुदृढ विकास केर मार्गदर्शन करा चुकल छैक। सब सँ बेसी अनियंत्रित बच्चा जन्माबयवला समुदाय द्वारा मंगनू काका केर आइ नागरिक सम्मान कैल जेबाक छैक। ओकर आजीवन कंडोम केर प्रचार लेल आइ ओकरा ओ समुदाय ई सम्मान देतैक। मंगनू भोरे सँ उत्साह सँ भरल अशर्फीक चाह दोकान पर सब सँ खुशी प्रकट करैत भेटैत अछि। गप्पी-गफाँसुर सब सेहो आइ फूकास्टिक कम दैत बस ओकरा बधैया दय रहल छैक। सब आशा आ विश्वास व्यक्त करैत छैक जे, “मंगनू काका! तोहर देखल सपना जँ ई सच भऽ गेलह तऽ एक न एक दिन लोक अपन मिथिला राज्य केर महत्व सेहो बुझबे करतैक।”
 
हरिः हरः!!
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