मैथिली साहित्य संस्थान द्वारा ८ जनबरी ‘मैथिली दिवस’ पटनामे

पटना। दिसम्बर ६, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!!

maithili sahitya sansthaanसंविधानक आठम अनुसूची मे मैथिली केँ मान्यता देबाक कार्य राज्यसभा द्वारा ८ जनबरी, २००४ ई. केँ कैल गेल छल। मैथिली साहित्य संस्थान पटना एहि दिवस केँ हरेक वर्ष ‘मैथिली दिवस’ केर रूप मे मनबैत आबि रहल अछि।

एहि बेर सेहो ई कार्यक्रम पटना मे अपराह्न २ बजे सँ मैथिली साहित्‍य संस्‍थान द्वारा ‘मैथिली दिवसक’ आयोजन बिहार रिसर्च सोसाइटी सभागार, पटना म्‍युजियम परिसर मे आयोजन कएल जायत। संस्थान सँ जुड़ल शोधकर्ता एवं मैथिली-मिथिला अभियानी श्री भैरव लाल दास अपन फेसबुक स्टेटस मार्फत सब गोटा केँ कार्यक्रम मे आमंत्रित केने छथि।

कार्यक्रम में श्री विजय शंकर मल्लिक ‘सुधापति’ द्वारा रचित कथा संग्रह ‘सगुनक भार’ आओर संस्कार गीत संग्रह ‘रस मंजरी’क लोकार्पण होयत ईहो जानकारी श्री भैरव लाल दास करौलनि अछि। ‘मिथिलाक माटि-पानि-समस्या आओर समाधान’ विषय पर श्री गजानन मिश्र द्वारा विद्वत व्याख्यान एहि कार्यक्रम मुख्य हिस्सा होयत ओ बतौलनि। 

मैथिली जिन्दाबादक संपादक प्रवीण नारायण चौधरी केँ सेहो नेपाल सँ विशेष आमंत्रण लेल आभार प्रकट करैत पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम मे व्यस्तताक कारण एहि बेर ओतय उपस्थिति नहि भऽ सकैछ, लेकिन शीघ्रहि संस्थानक संग सहकार्य करैत विभिन्न महत्वपूर्ण विषय पर आपसी चर्चा केँ बढेबाक आश्वासन देल जेबाक जानकारी भेटल अछि। संपादक अपन अभियानक ऐगला पड़ाव पटना होयत, ताहि लेल शोध-सहयोगी शिव कुमार मिश्र जी केँ दूरभाष पर बतौलनि। आउ, परिचित होइ एहि महत्वपूर्ण संस्था सँ।

मैथिली साहित्य संस्थानः परिचय

मिथिला वर्तमान समय मे एकटा सांस्कृतिक क्षेत्रक रूप मे जानल जाएछ। पौराणिक समय सँ एकर अवस्थितिक बारे मे सहजहि जानकारी भेट जाएत अछि। सतपथ ब्राह्मण, उपनिषद, महाकाव्य ओ पुराण मे एकर उल्लेख भेटैत अछि। स्वायत्तशासी गणतांत्रिक संघ (मिथिलादेश) केर रूप मे सेहो एकर अपन अलगे पहिचान रहल जे उपनिवेशवादी सम्राज्यक प्रसार भेलाक बाद संभवतः अन्त भेल कहल जाएछ।

एहि ठामक मैथिली भाषा आर साहित्यक समृद्धि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर धरि ख्याति प्राप्त कएलक। एहि ठाम अत्यन्त प्राचीनकाल सँ विद्याध्ययन व शोध कार्यक गहिंर इतिहास रहल अछि। एत्तहि अनेकानेक पौराणिक शास्त्रज्ञान फलित होएबाक अनेकानेक गाथा जिवन्त अछि। एहि भूमि केँ सिद्ध बनेनिहार मे एक सँ बढिकय एक ऋषि-मुनी-ज्ञानीजनक नाम लेल जाएत अछि।

मैथिली साहित्य संस्थान उपरोक्त विशिष्टताक समुचित संरक्षणक संग आरो गुप्त रहस्य केर उद्भेदन करबाक लेल – किछु विलोपोन्मुख सांस्कृतिक धरोहर आदि केँ बचेबाक लेल – १९६९ ई. सँ निरन्तर शोधकार्य करैत मिथिलारूपी पौराणिक पहिचान केँ जोगेबाक प्रयत्न कय रहल अछि। एहि संस्थान मे बुद्धिजीवी, इतिहासकार, पुरातत्त्वविद्, सामाजिक वैज्ञानिक, साहित्यविद्, शिक्षाविद्, संचार क्षेत्रक विशेषज्ञ, न्यायविद् इत्यादि केँ संगठित करैत मिथिला प्रति सदैव सारगर्वित कार्य करैत आबि रहल अछि।

निरन्तर शोधकार्य, लेखन व प्रकाशन एहि संस्थानक मुख्य भूमिका थीक। संस्थान द्वारा एहि सन्दर्भ मे ‘मिथिला भारती’ नामक नियमित पत्रिकाक प्रकाशन कैल जाएछ। संभवतः ई एकमात्र शोध पत्रिका मैथिली भाषा मे प्रकाशित कैल जाएछ। एहि मे एक सँ बढिकय एक पुरोधा शोधकर्ता लोकनिक योगदान देल जाएछ। किछु प्रमुख योगदानकर्ता मे डा. रामानाथ झा, डा. राजेश्वर झा, डा. जे. सी. झा, डा. जटाशंकर झा, डा. लक्ष्मीपति सिंह, डा. इन्द्रकान्त झा, डा. हेतुकर झा, डा. प्रफूल्ल कुमार सिंह ‘मौन’, डा. सी. पी. सिन्हा, डा. जगदीश्वर पाण्डे, डा. उपेन्द्र ठाकुर, डा. आर. के चौधरी, डा. रामदेव झा, डा. शैलेन्द्र मोहन झा आदि महत्वपूर्ण छथि। मिथिला भारती शोध पत्रिकाक ४ अंक १९७० केर आरम्भिक दशक सँ १९८० केर मध्य दशक धरि कैल गेल अछि। एहि चारि अंक मे बहुत रास महत्वपूर्ण विषय सब केँ समेटल गेल अछि।

एहि संस्थानक मूल उद्देश्य मे मैथिली भाषाक विकास ओ प्रचारक संग-संग त्रैमासिक शोध पत्रिका ‘मिथिला भारती’क प्रकाशन आर बिक्री करब अछि। तहिना कोनो महत्वपूर्ण शोधग्रंथक स्वतंत्र प्रकाशन करब सेहो एहि संस्थाक मुख्य उद्देश्य मे पड़ैत अछि। सांस्कृतिक धरोहर – साहित्यिक व कला क्षेत्र सँ सम्बन्धित शोधकार्य करेबाक लेल स्रोत व्यक्ति मार्फत कार्य करब, एहि लेल संगोष्ठी, व्याख्यान, पुरातत्त्विक खोदाइ व अन्वेषण आदि सेहो एहि संस्थान द्वारा कैल जाएछ। लोककला, मूर्तिकला आर लोकभाषाक विकास लेल निरंतर योजना आर क्रियान्वयन सेहो एहि संस्थानक मुख्य उद्देश्य मे पड़ैत अछि। एहि संस्थान द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारी सब इन्टरनेटक माध्यम सँ सेहो अपन वेबसाइट www.maithilisahityasansthan.org द्वारा नव पीढी केँ बताओल जाएत अछि।

एहि संस्थान मे अत्यन्त महत्वपूर्ण शोधग्रंथ सब बिक्री लेल सेहो उपलब्ध भेटैत अछि। उपरोक्त वेबसाइट सँ प्राप्त जानकारी अनुसार हाल उपलब्ध पोथीक सूची मेः १. मिथिलाक्षरक उद्भव एवं विकास, २. भारतक संविधान (मैथिली), ३. दरभंगाक एक भारतीय राष्ट्रभक्त महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह केर आत्मकथा, ४. कैथी लिपिक इतिहास, ५. अग्निक पाँखि, ६. गोत्राध्याय, ७. महेश्वर विनोद, ८. मिथिलाक और मैथिलीक विकास मे कर्ण कायस्थक योगदान, ९. गंगा स्नान – एक सँ बढिकय एक प्रसिद्ध विद्वानक रचना सब उपलब्ध अछि।

हलाँकि मैथिलीक एतेक महत्वपूर्ण संस्थान मे एक सँ बढिकय एक अगाध व्यक्तित्वक नेतृत्व रहितो एखन धरि बहुत रास आरो महत्वपूर्ण कार्य करब बाकी अछि। जाहि लेल ‘Research Associate’ – शोध सहयोगी श्री शिव कुमार मिश्र खुलल हृदय सँ प्रगतिशील मैथिल समाज केँ सुझाव पठेबाक अनुरोध करैत मैथिली जिन्दाबाद मार्फत सब केँ जानकारी कराबय चाहला अछि। निश्चित तौर पर वर्तमान इन्टरनेट युग मे तथ्य-संकलन आ ऐतिहासिक महत्वक जानकारी सब जुटेबाक लेल एकटा सक्रिय आर रोचक वेबसाइटक आवश्यकता तऽ होइते छैक, ओहि सँ बेसी लोक जुड़ि सकय, बेसी जानकारीमूलक बात सब सदस्य द्वारा आबि सकय ताहि पर विशेष ध्यान राखब जरुरी होइत छैक। कम सँ कम भाषा आ संस्कृति सँ जुड़ल कार्य करयवला देश भरिक विभिन्न संस्था केँ अपन सदस्यक सूची मे राखब, स्रोत व्यक्तिक रूप मे सब केँ मौका प्रदान करब आर सेमिनारक आयोजन कोनो एकटा केन्द्र पर नहि कय मिथिलाक मूल भूमिक संग मैथिलक घना प्रवासक नगर आदि मे सेहो सहकार्य करब जरुरी होइत छैक। खासकय युवा पीढीक सहभागिता बढेबाक लेल आर नवागन्तुक केँ पर्यन्त एहि मिथिलाक वैशिष्ट्य सँ ओतबे आबद्ध रखबाक ध्येय सँ लेखनी व वक्तव्य प्रतियोगिताक आयोजन करब – करायब आर ताहि तरफ सेहो प्रकाशन लेल कार्य करब जरुरी छैक।

मैथिली मे मात्र लेखन टा नहि, बल्कि पठन संस्कृति केँ बढेनाय सेहो एकटा नव चुनौती बनि गेल अछि। आब तऽ जतेक लेखन लेल संघर्ष करब ताहि सँ बेसी संघर्ष पढेबाक लेल आ पठन-संस्कृति बढेबाक लेल सेहो करय पड़त। एतबा नहि! बिना राज्यक संपोषण आखिर कोनो भाषाक सामर्थ्य मे विकास करबाक उच्च मनोकांक्षा-उद्देश्य-लक्ष्य कोना भेटत? प्रश्न ओतहु ओतबे बड़का मुंह बौउने ठाढ छैक। हमर विचार सँ जतेक महत्वपूर्ण संङोर संस्थान मे आइ ४६ वर्ष मे बनि गेल अछि ओ कम नहि। बस, निरंतर पटनाक सत्ताभोगी केँ एहि सन्दर्भ मे निन्न तोड़बाक आवश्यकता छैक। बस! मैथिली अकादमी तथा साहित्य अकादमी संग सरोकारक विषय पर सेहो सहकार्य आवश्यक अछि। एतबा नहि! आइ मिथिलाक्षेत्रीय महाविद्यालय मे मैथिली विषय सँ पठन-पाठनक वर्तमान पर सेहो एकटा सर्वेक्षण करब जरुरी छैक। मैथिली विषय मे अध्ययन-अध्यापनक दयनीय अवस्था मे सुधार करबाक दिशा मे सेहो संस्थान द्वारा डेग बढत ई अपेक्षा हम सब करैत छी।

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