मिथिला चौक – दिल्ली: देशक राजधानी मे मैथिल केर असेम्बली हाउस केर परिचय

दिल्लीक मिथिला चौक

– प्रवीण नारायण चौधरी

3372मिथिला आ भारतदेशक राजधानी मे अदौकाल सँ गहिंर संबंध रहल अछि। जहिया देशक राजधानी कलकत्ता छल तहियो, ताहि सँ पूर्व मुगलकाल मे आगरा आ बाद मे फेर दिल्ली, मैथिल जनमानस केर आवश्यकता कुशल व्यवस्थापन हेतु सब दिन राज्य संचालक केँ पड़ल आ अपन कुशाग्रता, गंभीरता आ वैचारिक पूर्णताक कारणे मिथिलाक लोक – खासकय विद्वान् पंडित आ कुशल श्रमिक – सेवादार केँ सब दिन भारतीय सम्राज्य केर राजधानी मे विशेष स्थान भेटैत रहल, इतिहास कहैत अछि।

वर्तमान भारतदेशक राजधानी सेहो दिल्ली आ औद्योगिक संपन्नताक मूल स्थलरूप मे प्रसिद्ध एनसीआर – नेशनल कैपीटल रिजन – राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र केँ मानल जाएत अछि। मैथिलीभाषी अपन भाषिक मधुरताक संग व्यवहार कुशल संस्कार सँ परिपूर्ण मानल जाएत छथि। ओ कतबो अपना केँ बिहारी मानि समाज मे एकटा हीनताबोध सँ भरल परिचय केर शिकार अपने सँ भेल होइथ, वा दिल्लीक मूलवासी जाट, अहिर आदिक हरमूट्ठ भाषा सँ दबल-दबायल मानैथ, मुदा मिथिलाक विशिष्ट संस्कार आ कुशाग्रता सँ ओ सब जगह-जगह ‘बिहारी सम्मान’ केँ सम्मानित केलैन आर परिणाम सोझाँ मे अछि जे आइ विधानसभा आ लोकसभा सब ठाम अपन उपस्थिति दर्ज करौने छथि।

mithilakshar3आइ बात करबाक अछि ‘मिथिला चौक’ जे दिल्लीक हृदयस्थल कनाट प्लेस केर बाबा खड्ग सिंह मार्ग पर अवस्थित अछि। शान्त आ सौम्य – स्वच्छ आ सुन्दर – सुरमयी आ संगीतबद्ध स्थल – दुइ प्रमुख मन्दिर आ एकटा मस्जिद केर संग खादी भंडार आ इंडिया कफी होम सहित मिथिला पान भंडार, यादव पान भंडार, मंडल चायवाला, कामत पानी पियाउ, माली फूलवाला, साहु मिठाइवाला, पासवान पाव-भाजीवाला, रामू मोची, प्रसिद्ध हनुमानजी मन्दिर केर पूजारी, अनुष्ठानी ब्राह्मण, ज्योतिषी, हस्तरेखा पढनिहार आदि विभिन्न पेशाकर्मी-रोजगारी मैथिल जनमानस केर अम्बार एतहि देखाइत अछि।

एहि जगह पर अपन पेशा सँ पूर्ण रूप मे स्थापित मैथिल केर बाहुल्यता एक दिशि आ दोसर दिशि एहि ठाम मिथिला राज्य, मैथिली भाषा, मैथिल केर राजनीतिक अधिकार वास्ते अनेकानेक संघर्ष मे अग्रसर ‘अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति’ केर कार्यकर्ता लोकनिक बैसार विन्दु रहबाक कारणे, दिल्लीक केन्द्रविन्दु मे एहि ठाम अलग-अलग भाग सँ समाजसेवी, अभियानी, भाषासेवी, राजनीतिकर्मी, पेशाकर्मी केर नित्य सम्मेलन होइत अछि।

Mithila Ke Jhandaएहि तरहें एहि स्थल केर नाम अभियान संचालनक क्रम मे हम अत्यन्त प्राकृतिक स्नेहसँ अभिभूत एकर नाम ‘मिथिला चौक’ रखने रही। अपन प्रत्येक दिल्ली यात्रा मे समूचा दिल्ली भरिक मित्र लोकनि सँ भेंटघाँट करबाक लेल यैह स्थलक चुनाव करैत ‘मिथिला चौक’ पर एतेक बजे हम सब भेटी कहैत रहल छी। हमर मित्रवर्ग आ खासकय सोशियल मिडियाकेर दिग्गज व्यक्तित्व लोकनि द्वारा मिथिला चौक केर नामकरण सहज रूप सँ स्वीकार करब तहिना भेल जेना प्रस्तावक हम आ समर्थक समस्त मित्र लोकनि।

आब अहाँकेँ दिल्ली मे कोनो काज अछि, अहाँ आँखि मुनिकय ‘राजीव चौक’ मेट्रो स्टेशन उतैर जाउ आ ७ नंबर गेट सँ बाहर होइत सीधे दाहिना हाथ चलैत एकटा मेनरोड केर जेब्रा क्रसिंग सँ पार करैत पुरान जमाना मे ब्रिटिश आर्किटेक्ट डिजाइन्ड भवन केर नीचें-नीचें फूटपाथ होइत फेर एकटा छोट सड़क पारकय पहुँचि खादी भंडार केर शोरूम पर, ओतय भेटि मिथिला पान भंडार, जिला समस्तीपुरवासी मैथिल चलबैत छथि एहि पान भंडार केँ – एतहि सँ मिथिला चौक आरंभ बुझू। फेर बढैत जाउ आगू आ पहुँचि जाउ कफी होम पर। ओतहु अपने सबहक मिथिलाक लोक सब पान ठेला लगाकय रोजी चला रहला अछि। आ तेकर बाद कफी होम केर जस्ट बगल मे भेट जायत मिथिलाक अधिकांश जनमानसक कुलदेवी काली केर सुन्दर सनक ‘पिपलेश्वरी काली मन्दिर’। ओत्तहि अछि एकटा प्राचीनकाल मे निर्मित मस्जिद। आ ओकर ठीक सामने बाबा खड्क सिंह मार्ग आ सड़कक ओहि पार अछि प्राचीनकाल मे आपरूपी प्रकट हनुमानजी केर भव्य आ प्रसिद्ध मन्दिर – जाहि मे पण्डित सँ लैत प्रसादी आ फूल बेचनिहार सब कियो अछि मैथिल।

mithila chowkपिपलेश्वरी काली मन्दिर पर लगैछ अघोषित मिथिला राज्य केर असेम्बली, जाहि मे सभासद लोकनि दिल्लीक अलग-अलग भाग सँ अबैत छथि। यैह कहाइछ मिथिला चौक। एत्तहि अछि दुभग्गी छोट-छोट देवाल आ जाहि पर बैसिकय लेल जाइछ निर्णय – बनायल जाइछ बड़का-बड़का रणनीति – एत्तहि बैसकी मे कैल जाइछ मिथिलाक्षर प्रशिक्षण कार्यक्रम। पिपलेश्वरी मन्दिर पर सेहो बाबा छथि मिथिला सँ – आ एकटा बाबा छथि उत्तर प्रदेश केर उन्नाउ (कानपुर) सँ। मन्दिर मे आरो सेवादार लोकनि मिथिला व अन्य ठाम सँ छथि। गर्मी मे बड़का पंखा सँ हावा खेबाक व्यवस्था आ ठंढी मे आगिक अलाव (घूर) सेहो रहैत छैक, जेकर चारूकात बैसिकय मैथिल सब दिल्ली आ मिथिला केर राजनीतिक निर्णय करैत रहैत छथि।

दिल्ली पहुँचू तऽ मिथिला चौक पर जरुर पहुँचल करू। अपन मातृभूमिक लोक आ आवाज सुनबाक इच्छा हो, दिल्लीक जराबयवला गर्मी या गलाबयवला ठंढी सँ आराम पेबाक इच्छा हो, केन्द्र या राज्य सरकारक कोनो मंत्री संग कार्य हो… एतय सब तरहक इच्छाक पूर्ति होयत। लेकिन सावधान रहब, दिल्लीक दिलवाली भूमि पर दिल्लगी केनिहारक सेहो जमावड़ा एतय लगैत अछि। कथनी आ करनी मे फरक राखनिहार मिथ्याचारीक मात्रा एत्तहु कम नहि आ मिथिलाक विशेष गुण गप देबाक प्रवृत्तिक एतहु कमी नहि भेटत। लंबा-लंबा बात करनिहार मुदा काज बेर अपन उपस्थितियो तक नहि देनिहार लोकक संख्या एतय कतेको लोक केँ अपना चपेट मे लऽ लेलक। तूँ डार्हि-डार्हि – हम पात-पात वला बात एतहु खूब चलैत अछि। सबहक महात्वाकांक्षा सँ मैथिली-मिथिलाक नोकसानो कैल जाएत अछि। लेकिन मिला-जुला कय मिथिला चौक अपना-आप मे एकटा क्रान्ति अछि – तन-मन-धन सँ यदि मिथिला प्रति सेवा करबाक इच्छा हो तऽ सर्वप्रथम माँ काली आर श्रीसीताराम केर अति प्रिय हनुमानजी केर शरण पकड़ि अपन यथायोग्य योगदान प्रारंभ करू, कल्याण निश्चित अछि। जे कियो एहि मे धोखा देबैक, तऽ मिथिलाक किक लागबे टा करत।

मिथिलाक किक

चलब दुइ डेग बयमानक
खसब छिटकी अपन कर्मे!
जँ गायब गीत फूसिये केँ
फँसब निज चालि बेशर्मे!!

रहब सदिखन कूसंगत मे
बचब नहि द्रोह मिथिलाके!
त्रिदेवक शक्ति त्रिदेवी सँ
पूरब मिथिलाक सेवा मे!!

हरब दु:ख-दारुण हे भोला
करब सब काज गौरी हे!
ठकब जँ ताहि भोला केँ
कटब तरुआरि काली के!!

सम्हैरकय सीथ मे सिन्दूर
लगाबथि सब अहिबाती!
बुझाबथि अपन पतिदेवकेँ
दिल्लगी महंग बर्बादी!!

जेना सीता केलनि संघर्ष
हरौलनि रावण खद्योतकेँ
दंभक भेलय जे खून युद्धे
पुरुषोत्तम राम पाहुन के!!

करू सेवा तन-मन-धन सँ
बाजू निज भाषा मैथिल हे!
लियौ स्वराज्य जनक केर
बढबियौ शान मिथिला के!!

मिथिलाक पौराणिक-पूर्ण अर्थ होइत छैक:

म‌ जोड इ, थ जोड इ, ल जोड आ: 

म सँ मकार सृष्टिरचयिता ब्रह्मा आर एहि मे जुडल इ सँ शक्ति ब्रह्माणी

थ सँ थकार पालनकर्ता विष्णु आर एहि मे जुडल इ सँ शक्ति लक्ष्मी

ल सँ लकार लयकर्ता महेश आर एहि जुडल आकारान्त स्त्री यानि शक्ति पार्वती

एहि तरहें त्रिदेव संग त्रिशक्ति सँ संपन्न मिथिला संग कोनो तरहक धोखाधड़ी कर्ता लेल पापाचार सँ पैघ नरकगामी मार्ग होएत अछि। उपरोक्त रचना ताहि दिशा मे संकेत दैछ जे समर्पण मे कतहु सँ स्वार्थक प्रवेश कल्याणकारक नहि अछि।

जय मिथिला – जय जय मिथिला!!

हरि: हर:!!

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