मिथिलाक बाबाधाम: कुशेश्वरनाथ महादेव

राहुल झा, बनगाँव, सहरसा। सितम्बर ३, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद!!

साभार: नितीश झा द्वारा फेसबुक पर कैल गेल पोस्ट 

मिथिलांचलक बाबा बैद्यनाथ धाम आ उत्तर बिहारक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल शिवनगरी बाबा कुशेश्वरधाम शिव भक्त केर आस्थाक केंद्र मे प्रमुख अछि।

baba kusheshwarnathएतय साल भरि श्रद्धालुक लाइन लागल रहैत अछि, विशेष कय सावन महीना मे शिव भक्तक आस्था एतय छलकैत देखाइत अछि। सभटा मनोरथ केँ पुर करनिहार बाबा कुशेश्वर केँ जलाभिषेक करबाक लेल सावनक सोमवारी पर लाखों-लाख  संख्या मे श्रद्धालु पहुँचैत अछि।

समस्तीपुर-खगडिया रेललाईन पर हसनपुर रोड सँ २२ किलोमीटर आ दरभंगा सँ ६० किलोमीटर दूर, कोसी आ कमला बलानक संगम स्थल पर स्थापित बाबा कुशेश्वरनाथक महिमा अपरम्पार अछि।

baba kusheshwarnath1बाबाक अवतारक लऽ के क्षेत्र मे बहुते खिस्सा प्रचलित अछि। किंवदंतिक अनुसार कुशक घना जंगल केर बीच अवस्थित बाबा कुशेश्वरनाथ केर प्रादुर्भाव लगभग पांच सँ छह सौ बरख पूर्व भेल। रामपुर रौहत के स्मृति तेसतागा हजारी सबसँ पहिले शिवलिंग केर दर्शन केलैथ। घनगर कुश केर जंगल मे शिवलिंग केर प्रकट होय सँ एही स्थानकऽ नाम कुशेश्वरस्थान पड़ल। हजारी केँ शिवलिंगक दर्शन ओही समय भेल जहन ओ और आन चरवाहाक संग ओहि घनगर जंगल मे गाय चराबइ गेल छलाह। गाय चराबइक क्रम मे ओ देखलैथ जे एकटा बाछीक स्तन सँ दूधक धारा प्रवाहित भऽ रहल छल। यैह सिलसिला बहुत दिन धरि देखि कय चरवाहा हजारी आरो-आरो लोक सभ केँ कहानी बतेलैथ, हजारी ओहि स्थलकेर खोदाइ केलैथ आउर हुनका ओही ठाम ताहि समय शिवलिंग केर दर्शन भेल। ओ ओही समय कुशक छाड़ वला झोपड़ी घरनुमा मन्दिर निर्माण करौलैथ जे भूकंप एला सँ १३४१ ई० मे ई नष्ट भ गेल कहल जाइत अछि।

baba kusheshwarnath2एकटा आरो किंवदन्ति अछि जे स्कंद पुराणक अनुसार भगवान् राम केर पुत्र कुश कुशेश्वरनाथ केर स्थापना केने छला। एकटा दोसर कथा अनुसार सतयुग मे कुश नामक एकटा राक्षस परम शिवभक्त छलाह। भगवान विष्णु कुश केँ पृथ्वी केर भीतर प्रवेश कय ताहिक ऊपर शिवलिंग केर स्थापना केलैथ। कुश आराध्य देव केँ अपन ऊपर सँ हटेनै उचित नहि बुझलैथ आ अपन आराध्य हिरण्यदा सँ प्रार्थना केलैथ, जे कियो एही शिवलिंग केर पूजा करता हुनका धनक आभाव नै होयत। तिनकर सभटा कामना पूर्ण होयत। कुश केर ईष्ट देवी हिरण्यदा हिरनी गांम मे अखनो हिरण्यदे नाम सँ विख्यात छथि।

ओतय एकटा आन कथाक अनुसार एक समय मिथिला मे कुश मुनि भगवान शंकर केर दर्शनार्थ कुशक आसन पर बैसि तपस्या कय रहल छलाह। भगवान् केँ प्रकट भेला पर ओ कहलैथ जे अहाँकेँ देखय के इच्छा छल जे आब पूर्ण भऽ गेल। कुश केर भक्ति देखि भगवान् आशुतोष हुनका एकटा शिवलिंग दय कहला जे एकरा अपन आश्रम मे कुशेश्वरनाथ नाम सँ स्थापित करु, हम एतय आबै वला सभ लोकक मनोकामना पुर करब।

एतय सकरपुरा केर महारानी मंदिर केँ भव्य रूप देलथि। १९५७ ई० मे बिरला ट्रस्ट कलकत्ता एही मंदिर केर जीर्णोद्धार केलक। शिव भक्त सिमरिया तथा आन-आन जगह सँ पवित्र गंगाजल आ जल आदि लयकेँ सिंघैल, मझौल, गढपुर, हसनपुर होईत लगभग ७० किमी० केर दुरी तय करैत कुशेश्वरस्थान आबैत छैथ। आइयो बाबा कुशेश्वरनाथ केर नाम सँ राखल दूध २४ घंटाक बादो नहि फाटैत अछि। महादेव केर एकटा महिमा ईहो विख्यात अछि जे मस्सायुक्त (ऐहला) भेला पर लोक भांटा (बैगन) केर भार चढ़ायत तऽ ओहि मस्सा सँ मुक्ति भेट जाइत छैक।

आय बाबा कुशेश्वरनाथ जन-जन लेल मनोवांछित फल देबाक लेल प्रसिद्ध छथि। यैह करण अछि जे एतय लाखों‍-लाख केर संख्या मे भक्त आबैत अछि। शिवरात्रि, वसंत पंचमी, अनंत चतुर्दशी आ नवरात्रा मे एतय विशेष उत्सव होइत अछि। साथे सावन माह मे पूरा महीना एहि ठाम भक्त सबहक अपार भीड़ उमैड़ पड़ैत अछि। एकर अलावे सालों भैर प्रत्येक रैव दिन केँ भक्तक भीड़ जुटल करैत अछि।

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