डा. तोतरा हा केर खिस्सा

नैतिक कथा: कमजोरियो केँ शक्ति बनायल जा सकैत छैक!

– प्रवीण नारायण चौधरी

(प्रतीकात्मक - नाट्य-रूपान्तरणक फोटो)

(प्रतीकात्मक – नाट्य-रूपान्तरणक फोटो)

एकटा तोतराह छौड़ा मिथिला सँ भागिकय डा. तोतरा हा बनिकय खूब प्रतिष्ठा कमेलक। मैथिली मे ओकरा सब तोतराहा कहैत छलैक। तोतराहा माने बाजय मे लटपटेनाइ, आवाज साफ नहि निकलनाय, हकलाहट आदि होइत छैक। मैथिलीभाषी केँ माने एहि लेल याद कराबय पड़ि रहल अछि जे आब स्वयं मैथिलीभाषी दाँत बिदोरैत गर्व सँ बजैत देखाइत अछि जे ‘हेँ-हेँ-हेँ! हाँजी! दिल्ली में पैदा हुआ। मैथिली तो नहीं आती। घर में कभी-कभार मम्मी-डैडी को बोलते सुनकर थोड़ा-बहुत हम भी सीख लिये।’

हँ, तऽ ई कथा अछि डा. तोतरा हा केर! आब ओ दिल्ली मे क्लिनीक खोलने अछि। जही बात सँ लोक ओकरा खौंझबैत छलैक तेकरे ओ अपन बल बनाकय दरभंगाक डीएमसीएच सँ एमबीबीएस केर डिग्री बनाय आय अपना केँ डाक्टर बनौने अछि। ओकर क्लिनीक खूब चलैत छैक। लोक सबहक भीड़ बहुते लगैत छैक। हलाँकि ओकर बियाह जखन ठीक होइत छलैक तऽ भेद खूजि गेलैक जे ई झोरा छाप डाक्टर छी।

मिथिला मे जखन कोनो बेटीक बाप अपन बेटी लेल बियाह ठीक करय जाइत अछि आ ओकरा दूल्हा पक्ष किछु पाइ नहि मँगैत छैक, तऽ शंका बढि जाइत छैक। जी हँ! डा. तोतरा हा जतय क्लिनीक खोलने छल ओतुके एकटा मैथिल दरभंगा देखिकय पता करैत-करैत एतेक तऽ पता कय लेलक जे ई मैथिले छथि, कनेक सनकी टाइप केँ हेबाक कारण अपन नाम दिल्ली मे कियो विदेशी जेकाँ बुझय ताहि हेतु तोतरा-हा राखि लेलनि। अपन बेटीक विवाह लेल समुचित वर मानिकय ओ डा. तोतरा-हा केर बाप-माय सँ विवाहक लेल बात केलनि। डा. तोतरा-हा केर विवाह मे ११ लाख सँ शुरु भेल माँग अन्ततोगत्वा २.५ लाख मे फाइनल भेला पर कनियांक माय केँ सन्देह भेलनि आ ओ ई डाक्टर असली छी कि नहि से पता करय लेल लोक दरभंगा पठा देली, पता चलल जे ई झोरा-छाप डागदर थिका। अपन एक पुरान आ अनुभवी डाक्टर पीसाक संगे काज कय बीमारी आ दबाई करबाक नीक अनुभव कमे अबस्था मे भेट गेल छलनि। सोचला जे दिल्ली मे अपन नामो बदैल लेब आ ओतहि नकली प्रमाणपत्र पर डाक्टरी सेहो कय लेब।

आब नाम बदलबाक बेर छल। सोचलक जे बड़ गामक लोक सब तोतराहा-तोतराहा कहैत छल, से डा. तोतरा हा नाम राखि लैत छी। दिल्ली मे थोड़े न लोक सब केँ एतेक फुर्सत छैक जे ओ बिहार जेकाँ नाम पूछलाक बाद टाइटिल गुणे जाति अनुमान करय लागत। जँ कियो बिहरिया एना करबो करत तऽ माथ धूनैत रहि जायत जे ई ‘हा’ टाइटिल कोन होइत छैक। खुदा-न-खास्ता कियो दरभंगा सँ मैथिल होयबाक अनुमान कय जोड़ियो लेत, तऽ कहि देबैक जे ई ‘हा’ टाइटिल बुद्धिस्ट धर्मक बाबा सँ आबि गेल। जेना बाबा नागार्जुन सेहो बुद्धिस्ट बनि गेला तऽ लोक बैद्यनाथ मिश्र यात्री सँ हुनका नागार्जुन कहय लागल, तहिना हमहुँ कहि देबैक जे तिब्बत दिसका बाप आ मिथिलाक माय होयबाक कारण हमर नाम ‘तोतरा हा’ पड़ि गेल। विद्यालय मे सेहो तोतरा-हा पड़ि गेल। लेकिन नाम राखब वैह जाहि सँ भैर जिनगी लोक सब खौंझबैत रहल अछि। गामहु केर याद रहि जायत आ काजो नीक चलि जायत।

हलाँकि ओ बियाह ओकर कैन्सिल भऽ गेलैक, ओ पार्टी सेहो टूटि गेल आ उनटा एकर बदनामी करेबाक आ जेल मे पठेबाक जोगार सेहो लगा देलक, मुदा डा. तोतरा हा ओतय सँ राता-राती फरार भऽ गेल आ आइयो दिल्लीक दिलवाली भूमिक कोनो अन्य भूभाग मे ‘डा. तोतरा हा’ सँ इतर नाम सँ क्लिनीक चला रहल अछि। आब ओ पहिने सँ आरो बेसी परिपक्व भऽ गेल अछि। आ मात्र पूर्वक एक मित्र सँ भेंट करैत अछि जेकर माध्यम सँ ई कथा अपने लोकनिक सोझाँ आबि सकल अछि।

(ई कथा मे पात्रक नाम काल्पनिक छैक, कथावस्तु सत्यक समीप छैक।)

हरि: हर:!!

पूर्वक लेख
बादक लेख

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