ह’म कवि एक फेसबुकिया छी

ह’म कवि एक फेसबुकिया छी

– शिव कुमार झा टिल्लू

shiv kumar tilluह’म कवि एक फेसबुकिया छी
नहि घैल मुदा त’ चुकिया छी
आनक ग’रमे महीन साइलेंसर
हम फूटल फुकफुकिया छी
ह’म कवि एक फेसबुकिया छी …..

भाव शिल्प अजवारिकें लिखलहुँ
गहल लेखनी ताड़िकें लिखलहुँ
भखरल कम्प्यूटर पर सदिखन
ग्रहण आशकेँ जाड़िकें लिखलहुँ
कोनो आलोचक देखता कहियो
सभदिश हेरैत टुकटुकिया छी
ह’म कवि एक फेसबुकिया छी ….

आनक माँथे दू पोथी छपलै
मुदा अदृश्य आवरणमे झँपलै
जे देखलक ओहो मिथ्या कहै छै
ककरो नहि करेजतर खँपलै
सभक नीक करनी देखि चिकरब
पुरना इंजिन धुकधुकिया छी
ह’म कवि एक फेसबुकिया छी ….

जे सर्जक जतेक जोगार लगैतै
वेअह रंगबिरहा पुरस्कारकेँ पेतै
ओकरे जन परिजन सभ सदिखन
आनक चरित्रकेर दोख देखेतै
लड़िक’ कियो मैथिली हथियाबौ
सत्यक सोझाँ माँथझुकिया छी
ह’म कवि एक फेसबुकिया छी ….

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