लेखनी के धार प्रतियोगिता: पुरस्कृत रचना ‘बेटी’

सागर सन गहींर के नाम अछि बेटी
निरझर जल सन सच्चाई अछि बेटी
दृढ़ संकल्प के चट्टान सन अछि बेटी
बसंत फागुन के मंद मंद बसात सन अछि बेटी
दुख मे राहत के थपकी अछि बेटी
भरोसा और कोमलता के छाहरि अछि बेटी
संबंध के आधार के डोरा अछि बेटी
हीरा अछि बेटा त मोती अछि बेटी
कनिको दुख होयत हमरा त कानैयै बेटी
रोशन करत बेटा त बस एकेटा कुल के
दू दूटा कुलके लाज राखैयै बेटी
कियो ककरो स कम नहिं अछि हीरा अछि बेटा त मोती अछि बेटी….
कबुला करै छी बेटा लेल आ जन्म लैयै बेटी
खाद पानि दै छी बेटा के आ लहलहाइत अछि बेटी
एवरेस्ट पर ठेलै छी बेटा के आ चढ़ि जाइत अछि बेटी
कनाबैयै बेटा आ हँसाबैयै बेटी
खसाबैयै बेटा आ उठाबैयै बेटी
संग छोड़ि दैत अछि बेटा आ संग दैत अछि बेटी
खर्च होइयै बेटा पर आ चुकाबैयै बेटी
तखनो बेटा के चाह में जन्म सँ पहिने
ही खतम कय देल जाइत अछि बेटी
और अंत में
हम बेटी छी त की दुनिया के देखा देबै हम बेटी छी त की किछु बनि कय देखा देबै
ईन्द्रा भी बेटी छल आ सोनिया भी बेटी अछि आ प्रतिभा भी बेटी अछि आ हमहूं बेटी छी
किछु करि कय देखा देबै शिक्षा के ज्योति स अंधियारा मिटा देबै
धन्यवाद🙏💕
आशा चौधरी

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