एन्टा अमेरिका द्वारा विवाह पंचमी एवं महाकवि विद्यापतिक स्मृति समारोह क्रमशः आइ आ काल्हि

१९ दिसम्बर २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!!

एन्टा – एसोसिएशन अफ नेपाली तराईयन इन अमेरिका – अमेरिका मे नेपालक तराईवासी लोकनिक संगठन द्वारा आइ राम-जानकी विवाह पंचमीक सुअवसर नेपालक समय पौने ९ बजे सँ जूम मीटिंग केर मार्फत कार्यक्रम प्रस्तुत कयल जायत। तहिना काल्हि २० दिसम्बर २०२० केँ महाकवि कोकिल विद्यापतिक स्मृति पर्व समारोह मनाओल जायत। ईहो कार्यक्रम जूम प्रविधिक प्रयोग कय विभिन्न विद्वान्-अभियानी एवं कलाकार लोकनिक संग काल्हि संध्या नेपालक समय पौने ८ बजे सँ प्रस्तुत होयत। ई जानकारी कार्यक्रम संयोजक मोहन यादव करौलनि।

ओ कहलनि जे राम-जानकी विवाह महोत्सव पर अमेरिकाक विभिन्न भाग मे रहनिहार तराईवासी सब एहि कार्यक्रम सँ जुड़ता। ई कार्यक्रम ई‍-नेपलीज केर फेसबुक पेज सँ लाइव प्रसारित कयल जायत। पूरे संसार भरिक लगभग ५० लाख नेपाली व भारतीय एहि पेज केँ फौलो करैत छथि। मैथिली भाषाभाषीक एहि विशेष कार्यक्रम केँ देखबाक सुअवसर हुनको सब केँ जुड़तनि। मर्यादा पुरुषोत्तम राम संग जानकी केर विवाह केना भेल छल सेहो देखायल जायत। एहि अवसर पर गीतनाद आ भजन-कीर्तन सेहो प्रस्तुत कयल जायत। एन्टा परिवारक स्थानीय सदस्य लोकनि एकत्रित भऽ कार्यक्रम स्थल पर सेहो ई सब देखि पेता। कोरोना महामारीक कारण प्रत्यक्ष देखनिहार केँ सामाजिक दूरी व अन्य नियमक पालन करैत उपस्थित होबय पड़तन्हि, तेँ ई संख्या कम रहि सकैत अछि।

काल्हि महाकवि कोकिल विद्यापतिक स्मृति समारोह मे प्रख्यात विद्वान् लोकनि राम भरोस कापड़ि भ्रमर, देवेन्द्र मिश्र, रोशन जनकपुरी, रामरिझन यादव, रामनारायण देव, दिनेश यादव, श्यामसुन्दर यादव पथिक संग अनेकों प्रसिद्ध गायक-कलाकार लोकनि सेहो जूम प्रविधि मार्फत उपस्थित रहता। वरिष्ठ गायक गुरुदेव कामत, लोकगायिका सोनाली कर्ण, अंजू यादव, अनुजा चौरसिया, अंजली पटेल, संतोष सानू – हिनका लोकनिक सुमधुर आवाज मे विद्यापतिक गीत संग अन्यान्य मैथिली गीत-संगीत केर प्रस्तुति होयत। ई कार्यक्रम सेहो ई-नेपलीज केर फेसबुक पेज सँ लाइव प्रसारण होयत।

संयोजक यादव बतेलनि जे मैथिली भाषाभाषी समुदाय पूरे विश्व मे अपन दक्षता आ योग्यता सँ स्थान बनौने छथि। मिथिला जेहेन प्राचीन आ पूर्ण संस्कृति-सभ्यता केर महत्व पूरे संसार केँ जनेनाय जरूरी छैक। एन्टा एहि दिशा मे निरन्तर प्रयास करैत आबि रहल अछि। एहि सँ पहिने सेहो सामा-चकेवा, होली आदि सामूहिकताक परिचायक मिथिला विशेष पर्व पर एन्टा निरन्तर कार्यक्रम करैत रहल अछि। आगाँ ईहो लक्ष्य एन्टा केर छैक जे भाषा, कला, शिक्षा, समाज आ विभिन्न अभियान – उत्थान मे लागल लोक सब केँ जोड़िकय आगू बढी। एहि लेल आम आह्वान करैत सभक सहयोगक आकांक्षा सेहो ओ रखलाह। सभक सलाह आ सुझाव आमंत्रित करैत ओ आइ आ काल्हि केर कार्यक्रम मे बेसी सँ बेसी लोक जुड़थि से अपील कयलनि।

मैथिली जिन्दाबाद सँ वार्ताक क्रम मे समारोह प्रति सुझावक आग्रह पर सम्पादक प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा निम्न इनपुट देल गेल अछि। श्री यादव एहि पर समुचित ध्यान देबाक आश्वासन सेहो देलनि अछि। 

विद्यापति जी के स्मृति कियैक?

मनुष्य समाज लेल निजत्व अर्थात् अप्पन चीज जेना अपने आप, अपन माँ-बाप, अपन परिवार, अपन समाज, अपन गाम, अपन लोक, अपन बोली-शैली (यानि भाषा), अपन खेती-गृहस्थी – सब किछु अप्पन कहिकय जे होइत छैक – जेकरा असल मे अपन देश धरि लय जा सकैत छी, अपन विश्व आ समग्र मानवता धरि अपने-अपन कहि सकैत छी, अपन पर्यावरण आ वातावरण सँ अपन ब्रह्माण्डहु केर रचना मानल गेल छैक – सैह ‘देसिल वयना सब जन मिट्ठा’ केर सूत्रपात कयनिहार महान महादेव-गंगा-काली भक्त कवि कोकिल विद्यापति केँ स्मृति आइ धरि हम-अहाँ सब करैत छी – जाहि सँ अपन मूल्य आ मान्यता कतहु सँ पिछड़ल आ अवहेलनाक शिकार नहि रहय। एहि दिशा मे नव-नव संकल्प लैत अपन समाज केँ नव दिशा मे अग्रसर करबाक काज करैत अछि विद्यापति स्मृति। आपस मे कय रंगक विवाद जेना जातीय पहिचान के आधार पर अगड़ा-पिछड़ा मे विभाजन, शुद्ध-अशुद्ध बोलीचाली के कारण आपस मे भेदभाव, गरीबी-अमीरी के वर्ग मे विभाजन – एहि सब तरहक दुष्ट-दुर्जन षड्यन्त्र केँ अन्त करबाक लेल युवा पीढी मे जागरण आवश्यक – ई सन्देश देनाय जरूरी छैक।
 
अन्त मे, साहित्य केर धारा सँ समाज केँ सही दिशा प्राप्त होइत छैक। आइ मैथिली साहित्य केँ नवका-नवका साहित्य सब दाबि देलकैक, जेना नेपाल मे नेपाली, भारत मे हिन्दी… लोक अपनहि साहित्य सँ वंचित रहत त ओकरा मे आन्तरिक शक्ति कहियो मजबूत नहि हेतैक। ओ स्वतः अपना केँ दोसर दर्जा के नागरिक मान-बुझत। एक नम्बर मे मालिकत्वक संग नेपाली आ हिन्दी भाषा ओकरा पर राज करतैक। एहि लेल मिथिला जेहेन प्राचीन सभ्यताक रक्षार्थ मैथिली व एकर कतेको रास बोली सब यथा मगही, बज्जिका, अंगिका, ठेंठी, जोलहा, छिकाछिकी आदि… एकरा सब केँ मजबूत करब जरूरी छैक। आर मजबूती सृजनकर्म सँ अबैत छैक, खूब लिखू, खूब पढू, खूब अपन कला, फिल्म, सांस्कृतिक समागम केँ बढावा दियौक। गरीब आ असहाय केँ आगू बढाबय लेल सक्षम वर्ग संकल्प लिअ। हरिः हरः!!
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