आधुनिक मिथिला मे नारी के योगदान

#आधुनिक मिथिला में नारी के योगदान#

लेखनी के धार प्रतिस्पर्धा के अहि बेर के विषय बहुत कठिन अछि।तकर कारण जे महिला सब स संबंधित विषय में बिना गंभीर चिंतन के कुछ भी कहनाय बहुत भारी पडि सकैत अछि जहि काल में नारीवाद के सूर्य अपन चरम उत्कर्ष पर अछि।ओहो में मिथिला के नारी के विषय में।जे भगवान राम के भी सम्मुख भ क हुनकर सब पुरखा उकटि देलखिन।और भगवान कुछ नहि बजलथि बस मुस्कुराइत सुनैत रहलथि।तैयो हम कनि दुस्साहस और व्यंग्य के साथ आधुनिक मिथिला में नारी के योगदान विषय पर कविता के माध्यम स कुछ पंक्ति रखैत छी।

सुनू लोग सब बात हमर यौ।
कनि लगाक ध्यान।।
की अछि आधुनिक मिथिला में।
नारी के योगदान।।

कियो अल्प त कियो निरक्षर।
पहिने राखथि ज्ञान।।
तैयो जग के लोग कहै छल।
मिथिला सब सं महान।।

परिवर्तन आयल नवयुग में।
बी ए एम ए पास भेली।।
हिंदी और अंग्रेजी सिखली।
मुदा मैथिली बिसरि गेली ।‌।

घरक काज में लाज लगै छैन।
घटैन जेना कि मान।।
आधुनिक मिथिला में देखू।
नारी के योगदान।।

भाषा वसन चलन और पावैन।
सब निर्दोष सदोष बनल।।
माडर्न बनबा के फिराक में।
कोकिल बयना काक बनल।।

आधुनिक हो या पौराणिक।
कर्त्तव्य के राखथि ध्यान।।
तखने सही दिशा में होयत।
नारी के योगदान ।।

नर प्रजाति स कदम मिलाक।
खूब बढेलथि मान।।
जीवन के हर कार्य क्षेत्र में।
भेंट गेलनि स्थान ।।

केवल प्रतिभा के बल पर ही।
प्राप्त केलनि सम्मान।।
मिथिला में मैथिल नारी के।
बहुत अछि योगदान।।

शुरुआत अछि।क्रमशः बढ़त पुनः समय मिलला पर । क्रमशः—–

कृष्ण कान्त झा

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