मानवीय एकजुटता केर मुख्य आधार आ मिथिला

हम सब एक छी

हम सब मुमुक्षु मानव जाति केर लोक केवल मानव छी, मानवता हमरा सभक एकमात्र धर्म अछि। सब एक्के स्कूल केर छात्र, एक्के पढ़ाई, एक्के शिक्षक, सभक लक्ष्य सेहो एक जे मानव रूप सफल जीवन जियैत अपन कर्तव्य पालन करैत चली।

गुरु साक्षात परब्रह्म परमात्मा होइत छथि। चाहे ओ मौलवी साहब होइथ या पंडित जी, चाहे ओ यादव जी होइथ या दास जी या महतो जी कि पासवान जी, गुरु हमरा सभक इष्ट देवता थिकाह।

विद्यालय केर दिन मोन पाड़ैत छी आ यथार्थ शिक्षा मुताबिक जीवन मे कोन मूल्य व मान्यता पर चलबाक चाही से बेर बेर आत्मचिंतन करैत छी। ई चिन्तन अपन मानव समाज सँ मिथिला धरि अनैत छी, कारण मिथिलारूपी एक्के गाछक अनेकों ठाढ़ि पात में अन्तर्विभाजनक कुरूपता चिन्तित कयने अछि।

लोकतंत्र में राजनीति आ सत्ता या सत्ता आ राजनीति में जातिवादिता आ धर्म एतेक हावी अछि जे हम मानव समुदाय एहि दुइ अवयव में बदतर ढंग सँ ओझरायल जा रहल छी।

एक दिश हम सब सुशिक्षित-सुसंस्कृत समाज केर परिकल्पना करैत छी, सभक लेल समान नागरिक अधिकार आ प्राकृतिक न्याय केर वकालत करैत छी, मुदा दोसर दिश वैह पुरातन व सामन्ती व्यवस्था केर देल अव्यवहृत जातिवाद में स्वयं उलझल छी, सारा सिस्टम उलझेने छी, त ई केहेन मानवतावाद भेल एहि पर चिन्तन करू।

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था अन्तर्गत शिक्षित समाज ऊपर जातिवादिता व धार्मिकता केर प्रभाव। स्मरण करू, आजुक शिक्षा वेद आ ब्राह्मण पाठशाला वला नहि अछि बल्कि सामान्य विद्यालय जतय योग्य आ समावेशिक शिक्षक समाज द्वारा पठन पाठन कराबेवला शिक्षण कार्य कयल जाइछ। तखन आजुक पढ़ल लिखल समाज मे जातीयता केर आधार जन्म आधारित राखब कोन तरहक लाभ या हानि करैत अछि एहि पर सोचू।

स्पष्ट छैक जे सत्ता प्राप्ति केर जे राजनीति छैक ताहि लेल मतदान आ मतदाता संख्या आजुक पढ़ल लिखल समाज केँ जानि बुझि कय जातीय समीकरण बनाकय ओझरउने अछि। कखनहुँ वर्गवाद केर वर्गीकरण में जातीय आधार, कखनहुँ पूर्व व्यवस्था केर शोषित दमित वर्ग, कखनहुँ पिछड़ा अति पिछड़ा वा अनुसूचित जनजाति कि दलित वर्ग, अनेकों वर्गीकरणक विन्दुपर अपन अपन सत्तारोहण केर राजनीति करैत राजनेता बढ़ि जाइत अछि, मुदा ओ वर्गीकृत सूचीकृत जाति समुदाय में वितरित लाभ समुचित ढंग सँ नहि पहुंच पबैत अछि।

फेर एकर साइड इफेक्ट्स आन आन समुदाय पर पड़ि जाइत छैक आर एहि तरहें समाज मे निर्धारित लक्ष्य विकास के बदला अपन अपन जातीय अवस्था केर गणना में लोक फँसल रहि जाइत अछि। चुनाव आयल, सरकार बनल, 5 वर्ष शासन कयलक, नीक बेजा सब भेल, फेर पुनर्मुसिको भव। फेर सब अपन अपन धर्म आ जाति में उलझल आ तदनुसार नेता चुनलक। कि लाभ? भारत जेहेन महान लोकतांत्रिक गणतंत्र में आइ 7 दशक बाद किछु अग्रगामी अवस्था नजरि पड़य लागल अछि ओना। बिहार जेहेन जगह में सेहो लोक मुद्दा के राजनीति करय लागल देखय में आयल एहि बेर 2020 में।

काल्हि महान गीतकार रामभरोस कापड़ि भ्रमर रचित सुन्दर मिथिला गान ‘जगत में मिथिला हमर महान’ केर लोकार्पण समारोह सम्पन्न भेल। एहि समारोह में भारत आ नेपालक मिथिला केर एक सँ बढिकय एक दिग्गज व्यक्तित्व लोकनि सहभागी रहथि। हुनकर नाम के टाइटल महत्वपूर्ण नहि छल बल्कि अपन अपन जीवन मे अपन भाषा, संस्कृति आ मातृभूमि प्रति निष्ठावान योगदान महत्वपूर्ण छल। सब कियो जनक समान महान कर्मठता सँ मिथिला केर हितचिंतक बनलखिन आर तेँ एतेक महत्वपूर्ण कार्यक्रम केर हिस्सा भेलखिन्ह।

चाहे 21 वर्ष केर युवा द्वय विद्यानन्द बेदर्दी-गजेन्द्र गजुर होइथ, किंवा वरिष्ठजन विवेकानंद झा, महान शिक्षाविद साहित्यकार देवेन्द्र मिश्र होइथ वा प्राज्ञ धीरेन्द्र प्रेमर्षि, कलासम्पन्न सुपरिचित नाम मुरलीधर होइथ वा नेपालदेशक शास्त्रीय संगीत केर जानल मानल नाम गुरुदेव कामत, लोकसाहित्यकार डॉ महेन्द्र नारायण राम होइथ आ कि सुप्रसिद्ध उद्घोषक संस्कृतिविद कमलाकांत झा, महान संकल्पक विनोद कुमार झा होइथ आ कि अपन कम उम्र में मिथिलाक्षर लेल अभूतपूर्व प्रयास करनिहार विनीत ठाकुर, अपने सभ कियो अपन जातीय पहिचान सँ इतर निजी संकल्प आ कर्तव्यपरायणता सँ गानल आ मानल गेलहुँ।

यैह यथार्थता समाज केर हरेक वर्ग केँ एक कयने अछि। लेकिन विभाजनकारी तत्व अहूँ केँ बाँटिकय देखत, ओकर एतबे काजे छैक। अनेक विभेद ओकर स्वयं केर पीलियाग्रस्त नजरि में छैक, ओ सब किछु पीयर पीयर देखत। सृजनशीलता केर श्रृंगार कयनिहार सृजन पर कायम रहि समग्र मानवता केर हित करैत रहत, बढ़ैत रहत। अस्तु! प्रणाम आ दीपावली केर शुभकामना बेर बेर!😊

हरि हर!!

बादक लेख

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