मैथिली केर काज केना होइत छैक

मैथिली में काजक मोल

आइ सँ करीब 8 वर्ष पूर्व परम् विद्वान डॉ देवेन्द्र झा (बिहार विश्विद्यालय केर पूर्व मैथिली विभागाध्यक्ष) केँ सुनने रही ई कहैत जे मैथिली भाषा सँ एमए आ होम्योपैथी डॉक्टर केँ मिथिला समाज मे हरही सुरही बुझि कोनो खास प्रतिष्ठा नहि भेटल करय हुनकर जमाना में… किछु संकेत एहनो रहनि जे एहि दुइ तरहक विद्वानक विवाह केर समय घटक लोकनि हिनका सब केँ प्राथमिकता नहि देल करथि। सभा मे जोरदार ठहाका चलल छल। हुनका सँ पूर्वहि विद्वान आ डॉ झा केर कक्षामित्र डॉ राम अवतार यादव स्वयं अंग्रेजी भाषा केर विद्या अर्जित करितो मैथिली भाषा मे खोज, अनुसंधान आ शोधमूलक लेखनी करबाक प्रेरणा दैत मैथिल सन्तान सँ एहि दिशा में आर गम्भीर आ सक्रिय कार्य करबाक आह्वान कयने रहथि। ओ आत्मालोचना करैत विद्यापति केर पदावली कतेक प्राचीन वा कतेक मौलिक अछि सेहो नहि खोज कयल गेल से कहने रहथि। एहि पर दुनू विद्वान मित्र लोकनिक सम्बोधन में एक-दोसरक मत प्रति खण्डन मण्डन चलि रहल छल। डॉ यादव केर दावी केँ डॉ झा खारिज कयलनि से विद्यापतिक पदावली मादे नहि केवल मैथिल विद्वानक मत केर एकल उदाहरण सँ बल्कि अनेकों गणमान्य बंगाली विद्वान, स्कॉटिश विद्वान, अंग्रेज शोधकर्ता सह विद्वान लोकनिक विद्यापति केर पदावली केँ कहियो नहि अस्त होइवला सूर्य सँ तुलना करबाक दृष्टांत व उक्ति सभ रखैत। हम एक मुमुक्षु अत्यंत परमानन्द प्राप्त कयने रही तहिया। ई आख्यान संयोगवश वीडियो फॉरमेट में हमर यूट्यूब चैनल ‘प्राण हमर मिथिला’ पर सजीव अछि। विद्यापति स्मृति पर्व समारोह 2070 केर उद्घाटन सत्र केर सुन्दर तुकबन्दी में विद्वान स्रष्टा सियाराम झा सरस केर ओजस्वी सम्बोधन आ मिथिला केर वर्णन संग परमेश्वर कापड़ि जीक सम्बोधन आ श्यामल सुमन केर प्रस्तुति ठोकलहुँ पीठ अपन अपनहि सँ सहित करीब 21 गोट मैथिल विद्वानक सम्बोधन बेर बेर सुनबाक योग्य अछि।

डॉ झा केर उक्ति आइ एहि लेल मोन पड़ल जे किछु दिन पूर्व मैथिली जिन्दाबाद वेब पोर्टल केँ आर अधिक प्रभावकारी बनेबाक लेल अपन मैथिलीभाषी सँ जगह जगह एक प्रस्ताव राखल, विज्ञापन सहयोग मार्फ़त किछु कोष बनय त एकटा इंटर्नशिप स्तर केर नवतुरिया जर्नलिस्ट लोकनि केँ एहि पोर्टल पर देय पारिश्रमिक सहित किछु सारगर्भित व उपयोगी संचारकर्म करबाबी। एखन करीब पांच दिन बीतल। एक युवा उद्यमी धीरज बर्मा संज्ञान लेलनि आ विज्ञापन केर कतेक शुल्क लागत से पुछलनि। मैसेंजर पर मैसेज देलाक बाद फोन सँ सेहो बात कयलाह। किछु महत्वपूर्ण व्हाट्सअप समूह पर अत्यन्त सहयोगी भावना रखनिहार सेहो सार्थक भरोसा देलनि, सभक सहयोग भेटय से शुभकामना सेहो आयल। किछु एहनो सहयोगी छथि जिनका फोन पर या भेंट कय केँ कहबनि त जरूर किछु न किछु विज्ञापन देता। एक संस्थागत कार्य कयनिहार मित्र केँ बाते बात में एहि तरहक सहयोग हुनको सब केँ जीवन्त संचारकर्म लेल करय पड़त, नहि त भाषा साहित्य बचेबाक खोखला चिन्तन या चिन्ता सँ मैथिली इंडेन्जर्ड भाषा (लोपोन्मुख भाषा) केर श्रेणी सँ बाहर नहि निकलत कहलियन्हि। ओहो निजी समस्या सभक विवरण दैत नहि पान त पानक डंटी वला भरोसा देलनि।

पिछला 5 वर्ष सँ सर्वर चार्ज, होस्टिंग चार्ज आ डिजाइन मेंटिनेंस आदिक संग अन्य आयोजनादि पर समय समय पर विशुद्ध निजी खर्च करबाक स्थिति अछि। बीच में दिल्ली सँ पाक्षिक प्रिन्ट निकालबाक लेल सहयोगी मित्र सभक एकटा क्लब बनेलहुँ। स्वेच्छा सँ कतेको मित्र भाषा आ संचारकर्म लेल 200 टका, 500 टका मासिक व अन्य तरहक सहयोग लेल बाकायदा मैन्युटिंग पुस्तिका में हस्ताक्षर सेहो कयलाह। अपन निजी प्रतिबद्धता सँ वर्ष 2016 में दुइ अंक केर करीब 50 हजार खर्च कय पत्रिका हिन्दुस्तान आ नेपालक विभिन्न स्थान पर पहुँचेलाक बादहु गछल सब्सक्रिप्शन शुल्क वसूली आइ चारि वर्ष धरि बाकिये अछि। किछु परम सहयोगी आ सद्भाव देखेनिहार विज्ञापन सेहो छपबेलाह लेकिन ओहो लोकनि गछल शुल्क आइ धरि अपनहि पास रखने छथि। त एहिना चलैत छैक मैथिली केर काज!

ढकोसला आ बड़ बड़ दावी सब जतय ततय देखय लेल भेटैत अछि। एक दशक सँ लगभग सौंसे घुमिकय देखलियैक। आयोजक अपनहि व्यथा में भेटल। आगू जे बढ़ल ओ अपने हलाल भेल। अखिल भारतीय मिथिला संघ केर अध्यक्ष जी श्री विजय चन्द्र झा जिनकर अदम्य साहस आ एक सँ बढिकय एक कार्य करेबाक समर्पण-लगड़पन देखि हम ‘बाबा’ कहि सम्बोधन करैत छियन्हि ओहो अपन अनुभव सुनबैत कहला, “पैसा मंगन्तम त ढुन द पदंतम! मिथिला के बेसी लोक टिटकारी आ पिहकारी देब जनैत छथि, बेर पर सब नुकायल रहैत छथि। सहयोगी विरले भेटत।” मिथिला आन्दोलनक प्रखर सिपाही आ हमर आदर्श पुरुष डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू केर सम्बन्ध में अनेकों भ्रान्ति आ भड़काऊ बात लोक सब करैत छथि, मुदा स्वयं बैजू कोन खजाना आ केहेन बियोंत सँ एतेक रास काज करैत करबाबैत छथि से नजदीकी लोक केँ नीक सँ पता छन्हि। मैथिली में काज कयनिहार जे कियो छथि, हुनका उदासीन मैथिलीभाषी केर असहयोग आ निरुत्साहित करबाक कुटिचैल सँ जुझय पड़ैत छन्हि, तखनहि थोड़ बहुत काज भ पबैत अछि।

तखन कहू जे काज होइत छैक केना? एहि पर भाग-2 में फोकस करब। स्वयं जानकी केर काज, जे अष्ट सिद्धि नव निधि केर दात्री छथिन, हुनकर काज में विशेष दूत सब वैह पठाकय काज करा रहली अछि से संछेप में बुझू। एहि यज्ञ में जे हविष्य दान करैत अछि ओकरे टा पता छैक जे एकर प्रतिफल कि होइछ। डॉ झा केँ भले शुरू में विवाह में दिक्कत भेल हेतन्हि, मुदा आइ विश्व केर विलक्षण विद्वान में हुनकर गिनती होइत छन्हि आ से मैथिली केर कृपा सँ। जे मैथिली केर काजक एहि अनमोल मोल केँ बुझलक से चारू पुरुषार्थ अर्जित कयलक। अस्तु, जगदम्बा केर कृपा सब पर बनल रहय। कुटिचैल केँ सेहो तदनुसार दण्ड भोगहे पड़ैत छैक। एखन एतबे!😊

हरि हर!!

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